Trump के दौरे से पहले, Hormuz के बहाने Iran पर दबदबा बनाने में जुटा China, बीजिंग में अराघची-वांग वार्ता के मायने क्या!
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Trump के दौरे से पहले, Hormuz के बहाने Iran पर दबदबा बनाने में जुटा China, बीजिंग में अराघची-वांग वार्ता के मायने क्या!

खाड़ी से पूर्वी एशिया के लिए ईंधन की आपूर्ति बाधित होने से बेशक, चीन विशेष रूप से प्रभावित हुआ है। लेकिन अमेरिका में भी आर्थिक मंदी, मध्यावधि चुनावों से पहले घरेलू ईंधन कीमतों में वृद्धि हो रही है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
May 7, 2026, 02:32 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
बीजिंग में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी

बीजिंग में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी

‘युद्ध किसी भी समय खत्म हो सकता है’ जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और ‘ईरान—अमेरिका युद्धबंदी वार्ता के लगभग सफल होने’ के कयासों वाले समाचारों के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची अचानक बीजिंग जा पहुंचे। कल यानी 6 मई को उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बात की। जाहिर है अराघची की यह यात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य को जबरन खोलने की अमेरिकी धमकियों, संघर्षविराम और तेहरान—वाशिंगटन के बीच शांति समझौते की कोशिशें तेज होने के संदर्भ में देखी जा रही है। जानकारों का कहना है कि चीन का अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर महत्वपूर्ण हित शामिल है, और बीजिंग इस युद्ध की दिशा को प्रभावित करने के मौके देख रहा है।

पता चला है कि इस भेंटवार्ता में वांग यी ने अराघची से कहा कि चीन नहीं चाहता कि युद्धविराम में कोई देरी हो। वांग का यह बयान हांगकांग स्थित फीनिक्स टीवी ने जारी किया है। खास बात यह है कि अराघची की यह यात्रा ट्रंप की 14-15 मई को प्रस्तावित चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात से ठीक एक सप्ताह पहले हुई है। इससे पहले, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चीन से ईरान पर उस होर्मुज जलडमरूमध्य की पाबंदी दूर कराने का दबाव बनाने को कहा था, जहां से दुनिया के तेल और गैस के पांचवें हिस्से की आवाजाही होती है।

बीजिंग में अब्बास अराघची और वांग यी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता

होर्मुज पर तनाव
ईरान—अमेरिका युद्ध की शुरुआत के बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का गुजरना प्रतिबंधित कर दिया था, उधर गत अप्रैल में युद्धविराम के बाद अमेरिका ने तेहरान के बंदरगाहों पर अपना अवरोध लगा दिया था ताकि ईरान कैसे भी वाशिंगटन की शर्तों को स्वीकार करे। इस जलडमरूमध्य से शिपिंग में अड़चन आने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगना ही था। इसने वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव को और भी बढ़ा दिया।

ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात प्रस्तावित है (File Photo)

खाड़ी से पूर्वी एशिया के लिए ईंधन की आपूर्ति बाधित होने से बेशक, चीन विशेष रूप से प्रभावित हुआ है। लेकिन अमेरिका में भी आर्थिक मंदी, मध्यावधि चुनावों से पहले घरेलू ईंधन कीमतों में वृद्धि हो रही है। विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज को फिर से खोलने और युद्धविराम को सुनिश्चित करने में अमेरिका-चीन के साझा हित बीजिंग को ईरान के साथ शांति सौदे में महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभाने का मौका दे रहे हैं।

संतुलन बनाने की कवायद
पूरे तनाव के बीच चीन ने बड़ी संतुलित कूटनीति पर चलते हुए एक तरफ अमेरिका की आलोचना की तो, दूसरी तरफ क्षेत्रीय स्थिरता की अपील भी ​करता रहा है। कल की बैठक में वांग ने अमेरिका और इस्राएल की ईरान विरोधी सैन्य कार्रवाइयों को ‘गैरकानूनी’ कहकर उनकी निंदा की।

बीजिंग ने संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय कानून का ‘उल्लंघन’ बताया है, लेकिन ईरान के हर कदम का पूर्ण समर्थन भी नहीं किया है। चीन ने ईरान के सर्वोच्च मजहबी नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को ‘जंगल का कानून’ लौटाने वाली खतरनाक वृत्ति कहा था। यही चीन है जिसने रूस के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के होर्मुज कार्रवाइयों की निंदा के प्रस्तावों को वीटो किया था।

