सत्ता बचाने को 1975 में लगी थी इमरजेंसी, अब राष्ट्र बचाने के लिए लगनी चाहिए : अश्विनी उपाध्याय
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सत्ता बचाने को 1975 में लगी थी इमरजेंसी, अब राष्ट्र बचाने के लिए लगनी चाहिए : अश्विनी उपाध्याय

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय से छिड़ी नई बहस, कहा- भारत को बचाने के लिए लगनी चाहिए इमरजेंसी, तभी होगा आतंकवाद से जनसंख्या विस्फोट तक की समस्याओं का समाधान

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Shivam Dixit
Nov 13, 2025, 03:57 pm IST
inभारत, मत अभिमत
Ashwini Upadhyay Haldwani Violence

अश्विनी उपाध्याय

लखनऊ (हि.स.) । सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने देश की मौजूदा परिस्थितियों को आंतरिक आपातकाल जैसी स्थिति बताते हुए भारत में एक या दो साल के लिए आपातकाल (इमरजेंसी) लगाने की मांग की है। उनकी इस मांग को लेकर देशभर में एक नई बहस छिड़ गई है। क्या भारत में वास्तव में ‘आंतरिक आपातकाल जैसी स्थिति’ बन रही है या यह केवल राजनीतिक अतिशयोक्ति है? जहां समर्थक इसे ‘राष्ट्रवादी चेतावनी’ बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला मान रहे हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपने लंबे संबोधन में आतंकवाद, घुसपैठ, धर्मांतरण, जनसंख्या विस्फोट, जिहाद के कई रूप, भ्रष्टाचार, हवाला कारोबार, विदेशी फंडिंग और प्रशासनिक अक्षमता जैसे मुद्दों को गिनाते हुए कहा कि सत्ता बचाने के लिए 1975 में आपातकाल लगाया जा सकता है तो राष्ट्र बचाने के लिए क्यों नहीं?

अब आतंकवाद सिर्फ बंदूक वाला नहीं, सोच वाला भी इस वीडियो में अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि पहले अनपढ़, गंवार, मजदूर आतंकवादी बनते थे। फिर इलेक्ट्रिशन, फिटर, प्लंबर बनने लगे। अब सिपाही, हवलदार, दरोगा तक आतंकवादी बन रहे हैं और अब तो डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर भी आतंकवादी बन रहे हैं। सोचिए, अगर हवाई जहाज का पायलट जिहादी मानसिकता का हुआ तो वह पूरा जहाज गिरा देगा, अगर ट्रेन का ड्राइवर जिहादी हुआ तो पूरी ट्रेन को भिड़ा देगा। उन्होंने कहा कि भारत में आतंकवाद, अलगाववाद और आंतरिक विघटन की समस्या है, जबकि चीन में ऐसा नहीं है। भारत में आतंकवाद है, चीन में नहीं। भारत में अलगाववाद है, चीन में नहीं। भारत में घुसपैठ, धर्मांतरण, जनसंख्या जिहाद है, चीन में नहीं। इसलिए वहां शांति, समृद्धि और खुशहाली है और यहां अराजकता, असंतुलन और भय।

आर्टिकल 355 और 352 ही समाधान वीडियो में अश्विनी उपाध्याय कहते दिख रहे हैं, ‘भारत के संविधान में पहले से ही ऐसी परिस्थितियों से निपटने की व्यवस्था मौजूद है। संविधान का अनुच्छेद 355 कहता है कि बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से देश की सुरक्षा करना केंद्र सरकार का दायित्व है। अगर सरकार सामान्य परिस्थितियों में इन खतरों को नहीं रोक पा रही है तो अनुच्छेद 352 लागू किया जाना चाहिए। 352 में साफ-साफ कहा गया है कि यदि बाहरी युद्ध, आंतरिक विद्रोह या सशस्त्र संघर्ष का खतरा हो तो आपातकाल लगाया जा सकता है।’ उन्होंने कहा कि जब 1975 में प्रधानमंत्री का पद बचाने के लिए आपातकाल लगाया जा सकता है तो अब सनातन धर्म, राष्ट्र और संविधान की रक्षा के लिए क्यों नहीं।

आतंकियों का 2047 तक गजवा-ए-हिंद का टारगेट उपाध्याय ने कहा कि विदेशी शक्तियों के इशारे पर भारत के खिलाफ बड़ी साजिश चल रही है। 2047 तक ‘गजवा-ए-हिंद’ का टारगेट लिया गया है, जैसे 1947 में देश का बंटवारा हुआ था, वैसे ही अब फिर से नरसंहार की तैयारी है। जनसंख्या अनुपात बदल रहा है। 800 जिलों में से 200 जिलों की, 6000 तहसीलों में से 1500 तहसीलों की डेमोग्राफी बदल चुकी है। ये हमारे लिए बहुत बड़ा खतरा है।

