नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है। गुरुवार सुबह 8 बजे तक कई स्थानों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के ऊपर दर्ज किया गया, जो कि ‘गंभीर श्रेणी (Severe Category)’ में आता है। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP)-III लागू होने के बावजूद दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
बवाना में सबसे अधिक प्रदूषण, द्वारका में सबसे कम
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, बवाना में सबसे ज्यादा AQI 460 दर्ज किया गया जबकि NSIT द्वारका में सबसे कम 216 रहा। वहीं इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के आसपास घना धुआं और स्मॉग छाया रहा, जहां AQI 396 ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज हुआ।
दिल्ली के प्रमुख इलाकों में AQI की स्थिति
चांदनी चौक 455, वज़ीरपुर 452, रोहिणी 447, जहांगीरपुरी 447, आर.के. पुरम 440, मुंडका 438, ITO 438, विवेक विहार 434, आनंद विहार 431, सोनीया विहार 425, पटपड़गंज 421, और आलिपुर 418 पर पहुंच गया। बुधवार को शाम 4 बजे दिल्ली का औसत AQI 418 रिकॉर्ड किया गया था।
CAQM ने GRAP-III लागू किया, ‘गंभीर श्रेणी’ घोषित
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में GRAP-III लागू कर दिया है। इस स्तर पर प्रदूषण को ‘गंभीर श्रेणी (Severe Category)’ माना जाता है। इसमें निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध, BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों पर रोक, और स्कूलों में ऑनलाइन क्लास की सलाह जैसे कठोर कदम शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को पराली जलाने के मुद्दे पर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने दोनों राज्यों से कहा कि वे यह रिपोर्ट दें कि पराली जलाने पर रोक के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
GRAP-IV लागू करने की मांग तेज
सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा कि वर्तमान में लागू GRAP-III की बजाय स्थिति के मद्देनज़र GRAP-IV लागू किया जाना चाहिए। GRAP-IV के तहत और भी सख्त कदम उठाए जाते हैं, जैसे कि वाहन प्रतिबंध, औद्योगिक गतिविधियों पर रोक, और आपातकालीन डीजल जेनरेटर के उपयोग पर प्रतिबंध।
दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण बन रहा है स्वास्थ्य संकट
विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार बढ़ता प्रदूषण स्तर दिल्ली-एनसीआर के नागरिकों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा बन चुका है। प्रदूषित हवा में PM 2.5 और PM 10 कणों की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। सरकार और नागरिकों दोनों को इस पर तुरंत ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

















