संघ का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं है? क्या यह संयोग से है, चयन से है या कानूनी उलझनों से बचने के लिए? भागवत जी ने दिया जवाब
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संघ का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं है? क्या यह संयोग से है, चयन से है या कानूनी उलझनों से बचने के लिए? भागवत जी ने दिया जवाब

कांग्रेस और वामपंथी संगठन आए दिन संघ पर कोई न कोई झूठा आरोप लगाते हैं। राष्ट्र के लिए काम करने वाले आरएसएस को राजनीतिक हमले करते हैं।

Written byMahak SinghMahak Singh
Nov 9, 2025, 03:08 pm IST
in भारत
श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक

कांग्रेस और वामपंथी संगठन आए दिन संघ पर कोई न कोई झूठा आरोप लगाते हैं। राष्ट्र के लिए काम करने वाले आरएसएस को राजनीतिक हमले करते हैं। हाल ही में उन्होंने संघ के रजिस्ट्रेशन को लेकर जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश की। कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित दो दिवसीय व्याख्यानमाला के अंतर्गत रविवार को सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने ऐसे ही प्रश्नों पर बात की।

मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ एक वैध और संवैधानिक संगठन है, भले ही यह पंजीकृत न हो। आरएसएस की स्थापना वर्ष 1925 में हुई थी, जब भारत पर ब्रिटिश शासन था। उस समय देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। “जब हम अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे, तो उनकी सरकार में जाकर पंजीकरण कराना कैसे संभव होता?” उन्होंने यह सवाल उठाया।

भागवत जी ने बताया कि आजादी के बाद भी भारत के कानून में किसी संगठन का पंजीकरण कराना अनिवार्य नहीं है। कानून के अनुसार, ऐसा संगठन जो बिना पंजीकरण के कार्य करता है, उसे “व्यक्तियों का समूह” (Body of Individuals) कहा जाता है, और उसे भी कानूनी मान्यता प्राप्त होती है। इसी श्रेणी में आरएसएस भी आता है। इसलिए, बिना पंजीकरण के भी यह एक वैध और मान्यता प्राप्त संस्था है।

उन्होंने कहा कि एक समय आयकर विभाग ने संघ पर कर लगाने की कोशिश की थी। मामला अदालत में गया, जहाँ अदालत ने यह निर्णय दिया कि आरएसएस “व्यक्तियों का समूह” है, और संघ को मिलने वाली “गुरु दक्षिणा” कर-मुक्त है, क्योंकि यह दान और सामाजिक सेवा से जुड़ी आय है। भागवत जी ने यह भी बताया कि आज़ादी के बाद संघ पर तीन बार प्रतिबंध लगाया गया। लेकिन हर बार अदालत ने सरकार के इस कदम को गलत ठहराते हुए प्रतिबंध हटा दिया। अदालतों ने माना कि आरएसएस किसी भी प्रकार की असंवैधानिक गतिविधि में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर संघ का अस्तित्व ही नहीं होता, तो सरकार किस पर प्रतिबंध लगाती? इससे साफ है कि संघ को सरकार और अदालत दोनों ने मान्यता दी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि संघ से जुड़े मुद्दों पर संसद और विधानसभाओं में चर्चा होती रहती है- कभी समर्थन में तो कभी विरोध में। यह बात खुद इस बात का प्रमाण है कि संघ एक मान्यता प्राप्त और कानूनी रूप से अस्तित्व में रहने वाला संगठन है। भागवत जी ने स्पष्ट कहा, “हम असंवैधानिक नहीं हैं। हम पूरी तरह संविधान के दायरे में काम करते हैं। हमारी कानूनी स्थिति संविधान के अंतर्गत है, इसलिए हमें किसी प्रकार के पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “कई चीजें हैं जो पंजीकृत नहीं हैं, जैसे हिंदू धर्म। लेकिन क्या वह अस्तित्व में नहीं है? उसी तरह संघ भी अपने कार्यों और सिद्धांतों के आधार पर मान्यता प्राप्त संस्था है।” अंत में भागवत जी ने कहा कि संघ की पहचान किसी कागज़ या प्रमाणपत्र से नहीं, बल्कि उसके समाज और राष्ट्र के लिए किए गए कार्यों से होती है। संघ का उद्देश्य समाज में एकता, सेवा और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा, “हमारा अस्तित्व हमारे कार्यों में है, और हमारा कानून वही है जो इस देश का संविधान है।”

Topics: सरसंघचालक मोहन भागवतआरएसएस की स्थापनाMohan Bhagwat speechRSS registration controversylegitimacy of the Sanghallegations against RSSसंघ का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं हैRSSआरएसएस
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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