Uttarakhand Demography change: देवभूमि उत्तराखंड के यूपी से लगते मैदानी जिलों में बिना प्रशासन की अनुमति के कृषि भूमि पर अवैध कालोनियां काटी जा रही है,खास बात ये कि ज्यादातर ये कालोनियां मुस्लिम भू माफियाओं द्वारा काटी गई है और वे जमीनों को सौ रु की स्टाम्प पेपर पर बेच कर उत्तराखंड सरकार को हर साल करोड़ों रु के राजस्व का चूना लगा रहे है। इन जिलों में विकास प्राधिकरण बेबस इस लिए है कि उनकी सीमाओं के दायरे से बाहर ये कालोनियां काटी जा रही है।
यूपी से लगे उधम सिंह नगर जिले में खेती की जमीनों को यूपी बिहार से आए मुस्लिम भू माफिया खरीद रहे और फिर 100 रु के स्टांप पेपर पर पांच सौ से हजार वर्गफुट के प्लॉट काटकर बेच कर मुस्लिम बस्तियां बसा रहे है। जिसकी वजह से देवभूमि में डेमोग्राफी चेंज की समस्या गहरा रही है। जिस तेजी से जमीनों की खरीद फरोख्त हो रही है उससे प्रशासनिक तंत्र भी हैरान है। उधम सिंह नगर जिला प्रशासन ने ऐसी सूचनाएं में आने पर ऐसी खरीद बिक्री पर रोक लगादी है और शासन को अवगत करा दिया है।
अवैध कालोनियों की बसावट
जानकारी के मुताबिक प्राधिकरण से बाहर के क्षेत्रों में इस तरह की भूमि की बिक्री और अवैध कालोनियों की बसावट पर शासन स्तर से चिंता प्रकट की गई है। जिसके बाद यूएसनगर जिला प्रशासन ने ऐसी कालोनियों का सर्वे कर रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
जानकारी के अनुसार किच्छा, जसपुर,काशीपुर, बाजपुर ,रुद्रपुर,गदरपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की अवैध कॉलोनियों के बनाए जाने की सूचनाएं है। जानकारी के मुताबिक उक्त कालोनियों में बन रहे कच्चे पक्के मकानों का कोई नक्शा पास नहीं है, कच्ची सड़के है और बोरिंग के पानी के कनेक्शन है।
ये कॉलोनियों को काटने वाले भू माफिया को बीजेपी कांग्रेस दलों के नेताओं का राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। जब इस बारे में एडीएम पंकज उपाध्याय से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ऐसी अवैध कॉलोनियों को चिन्हित कराया जा रहा है, बिना अनुमति कोई भवन बनाए जाने का प्रावधान नहीं है। ऐसे प्लॉट खरीद कर बिना नक्शे भवन बनाने वाले लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे है।उन्होंने कहा कि सरकारी राजस्व के नुकसान को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने ऐसे प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भी चेताया कि बाद में वे उक्त भूमि के मालिक नहीं रहेंगे क्योंकि भू माफिया इस पर पुनः अपना हक जमाएगा।
नैनीताल जिले में भी अवैध कॉलोनियों पर नजर
नैनीताल जिले में चौंसला बसानी क्षेत्र में एकाएक मुस्लिम कॉलोनी अवैध रूप से बसने की खबर पिछले कई माहों से चर्चा में है जिसके खिलाफ जिला प्रशासन ने रेरा एक्ट में कार्रवाई शुरू की है। इस कॉलोनी की बसावट का मुद्दा हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के साथ साथ बीजेपी के नेताओं ने भी उठाया है। इससे पहले भी गौलापार क्षेत्र में ऐसी ही एक अवैध कॉलोनी के निर्माण शुरू होने की खबरों की जांच के बाद उस पर रोक लगाई गई थी।
देहरादून में भी शिकायतें
राजधानी देहरादून के पछुवा क्षेत्र प्रेम नगर,शिमला बाई पास,विकास नगर ,हरबर्ट पुर , सेलाकुई, सहसपुर आदि क्षेत्रों भी अवैध कॉलोनियों की बसावट और उनमें बाहरी राज्यों के मुस्लिमों की बसावट की सूचनाएं है यहां भी खेती की जमीन सौ सौ रु के स्टांप पेपर पर बेचकर सरकार को राजस्व की हानि पहुंचाई जा रही है।हरबर्टपुर, विकासनगर,सेलाकुई, सहसपुर में इस तरह की बस्तियों के खिलाफ एमडीडीए ने कार्रवाई तो की है किंतु वो नाकाफी है।
हरिद्वार जिले में भी शिकायतें
यूपी से लगे हरिद्वार जिले में डेमोग्राफी चेंज से जुड़ी कई शिकायतें सामने आई है, बिना रजिस्ट्री और 50/100 रु के स्टांप पर जमीनों की बिक्री कर अवैध बस्तियां बसाए जाने की खबरें सामने आ रही है, बहादराबाद,मंगलौर, रुड़की, ज्वालापुर,श्याम पुर क्षेत्रों में सरकारी भूमि कब्जाने के भी आरोप सामने आए है। ऐसा बताया गया है कि हरिद्वार यूपी बॉर्डर पर एक हजार से अधिक अवैध कालोनियां सर्वे में सामने आई है।
डेमोग्राफी चेंज की बड़ी वजह
यूपी बिहार के मुस्लिम बड़ी संख्या में उत्तराखंड में आकर या तो अवैध रूप से बस रहे है या फिर इन अवैध कालोनियों में स्टांप पेपर पर खरीदी भूमि पर अपना मकान बना ले रहे है। बिना नक्शा बिना किसी नॉर्म्स के बने उनके मकान कम लागत में खड़े हो जाते है। यूपी की अपेक्षा उत्तराखंड में बढ़ी हुई मजदूरी दर और सरकारी सुविधाओं के लाभ के लालच में ये लोग यहां अवैध रूप से बस रहे है जिसकी वजह से डेमोग्राफी चेंज हो रही है और बीजेपी सरकार के लिए चुनौती बनती जा रही है। इन अवैध कालोनियों में मस्जिद मदरसे भी खुलने लगे है जोकि बिना प्रशासनिक अनुमति के स्थापित हो रहे है।

