जिहाद के हैं कई रूप- लैंड, लव, ड्रग, पॉपुलेशन उपाध्याय ने कहा कि आज आतंकवाद सिर्फ बंदूक वाला नहीं है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिक रूप से फैलाया जा रहा है। लव जिहाद, लैंड जिहाद, ड्रग जिहाद, पॉपुलेशन जिहाद-ये सब विदेशी शक्तियों के इशारे पर हो रहे हैं। इससे ‘इंटरनल डिस्टर्बेंस’ बढ़ रहा है। जब डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है, तब सरकार के पास आपात कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

लोकतंत्र की सीमाएं और अनुशासन की जरूरत उन्होंने लोकतंत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र के रहते सरकार कुछ भी करती है तो हंगामा होता है। सीएए लागू करती है तो आगजनी होती है, एनआरसी की कोशिश करती है तो देशभर में दंगे। जब लोकतंत्र का दुरुपयोग राष्ट्रहित के खिलाफ हो रहा है तो राष्ट्र को बचाने के लिए आपातकाल जरूरी हो जाता है।

चीन की तरह सख्ती चाहिए, तभी भारत सुधरेगा उपाध्याय ने कहा कि आपातकाल लगाकर देश को सुधार की दिशा में ले जाना होगा। एक साल के लिए इमरजेंसी लगाकर पुलिस रिफार्म, जूडिशियल रिफार्म, एजुकेशनल रिफार्म, टैक्स रिफार्म, एडमिनिस्ट्रेटिव रिफार्म किए जाएं। एक सौ रुपये से बड़े नोट बंद करिए, एक हजार रुपये से ऊपर कैश ट्रांजैक्शन बंद करिए, सारी ब्लैक मनी खत्म हो जाएगी। हवाला कारोबार खत्म हो जाएगा। बेनामी संपत्ति को आधार से लिंक करिए, जब पूरी पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा कि जैसे चीन में भ्रष्टाचारियों को फांसी की सजा दी जाती है, वैसे ही भारत में भी देना चाहिए। जब तक भ्रष्टाचार, धर्मांतरण, घुसपैठ और विदेशी फंडिंग खत्म नहीं होगी, तब तक भारत मजबूत नहीं बनेगा।

मदरसे और गुलामी की विरासत करें खत्मउन्होंने सवाल उठाया कि जब मुगल चले गए, तो मदरसे क्यों चल रहे हैं? गुलामी की शिक्षा व्यवस्था क्यों जारी है? अब समय आ गया है कि गुलामी के निशान हटाए जाएं, गुलामी की कूप्रथाएं और नागरिक व्यवस्था बदली जाए।

चीन में शांति का कारण है अनुशासनउपाध्याय ने भारत की तुलना चीन से करते हुए कहा कि चीन में शांति, समृद्धि और खुशहाली है क्योंकि वहां हर नागरिक के लिए एक समान नियम हैं। वहां रोज आतंकवादी को मारना नहीं पड़ता, क्योंकि वहां आतंकवाद की जड़ें ही नहीं हैं। भारत में आतंकवादी मारने से आतंकवाद खत्म नहीं होता। एक अफजल मरेगा तो सौ अफजल निकलेंगे। असली इलाज अनुशासन और एक समान नागरिक कानून (यूनिफार्म सिविल कोड) है।

आपातकाल लगेगा तो घुसपैठिए भाग जाएंगे उन्होंने कहा कि देश में इमरजेंसी लगते ही घुसपैठिए अपने आप भाग जाएंगे। अगर सरकार कठोर कदम उठाए। हवाला, ड्रग, धर्मांतरण और जनसंख्या जिहाद पर सख्त कानून बनाए तो भारत दुनिया का सबसे सुरक्षित देश बन सकता है। उपाध्याय का कहना है कि जब तक राष्ट्र के शत्रु सक्रिय हैं,तब तक शांति संभव नहीं। ऑपरेशन अब जरूरी है, क्योंकि वैक्सीन और दवा से इलाज नहीं हो रहा।

किसान की तरह देश को भी करनी होगी तैयारी

अश्विनी उपाध्यय का मानना है कि भारत को अब सुधारों की दिशा में ठोस और चरणबद्ध रणनीति अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि किसान बुआई से पहले जुताई, गुड़ाई, निराई करता है, फिर बीज डालता है। देश को भी वैसा ही करना होगा। पहले सफाई, फिर सुधार। यह केवल प्रतीकात्मक तुलना थी, लेकिन इसका संदेश गहरा है कि सुधार किसी रातोंरात होने वाली प्रक्रिया नहीं, बल्कि निरंतर तैयारी और अनुशासन से उपजने वाला परिणाम है।

Topics: इमरजेंसी भारतअनुच्छेद 352अनुच्छेद 355जनसंख्या जिहादचीन तुलनासुप्रीम कोर्टआतंकवादअश्विनी उपाध्यायआपातकालराष्ट्रवादभारतीय राजनीति
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