देश आज वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूरण होने पर उत्सव मना रहा है। वंदेमातरम् जिसने देश में राष्ट्रभक्ति के शंखनाद में नए प्राण फूंके वहीं क्षेत्रीय व भाषाई साहित्य और साहित्यकारों की भी प्रेरणा बना। वंदेमातरम् से प्रेरणा लेने वाले ऐसे ही पंजाबी साहित्यकार थे लाला धनीराम चात्रिक, जिन्होंने 1940 में अपनी पुस्तक ‘केसर क्यारी’ में वंदेमातरम् का अनुवाद किया।
4 अक्तूबर, 1876 को पंजाब के शेखुपुरा (पाकिस्तान) के गांव पासियांवाला में एक साधारण दुकानदार श्री पोहू लाल के घर जन्मे लाला धनीराम चात्रिक पंजाबी के मूर्धन्य साहित्यकार व रहे हैं। ‘भारत माता’ के शीर्षक वाला उनका यह अनुवाद उतना ही भावुक व राष्ट्रभक्ति का स्वर लिए है जितना कि मूलगान। पंजाब में बंकिम चंद्र चैटर्जी के भावों को गांव-गांव तक प्रसारित करने का काम किया लाला धनीराम चात्रिक ने। उनके द्वारा वंदेमातरम् का किया गया अनुवाद इस तरह है –
- जलां वाली।
- फलां वाली।
- पर्बतां ते थलां वाली,
- चंदन थीं ठारी,
- हरिऔल थीं शिंगारी, माता। 1।
अर्थ :- हे जल फलों से परिपूर्ण, ