ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी बोले- वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा है
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ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी बोले- वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा है

चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भावुक संबोधन में कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान त्याग, संघर्ष और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में पिरोया।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Dec 10, 2025, 11:10 am IST
in ओडिशा

भुवनेश्वर। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ओडिशा विधानसभा ने 9 दिसंबर को सर्वसम्मति से एक विशेष संकल्प पारित किया गया । इस उपलक्ष्य में राज्य भर में वर्षभर विशेष आयोजन करने के लिए सरकार को अधिकृत करने के लिए सर्वसम्मति से पारित किया। ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज द्वारा प्रस्तुत इस संकल्प को संक्षिप्त चर्चा के बाद बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस दोनों दलों का समर्थन मिला।

संकल्प पेश करते हुए मंत्री सूरज ने कहा कि इस वर्षभर चलने वाले राज्यव्यापी आयोजन का उद्देश्य बच्चों, युवाओं और छात्रों में देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करना है, साथ ही वंदे मातरम् की ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक विरासत को व्यापक रूप से रेखांकित करना है। उन्होंने कहा कि ओडिशा का इस गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से विशेष संबंध रहा है, क्योंकि जवाहर जिले में सरकारी अधिकारी के रूप में कार्य करते समय यह प्रदेश उनकी “कर्मभूमि” रहा था।

वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है…
चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भावुक संबोधन में कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान त्याग, संघर्ष और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में पिरोया। उन्होंने कहा कि इस अमर रचना का स्मरण आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जब भारत एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में नए युग में प्रवेश कर रहा है। यह वर्षगांठ हमें देशभक्ति, कर्तव्यबोध और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को फिर से जागृत करने का अवसर देती है।

मुख्यमंत्री ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना को स्वतंत्रता आंदोलन का साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टि से काफी महत्नपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, यह गीत हमारी साँसों की लय और रक्त की धड़कन के साथ गूँजता है। बंकिम चंद्र केवल साहित्यकार नहीं, बल्कि ऐसे दूरदर्शी सृजनकर्ता थे जिनकी पंक्तियों ने भारतीय जनमानस में क्रांतिकारी चेतना को प्रज्वलित किया। विधानसभा में प्रस्तुत ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार वंदे मातरम् की रचना 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के दिन हुई थी। बाद में यह गीत 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में शामिल होने के बाद व्यापक जनप्रिय हुआ। 1896 में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया, जिसके बाद यह पूरे देश में स्वतंत्रता के संघर्ष का प्रेरक मंत्र बन गया।

वंदे मातरम् को धर्म के चश्मे से देखना इतिहास के साथ घोर अन्याय है
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि यह गीत भारतभूमि को ‘मां’ के रूप में चित्रित करने वाला पहली रचना थी, जिसने स्वतंत्रता सेनानियों को अद्भुत मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान की। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन इस गीत की प्रभावशाली शक्ति से इतना भयभीत था कि कई अवसरों पर इसे सार्वजनिक रूप से गाने पर प्रतिबंध लगाया गया। उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कुछ समूहों द्वारा वंदे मातरम् के महत्व को धार्मिक रंग देकर कम करने के प्रयासों की आलोचना की। माझी ने कहा, वंदे मातरम् को धर्म के चश्मे से देखना इतिहास के साथ घोर अन्याय है। यह गीत भारत की राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक पहचान और भारतीयता का प्रतीक है, जो जाति, धर्म और क्षेत्रीय सीमाओं से परे है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 7 नवंबर 2026 तक वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ मनाने के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने घोषणा की कि ओडिशा सरकार भी राज्य के सभी जिलों, स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगी। उन्होंने कहा कि यह वर्ष कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवसरों का साक्षी है — संविधान के 75 वर्ष, सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, तथा गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत वर्ष। इन सभी घटनाओं का साझा संदेश राष्ट्रीय एकता का वही भाव है जो वंदे मातरम् में समाहित है।

माझी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में गीत और संगीत का अविस्मरणीय योगदान रहा है। जिस तरह क्रांतिकारी ‘मेरे रंग दे बसंती चोला’ गाते हुए फाँसी पर चढ़ गए, उसी तरह वंदे मातरम् ने करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए लड़ने और बलिदान देने की प्रेरणा दी । उन्होंने सदन के सभी दलों से आह्वान किया कि वंदे मातरम् पर चर्चा राजनीति से परे रहे और इसे स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति कृतज्ञता के रूप में देखा जाए। “वंदे मातरम् वह मंत्र है जो राष्ट्र को जोड़ता है — यह विभाजन नहीं, एकता की शक्ति है,” मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा।

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव का सर्वसम्मति से पारित होना राष्ट्र-निर्माण के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। “यह केवल एक गीत की वर्षगांठ नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा और विकसित राष्ट्र के निर्माण के सामूहिक लक्ष्य का पुनर्स्मरण है।” मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि वंदे मातरम् आने वाली पीढ़ियों के लिए भी राष्ट्रीय चेतना का स्रोत बना रहेगा। चर्चा समाप्त होने के बाद प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित किया गया। कार्यवाही के अंत में सदन में वंदे मातरम् बजाया गया, और सभी सदस्यों ने इसके पहले दो पदों — जिन्हें संविधान सभा ने राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया है — को खड़े होकर गाया। हालांकि, दो पदों के बाद कांग्रेस और बीजद के सदस्य सदन से बाहर चले गए। शेष पदों के दौरान गीत बजता रहा और भाजपा के विधायक पूरे समय खड़े रहे।

Topics: Vande MataramOdishaChief Minister Mohan Charan MajhiCongress
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