नई दिल्ली/जबलपुर: राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने वंदे मातरम् को लेकर बड़ा बयान दिया है। राष्ट्रीय मुस्लिम मंच का कहना है कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् इस्लाम के खिलाफ नहीं है। राष्ट्रीय गीत का विरोध करने वाले मुस्लिम समुदाय को गुमराह कर रहे हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक एसके मुद्दीन का कहान है कि ‘वंदे मातरम्’ का अर्थ है- ‘हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूं।’
राष्ट्रीय गीत को लेकर मुस्लिमों को गुमराह करते हैं कट्टरपंथी
उन्होंने कहा कि यह इस्लाम-विरोधी या शरीयत के खिलाफ कैसे हो सकता है? एसके मुद्दीन ने कहा कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् देश की उपजाऊ भूमि, पेड़ों, फूलों, पानी, पहाड़ों और सुंदर सुबह-शाम की प्रशंसा करता है। मुद्दीन पूर्व सांसद ओबीसी और अल्पसंख्यक वित्त निगम के उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् राष्ट्र के प्रति प्रेम व्यक्त करता है। इसे इस्लाम में ‘हुब्ब-उल-वतन’ और हिंदी में ‘राष्ट्रवाद’ के रूप में जाना जाता है। इसे पूजा से जोड़कर कुछ कट्टरपंथी मुसलमानों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को गैर इस्लामिक बताया जा रहा है। कट्टरमपंथी मौलाना और कुछ कट्टरमपंथी मुस्लिम नेता वंदे मातरम् को गैर-इस्लामिक बताकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते आ रहे हैं। केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वंदे मातरम् का पाठ अनिवार्य किए जाने पर भी इन्हीं मौलानाओं ने कड़ा एतराज जताया है। ये कट्टरपंथी मौलाना वंदे मातरम् को मुस्लिमों के मजहबी मामलों में दखल बताते आए हैं।
मुस्लिमों को गर्व के साथ गाना चाहिए वंदे मातरम्
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े राष्ट्रीय मुस्लिम मंच का कहना है कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् इस्लाम के खिलाफ नहीं है। मुसलमानों को वंदे मातरम् कहने पर गर्व महसूस करना चाहिए और इसे गर्व के साथ पढ़ना चाहिए। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक एसके मुद्दीन का कहना है कि स्वतंत्रता से पहले मौलाना अबुल कलाम आजाद और अन्य प्रमुख मुस्लिम नेता गर्व के साथ वंदे मातरम् का पाठ करते थे। पर स्वतंत्रता के बाद कुछ अलगाववादी तत्वों ने समुदाय को गुमराह करने और उसे राष्ट्रीय मुख्यधारा से दूर रखने की कोशिश की है।

















