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होम भारत राजस्थान

‘भोजन-भजन अपनी भाषा और परंपरा के अनुसार करें’

जयपुर में संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर '100 वर्ष की संघ यात्रा श्रृंखला' के अंतर्गत 'उद्यमी संवाद : नए क्षितिज की ओर' कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने राजस्थान के प्रमुख उद्यमियों को सम्बोधित करते कहा कि संघ को प्रत्यक्ष अनुभव किए

Written byPanchjanyaPanchjanya
Nov 17, 2025, 04:58 pm IST
in राजस्थान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत

गत 13 नवंबर को जयपुर में संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर ‘100 वर्ष की संघ यात्रा श्रृंखला’ के अंतर्गत ‘उद्यमी संवाद : नए क्षितिज की ओर’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने राजस्थान के प्रमुख उद्यमियों को सम्बोधित करते कहा कि संघ को प्रत्यक्ष अनुभव किए बिना संघ के बारे में राय मत बनाइए। संघ पूरे समाज को ही संगठित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को परम वैभव संपन्न और विश्वगुरु बनाना किसी एक व्यक्ति के वश में नहीं है। यह सबका काम है और इसके लिए सबको साथ लेकर चलना है। संघ की स्थापना किसी एक विषय को लेकर नहीं हुई।

संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार क्रांतिकारी थे। वे कांग्रेस के बहुत सक्रिय कार्यकर्ता थे। जो भी देश-हित और समाज-हित में चल रहा था, उसमें वे सक्रिय रहे। असहयोग आंदोलन में उन पर राजद्रोह का अभियोग लगा। उन्होंने बचाव में पक्ष रखना चुना क्योंकि इससे दोबारा भाषण का मौका मिलता। उनके उस भाषण को सुनकर जज को कहना पड़ा कि उनका यह भाषण पहले भाषण से भी ज्यादा राजद्रोही है।

डॉ. हेडगेवार ने अनुभव किया कि समाज में डेढ़ हजार साल से जो दुर्गुण चले आ रहे थे, उन्हें दूर करना जरूरी है। उन्हें महसूस हुआ कि संपूर्ण हिन्दू समाज को संगठित किए बिना भारत इस पुरानी बीमारी से मुक्त नहीं होगा। इसलिए उन्होंने एक दशक तक विचार और प्रयोगों के बाद संघ की स्थापना की।

सरसंघचालक ने आगे कहा कि भारत में हमारी पहचान हिन्दू है। हिन्दू शब्द सबको एक करने वाला है। हमारा राष्ट्र संस्कृति के आधार पर एक है, न कि राज्य के आधार पर। पुराने समय में जब राज्य अनेक थे तब भी हम एक देश थे, पराधीन थे, तब भी एक देश थे। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्य सप्ताह में कम से कम एक बार एकत्र आएं और अपना भोजन एवं भजन, अपनी भाषा और अपनी परंपरा के अनुसार करें।

Topics: 100 वर्ष की संघ यात्रा श्रृंखलाराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघमोहनराव भागवतसंघ शताब्दी वर्षसंघ समाज
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