जैसी आशंका थी, मजहबी जोहरान ममदानी के न्यूयार्क का मेयर बनने के बाद उन्मादी ‘शरणार्थी’ और लिबरल तत्व जोश में हैं। टाइम्स स्क्वायर पर ऐसे लोगों ने बड़ी तादाद में इकट्ठे होकर नमाज पढ़ी, लिबरल्स ‘ये शरिया की शुरुआत है’ जैसे नारे लगा रहे हैं। शहर के अनेक स्थानों पर मजहबी उन्मादी तत्वों द्वारा आगजनी करने और कानून के मूक दर्शक बने रहने की घटनाएं देखने में आ रही हैं। जोहरान ममदानी ने मेयर चुने जाने के बाद अपने पहले भाषण में लगभग चीखते हुए खुद को सोशलिस्ट मुस्लिम बताया, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें कम्युनिस्ट बताकर न्यूयार्क के भविष्य को लेकर चिंता जताई है। सोशल मीडिया पर लोग 9—11 हमले की धरती न्यूयार्क के लोगों के निर्णय पर हैरान हैं।
जोहरान ममदानी के न्यूयार्क का मेयर बनने के बाद शहर की राजनीति में बड़ा बदलाव दिख रहा है। ट्रंप ने इसे वहां कम्युनिस्ट शासन की शुरुआत करार दिया है। ममदानी न्यूयार्क के पहले मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मेयर बने हैं। उनका जन्म युगांडा में हुआ, पिता अफ्रीकी मुस्लिम (महमूद ममदानी) और मां भारतीय हिंदू (मीरा ‘नैयर’ अब नायर) हैं। ममदानी शिया मुस्लिम हैं, लेकिन मस्जिदों में खूब जाते हैं और दागी इमामों के साथ फोटो खिंचवाते हैं।
अपने चुनाव प्रचार में उन्होंने सामाजिक सेवाओं का विस्तार, टैक्सी ड्राइवरों के लिए कम ब्याज पर लोन, किराया नियंत्रण, किफायती किराना स्टोर और मुफ्त बस-यात्रा जैसी वामपंथी नीतियों को केंद्र में रखा था। ममदानी ने अपनी जीत के बाद कहा–”मैं मुसलमान हूं, लेकिन जनता के लिए मेयर हूं” और “न्यूयॉर्क शुरू से ही प्रवासियों का शहर रहा है”।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ममदानी को ‘डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट’ और ‘कम्युनिस्ट’ करार दिया। मियामी के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा, “न्यूयॉर्क के लोग कम्युनिज्म से बचकर फ्लोरिडा जाएंगे। कम्युनिस्ट शासन में आखिर कौन रहना चाहेगा?” ट्रंप ने दावा किया डेमोक्रेट अमेरिका को क्यूबा और वेनेजुएला बना देना चाहते हैं। साथ ही, उन्होंने न्यूयार्क को वाशिंगटन से जाने वाले अनुदान में कटौती की धमकी भी दोहराई। ट्रंप ने अपने भाषण में कहा, “जब मैं न्यूयॉर्क छोड़कर व्हाइट हाउस गया, तब से ही न्यूयॉर्क में मेरे लिए दिक्कते पैदा होनी शुरू हो गई थीं”।
ममदानी के मेयर बनने के बाद टाइम्स स्क्वायर पर सैकड़ों मुसलमानों ने खुलेआम नमाज अदा की, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। कुछ लिबरल्स ने ‘शरिया की शुरुआत’ के नारे लगाए और इसे ‘बहुसांस्कृतिक न्यूयॉर्क का नया चेहरा’ बताया।
एक्स पर कई यूजर्स ने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की बुर्का पहने तस्वीरें शेयर कीं और लिखा, “क्या यही 9—11 के बाद का न्यूयॉर्क है?” या “शहर की असली पहचान खत्म हो रही है।” एक यूजर ने लिखा, “ये जीत लोकतंत्र की नहीं, पहचान की राजनीति का परिणाम है।” बेशक, इस बात पर बहुत से लोग हैरान हैं कि 9—11 के बाद के शहर ने विश्व का पहला दक्षिण एशियाई मुस्लिम मेयर चुना है।

इसी प्रकार सोशल मीडिया पर कुछ ने व्यंग्य में लिखा, “अब न्यूयॉर्क में अमेरिकी शरिया कानून लागू होगा?” और “लिबरल्स ने इस्लामीकरण शुरू कर दिया।”
जहां सोशल मीडिया पर एक बड़ा वर्ग ममदानी की जीत को बहस का मुद्दा बना रहा है, तो वहीं उनके समर्थक इसे ‘प्रगतिशील’ और ‘समावेशी’ बताना नहीं भूल रहे हैं। कम्युनिस्टों वाले उनके मुफ्त में चीजें उपलब्ध कराने के दावे संभवत: उन्हें जीत दिला गए। अरब देशों ने उनकी जीत को ‘ऐतिहासिक’ बताया, वहीं इस्राएली मीडिया और विश्लेषकों ने अमेरिका में इस घटना के होने पर चिंता जाहिर की है।
सवाल है कि क्या ममदानी की जीत न्यूयार्क की बदलती सामाजिक और राजनीतिक धाराओं का संकेत है? ‘प्रगतिशील’ एजेंडा और ‘पांथिक विविधता’ का लोकतांत्रिक स्वीकार है? ट्रंप की चेतावनी व सोशल मीडिया की चिंता इसे गंभीर संकेत बता रही है, लेकिन लगता है, शहर के नागरिकों ने मुफ्त के वादों को प्राथमिकता दी है। अब ट्रंप-ममदानी राजनीतिक टकराव न्यूयार्क को किस ओर ले जाएगा, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल जैसे दृश्य वहां से उभर रहे हैं, वे वहां मजहबी कट्टरता और उन्माद के बढ़ने का खाका खींचते दिख रहे हैं।
अनेक टिप्पणीकार अब न्यूयार्क की तुलना उस बदहाल लंदन से कर रहे हैं जहां मुस्लिम मेयर सादिक खान मजहबी कट्टरता को उभरने में मददगार होने के आरोपों से घिरे हैं, ब्रिटिश बच्चियों के बलात्कारियों का बचाव करने के दोषी ठहराए जा रहे हैं और लंदन को लघु फिलिस्तीन बनते जाने को आंख मूंदे देख रहे हैं। क्या अब यही सब न्यूयार्क में दोहराया जाएगा!

















