गत 30 अक्तूबर से 1 नवंबर तक जबलपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक आयोजित हुई। 1 नवंबर को पत्रकार वार्ता में सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने कार्यकारी मंडल बैठक तथा संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त श्री विजयादशमी के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि विजयादशमी के मंगल अवसर पर नागपुर सहित देशभर में कार्यक्रम संपन्न हुए। शताब्दी वर्ष के निमित्त धर्म अध्यात्म, साहित्य, कला, उद्योग, व अन्य क्षेत्रों के गणमान्य लोगों ने अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। संघ के 100 वर्ष की यात्रा में लाखों स्वयंसेवकों के साथ ही समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने सहयोग दिया, उन सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
उन्होंने बताया कि विजयादशमी के अवसर पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के आंकड़े संघ कार्य के विस्तार को दर्शाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 59,343 मंडलों में से 37,250 मंडलों में कार्यक्रम हुए, जिसमें आस-पास के मंडलों के स्वयंसेवक भी शामिल हुए। इस प्रकार 50,096 मंडलों का प्रतिनिधित्व रहा। नगरीय क्षेत्रों में 44,686 बस्तियों में से 40,220 बस्तियों का प्रतिनिधित्व कार्यक्रमों में रहा। इसके अतिरिक्त 6,700 विजयादशमी कार्यक्रम हुए। इस प्रकार कुल मिलाकर 62,555 विजयादशमी उत्सव हुए। विशेष यह कि 80 प्रतिशत कार्यक्रम विजयादशमी के दिन ही हुए, कुछ स्थानों पर स्थानीय कारणों के चलते बाद में या पहले कार्यक्रम हुए।
देशभर में आयोजित इन कार्यक्रमों में 32,45,141 स्वयंसेवक गणवेश में उपस्थित रहे। पथ संचलन के कार्यक्रम सभी जगह नहीं हुए, कुछ स्थानों पर हुए। देश में 25,000 स्थानों पर पथ संचलन हुए, इनमें 25,45,800 स्वयंसेवक गणवेश में सहभागी हुए। देश का कोई भी भौगोलिक क्षेत्र अछूता नहीं रहा, इन कार्यक्रमों से यह फैलाव दिखता है। अंदमान में भी कार्यक्रम हुआ, लद्दाख, अरुणाचल, मेघालय व नागालैंड में भी हुआ।
उन्होंने बताया कि विजयादशमी के कार्यक्रमों में समाज के विभिन्न समुदायों, समूहों की सहभागिता रही। नागपुर के कार्यक्रम में विदेश से भी अतिथियों की उपस्थिति रही। उन्होंने सरसंघचालक जी व अन्य अधिकारियों से नागपुर और दिल्ली में भेंट की। उन्होंने संघ को समझा भी और शुभकामनाएं दीं। पिछले वर्ष अक्तूबर में हुई बैठक के बाद से संघ कार्य की दृष्टि से एक साल में 10 हजार नए स्थानों पर संघ कार्य प्रारंभ हुआ है। वर्तमान में 55052 स्थानों पर 87398 शाखाएं लग रही हैं जो पिछले वर्ष से 15,000 अधिक हैं। इसके अतिरिक्त साप्ताहिक मिलन 32,362 हैं। इन दोनों को मिलाकर कुल स्थान 87,414 होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में विशेष प्रयासों के कारण जनजाति क्षेत्र के साथ-साथ श्रमजीवी, कृषक, विद्यार्थी, व्यवसायी, अन्य क्षेत्रों में भी कार्य का विस्तार हुआ है।

शताब्दी वर्ष के आगामी कार्यक्रम
बैठक में शताब्दी वर्ष के आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा हुई। अभी तक समाज का अच्छा प्रतिसाद मिला है। संघ का कार्य समाज, राष्ट्र का कार्य है। आगे बस्ती/मंडल स्तर पर हिंदू सम्मेलन करने वाले हैं। हिंदू सम्मेलनों के माध्यम से मंडल, बस्ती स्तर तक पंच परिवर्तन से विषयों को लेकर पहुंचेंगे, प्रयास रहेगा कि समाज के आचरण का विषय बने। इनमें साधु—संत, सज्जन शक्ति, मातृ शक्ति, प्रमुख लोग विचार रखेंगे। अनुमान है कि 45,000 ग्रामीण और 35,000 नगरीय स्थानों पर सम्मेलन आयोजित होंगे। खंड, नगर स्तर पर सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन होगा, जिला स्तर पर प्रमुख जन नागरिक गोष्ठियों का आयोजन होगा।
