यह समागम जनजातियों के महाकुंभ और उनके अस्तित्व, अस्मिता और संस्कृति के आंदोलन को नई पहचान देने के रूप में जाना जाएगा। मैंने भगवान बिरसा मुंडा को नहीं देखा, लेकिन आज यहां उपस्थित जनजातियों में उनकी छवि दिख रही है, मैं उनको नमन करता हूं। भगवान बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन को संरक्षित करने का सार्वभौमिक कार्य किया।
प्रकृति पूजा ही सनातन संस्कृति का मूल आधार है। मोदी सरकार के गृह मंत्री के नाते मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूसीसी की कोई पाबंदी वनवासी समाज पर नहीं लगेगी और इससे वनवासी के किसी भी अधिकार का अतिक्रमण नहीं होगा। हमने गुजरात और उत्तराखंड में यूसीसी लागू किया है और विशेष प्रावधान कर यूसीसी से सारी जनजातियों को बाहर रखने का काम नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है।


हमारे संविधान निर्माताओं ने हर व्यक्ति को अपने मूल धर्म में सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है। कोई किसी का धर्म-परिवर्तन नहीं करा सकता। भारत सरकार बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्या भील, सिद्धू-कान्हू, अल्लूरी सीताराम राजू और अनेक जनजातीय वीरों के सम्मान में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। जनजातीय समाज को उसकी जड़ों से काटने वाली शक्तियों के विरुद्ध सांस्कृतिक जागरूकता और संगठन आवश्यक है।
वनवासी अगर ठान लें कि धर्म की रक्षा करने का संकल्प आज यहां लेना है तो यही संकल्प हमें हमारी संस्कृति और देश से जोड़कर रखेगा। ‘तू और मैं एक रक्त’-इसी मंत्र के साथ वनवासी कल्याण आश्रम ने मूक-सेवक बनकर जनजातीय सेवा का अखंड यज्ञ चलाया है। हमारी संस्कृति, हमारी भूमि, हमारे धर्म को सुरक्षित करने के लिए यह महाकुंभ बहुत बड़ा काम करेगा। हम भ्रांतियों से बचें, भेदभाव करने वालों को पहचानें और एकजुट होकर 2047 में विकसित और समृद्ध भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।

















