Red Fort Blast: दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। ये गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग के केस से जुड़ी है। ईडी ने दिल्ली के 19 ठिकानों पर छापे मारे, जिसमें यूनिवर्सिटी, सिद्दीकी का घर और उनके रिश्तेदारों के ठिकाने शामिल थे। छापों में 48 लाख रुपये कैश, कई डिजिटल डिवाइस और जरूरी कागजात जब्त हुए। सिद्दीकी अल-फलाह ग्रुप का चेयरमैन होने के साथ ही 1995 से अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी है।। ये ट्रस्ट ही यूनिवर्सिटी और इससे जुड़े कॉलेजों को चलाता है।
गिरफ्तारी के पीछे की वजहें
ईडी ने सिद्दीकी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धारा 19 के तहत अरेस्ट किया। छापों से पता चला कि ट्रस्ट के फंड्स का बड़ा खेल हुआ है। कोर्ट में पेश करने के बाद उसे रिमांड पर लिया गया, और जांच अभी चल रही है। ईडी का कहना है कि ये सब दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की दो एफआईआर से जुड़ा है। इनमें यूनिवर्सिटी पर फर्जी दावे करने का आरोप है, जैसे एनएएसी से मान्यता और यूजीसी एक्ट की धारा 12(बी) के तहत रिकग्निशन। लेकिन यूजीसी ने साफ किया कि अल-फलाह सिर्फ स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी के तौर पर 2(एफ) के तहत मान्यता प्राप्त है, 12(बी) के लिए कभी अप्लाई ही नहीं किया। जांच में ये सामने आया है कि सिद्दीकी ट्रस्ट पर पूरा कंट्रोल रखता था।
दिल्ली ब्लास्ट से कनेक्शन
दिल्ली में लाल किला ब्लास्ट में शामिल आरोपी अल-फलाह यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट था। फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से गिरफ्तार कई आतंकी भी इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े थे। ब्लास्ट की जांच बढ़ी तो यूनिवर्सिटी की फंडिंग पर सवाल उठे। ईडी को शक हुआ कि ट्रस्ट के पैसे का गलत इस्तेमाल हो रहा है। 1995 में बने इस ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी को खड़ा किया, लेकिन अब आरोप है कि चैरिटी के नाम पर कमाई हो रही थी।
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ईडी की जांच और छापे
18 नवंबर को दिल्ली के 19 लोकेशन्स पर ईडी की टीम ने छापा मारा। सिद्दीकी के घर से 48 लाख कैश निकला। इसके अलावा डिजिटल डिवाइस और डॉक्यूमेंट्स से फंड ट्रांसफर का पूरा नेटवर्क खुला। जांच में पता चला कि ट्रस्ट को मिले पैसे फैमिली की कंपनियों में ट्रांसफर हो जाते थे। कंस्ट्रक्शन और कैटरिंग के कॉन्ट्रैक्ट सिद्दीकी की पत्नी और बच्चों की कंपनियों को दिए जाते। करोड़ों रुपये का प्रोसीड्स ऑफ क्राइम यानी गैरकानूनी कमाई हुई, जिसे शेल कंपनियों के जरिए लेयरिंग की गई। ईडी ने कहा कि जब्त सामान से साफ है कि फंड्स कैसे इलीगल तरीके से शिफ्ट और यूज हुए। सिद्दीकी का पूरा कंट्रोल ही इसकी जड़ था।
शामिल लोग और फाइनेंशियल डिटेल्स
इस केस का मुख्य आरोपी जावेद सिद्दीकी ही है। लेकिन, इसमें उसकी फैमिली भी घिरी हुई है। पत्नी और बच्चों की कंपनियां फंड्स रिसीव करती रहीं। जब्त कैश 48 लाख का है, लेकिन कुल मिसअप्रोप्रिएशन करोड़ों में है। शेल कंपनियां इस चेन का हिस्सा बनीं। दिल्ली पुलिस की एफआईआर ने ईडी को लीड दिया, और अब कोर्ट प्रोसीडिंग्स में और डिटेल्स सामने आ सकती हैं। जांच से लगता है कि यूनिवर्सिटी का नाम इस्तेमाल कर चैरिटी फंड्स का दुरुपयोग हुआ।

