अधिकाधिक लोगों को राष्ट्र कार्य से जोड़ना है। सभी लोग शाखा में आ जाएं, ऐसी अपेक्षा नहीं है। पर, अपने-अपने क्षेत्र में समाज की एकता, समाज की समरसता, राष्ट्र की उन्नति के भाव से कार्य करें। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन की नहीं, समाज की आत्मशक्ति को बढ़ाना है।
सरकार्यवाह जी ने बताया कि कार्यकारी मंडल में तीन वक्तव्य जारी किए गए हैं। 24 नवंबर को सिख पंथ के नवम् गुरु श्री गुरुतेग बहादुर जी की शहादत को 350 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। यहां बैठक में गौरव समर्पण किया है। आगामी समय में देशभर में होने वाले कार्यक्रमों में कार्यकर्ता भाग भी लेंगे, और कई जगह आयोजन में भी सहभागी होंगे। गुरु तेगबहादुर जी ने धर्म, संस्कृति और समाज की एकता की रक्षा के लिए प्राण अर्पण किया। वह अपने समाज, धर्म, संस्कृति के रक्षा के लिए कटिबद्ध रहे, यह आज पीढ़ी को बताना है।
भगवान बिरसा मुंडा जनजाति क्षेत्र के जननायक हैं, जिन्होंने भारत भूमि के लिए कार्य किया। वे सभी के लिए आदर योग्य हैं। बिरसा मुंडा केवल अंग्रेजों के खिलाफ लड़े, ऐसा नहीं है। उन्होंने कन्वर्जन के खिलाफ, जनजातीय क्षेत्र के विकास के लिए भी विचार रखा। उनके प्रति हम श्रद्धा अर्पित करते हैं। उनकी 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सारे समाज को सहभागी होना चाहिए। संघ ने बिरसा मुंडा को प्रातः स्मरणीय माना है।
उन्होंने कहा कि वंदेमातरम राष्ट्रगीत के 150 वर्ष हो रहे हैं। 1975 में राष्ट्रगीत के 100 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में समितियां बनाई थीं। लेकिन दुर्भाग्य से आपातकाल लगने के कारण इस कार्य को स्थगित करना पड़ा। स्वतंत्रता संग्राम में जिसे गीत के रूप में गाया था, 1975 में फिर से स्वतंत्रता संग्राम करने के दिए आ गए थे। वर्तमान पीढ़ी को इसकी रोचक कहानी बतानी चाहिए, वंदेमातरम केवल गीत नहीं है, भारत की आत्मा का मंत्र है। भारत की पहचान व संस्कृति को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि झारखंड और छत्तीसगढ़ में नक्सली गतिविधियों में परिवर्तन दिख रहा है।
संवाददाता सम्मेलन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में श्री दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि किसी के चाहने भर से संघ पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है, क्योंकि यह समाज द्वारा स्वीकार किया गया है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की संघ पर प्रतिबंध लगाने की मांग के संदर्भ में कहा कि प्रतिबंध लगाने की बात करने वाले पिछली गलतियों से सीखें। उन्होंने यह भी कहा कि संघ भारत की एकता, सुरक्षा, संस्कृति और विकास के लिए काम करता है। अतीत में भी तीन बार इसे प्रतिबंधित करने के प्रयास हुए थे, लेकिन समाज ने इसे अस्वीकार किया है। न्यायालय ने भी प्रतिबंध को अस्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि केवल कुछ लोगों की इच्छा से संघ पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है। सरकार्यवाह ने कहा कि संघ पर प्रतिबंध लगाने की बात करने वाले इसका कारण बताएं, फिर प्रयत्न
करके देखें।


















