आज का संस्कृत श्लोक - अद्यापि भारतं श्रेष्ठं जम्बूद्वीपे महामुने।
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होम धर्म-संस्कृति

आज का संस्कृत श्लोक – अद्यापि भारतं श्रेष्ठं जम्बूद्वीपे महामुने।

सुभाषितम् में पढ़ें आज का श्लोक

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 31, 2026, 06:00 am IST
inधर्म-संस्कृति

 

यह श्लोक पौराणिक ग्रन्थों का एक अत्यंत प्रसिद्ध अंश है, जो भारत को ‘कर्मभूमि’ और अन्य देशों या लोकों को ‘भोगभूमि’ के रूप में रेखांकित करता है।

आज का श्लोक :

अद्यापि भारतं श्रेष्ठं जम्बूद्वीपे महामुने।
यतो हि कर्मभूरेषा यतोऽन्या भोग-भूमयः॥

भावार्थ : 

हे महामुने! इस जम्बूद्वीप में आज भी भारतवर्ष सर्वश्रेष्ठ है। क्योंकि यह कर्मभूमि है और उसके अतिरिक्त अन्यान्य देश भोग भूमियां हैं।

आज के लिए प्रासंगिक-
एक ‘कर्मभूमि’ के रूप में भारत का वैश्विक दायित्व हमेशा बड़ा रहा है। पर्यावरण संकट, युद्ध और सामाजिक असंतुलन के इस दौर में दुनिया को केवल उपभोग करने वाले दृष्टिकोण से हटाकर सस्टेनेबिलिटी (सतत जीवन शैली) और कर्म-आधारित संस्कृति की ओर ले जाने में यह विचार बेहद प्रासंगिक है।
भारत की संस्कृति व्यक्ति को केवल उपभोक्ता नहीं मानती, बल्कि उसे ‘कर्ता’ मानती है। यह श्लोक आज याद दिलाता है कि केवल संसाधनों का उपभोग करना (भोग) जीवन का परम लक्ष्य नहीं है; असली सार्थकता सत्कर्म, पुरुषार्थ और सेवा (कर्म) में है।

Topics: पाञ्चजन्य विशेषभारतीय जीवन दर्शनकर्मभूमिआज का श्लोकसत्कर्मपुरुषार्थजीवन शैलीवैश्विक दायित्वपर्यावरणनिष्काम कर्मप्रकृति संरक्षणआत्म-विकासवसुधैव कुटुंबकम्आज का संस्कृत श्लोक
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