तकीरबन उसी समय, चीन ने तेहरान के साथ आर्थिक संबंधों पर बढ़ते अमेरिकी दबाव का विरोध किया था। इसके बाद, वाशिंगटन ने ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए, जिस पर बीजिंग ने चीनी कंपनियों के पाले में खड़े होकर यह कहकर प्रतिक्रिया दी थी कि ‘अमेरिकी घुड़कियों को नजरअंदाज कर दो’। इसके बावजूद, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चीन से यह कहा था कि तेहरान पर प्रभाव डालकर मौजूदा संकट कम करने का प्रयास करें।

शिंहुआ विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर इंटरनेशनल सिक्योरिटी एंड स्ट्रैटेजी की शोधकर्ता जोडी वेन का कहना है कि चीन का संदेश मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अस्थिरता रोकने पर केंद्रित है, जो चीनी ऊर्जा आयात और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। चीन ईरान को वार्ता की मेज पर लाने की पूरी कोशिश करेगा और जलडमरूमध्य को पहले जैसे खोलने की बात करेगा।”

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चीन से ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य की पाबंदी दूर कराने का दबाव बनाने को कहा था (File Photo)

चीन से क्या चाहता ईरान?
अमेरिकी प्रतिबंधों के वर्षों बाद चीन तेहरान की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक जीवनरेखा बना हुआ है। चीन ईरान के अधिकांश तेल निर्यात अक्सर कम कीमत पर खरीदता है, और ईरानी राजस्व मुख्य रूप से चीनी वस्तुओं व सेवाओं की खरीद में लगता है। 2021 में हुए 25 वर्षीय रणनीतिक साझेदारी के समझौते ने दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचा, व्यापार और सुरक्षा सहयोग को गहरा किया है। विश्लेषकों का कहना है कि अराघची की यह यात्रा संघर्ष के निर्णायक क्षण में बीजिंग से कूटनीतिक समर्थन हासिल करने का प्रयास ही रही है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि तेहरान को संयुक्त राष्ट्र में होर्मुज से जुड़े अतिरिक्त प्रतिबंध रोकने के लिए चीनी समर्थन चाहिए। ईरानी अधिकारी शी-ट्रंप वार्ता में बीजिंग के रुख पर भी आश्वासन चाहते हैं, कि चीन वाशिंगटन को ऐसी रियायत तो नहीं देगा जो तेहरान को परेशान करेगी। उधर वाशिंगटन भी बीजिंग पर ईरान पर दबाव बनाने पर जोर डाल रहा है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ईरान को उन्नत रडार और वायु रक्षा प्रणालियां देने पर विचार कर रहा है। ईरान की प्राथमिकता होर्मुज में सैन्य कार्रवाइयां कम करने पर चीन का कूटनीतिक समर्थन सुनिश्चित करना है।

ईरान से क्या चाहता चीन?
चीन का मुख्य हित क्षेत्रीय स्थिरता और अपनी अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल स्थिति पैदा करना है। बेशक, होर्मुज से माल का स्वतंत्र आवागमन ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है। विशेषज्ञ कहते हैं कि बीजिंग तेहरान पर शिपिंग मार्ग खुला रखने और वार्ता के मेज पर लौटने का दबाव बनाए रखना जारी रखेगा।

ईरान उसे ऊर्जा से और बढ़कर लाभ देता है, तेहरान चीनी युआन में तेल के लेन—देन को बढ़ावा दे रहा है, जो डॉलर के वर्चस्व के खिलाफ बीजिंग की मुहिम को मजबूत करता है। यह सैन्य तनाव चीन को पूर्वी एशिया से परे वैश्विक कूटनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने का अवसर दे सकता है। पाकिस्तान तो पहले ही फरमाबरदार की तरह बीजिंग से मध्यस्थता की अपील कर चुका है।

आगे बीजिंग क्या करेगा
आने वाले कुछ दिन महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अमेरिका और उसके खाड़ी के सहयोगियों ने संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है जो होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही की गारंटी देता है। यह ईरान से शिपिंग पर हमले रोकने, समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने और आवागमन टैक्स समाप्त करने की मांग करता है। बताते हैं कि इस मसौदे में हाल ही में रूस-चीन समर्थन के लिए संशोधन किया गया है।

Topics: trumpunscXi JinpingChinaamerica iran warHormuzहोर्मुजचीनईरानअमेरिका
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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