दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में इमाम साहिब इलाके में स्थित दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम विधेयक (UAPA) की धारा 8(1) के तहत गैर-कानूनी संस्था घोषित कर दिया है। यह दक्षिण कश्मीर का सबसे बड़ा मदरसा माना जाता है, जो करीब 15 एकड़ जमीन पर फैला है और इसमें एक 5 एकड़ का बगीचा भी शामिल है। यहां लगभग 500 छात्र पढ़ते हैं।
यह कार्रवाई कश्मीर डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने की। उन्होंने शोपियां के SSP की रिपोर्ट और उपलब्ध सबूतों के आधार पर यह फैसला लिया। SSP ने 24 मार्च 2026 को एक डोजियर दिया था, जिसके बाद 24 अप्रैल 2026 को यह आदेश जारी हुआ। अब इस मदरसे को सील करने और उससे जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। छात्रों को पास के सरकारी स्कूलों या अन्य रजिस्टर्ड मदरसों में शिफ्ट करने की बात कही गई है।
क्या है मामला
जामिया सिराज-उल-उलूम की स्थापना करीब 25 साल पहले जमात-ए-इस्लामी ने की थी। यह संगठन 28 फरवरी 2019 को केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। प्रशासन के मुताबिक, मदरसे के सभी अहम पदों पर जमात-ए-इस्लामी के लोग हैं और यह पूरी तरह उसी के नियंत्रण में चलता है। बाहरी तौर पर यह धार्मिक शिक्षा देने वाला केंद्र दिखता है, लेकिन आरोप है कि यहां चरमपंथी जिहादी विचारधारा को बढ़ावा दिया जाता रहा। कई पूर्व छात्र आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए या अलगाववादी गतिविधियों में ओवरग्राउंड वर्कर के रूप में काम करते रहे।
आरोप क्या हैं?
प्रशासन का कहना है कि मदरसा टेरर फंडिंग, आतंकियों की भर्ती और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों का केंद्र रहा है। NIA और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कई बार यहां टेरर फंडिंग और रिक्रूटमेंट की जांच की है। कुछ शिक्षकों को इन मामलों में गिरफ्तार भी किया जा चुका है। 2014 के बाद से सक्रिय करीब एक दर्जन आतंकियों का इस मदरसे से लिंक बताया गया है। खासतौर पर, पुलवामा हमले में शामिल सज्जाद भट 2017 के अंत तक यहीं पढ़ता रहा। जांच में पता चला कि मदरसा अनरजिस्टर्ड है, जमीन कब्जे में ली गई है और कानूनी निगरानी से बचने की कोशिश की गई। वित्तीय लेन-देन में भी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
मदरसे के चेयरमैन को शो-कॉज नोटिस दिया गया था, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। SSP के डोजियर में साफ कहा गया कि संचालक इन गैर-कानूनी गतिविधियों से वाकिफ थे।
प्रशासन का कदम
जिले के डीएम अंशुल गर्ग ने UAPA की धारा 8(1) का इस्तेमाल करते हुए पूरे संस्थान को अनलॉफुल एंटिटी/प्लेस घोषित किया है। इसका मतलब है कि अब यह जगह प्रतिबंधित संगठन के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकेगी। आगे इसे पूरी तरह सील करने और संपत्ति जब्त करने की तैयारी है।
















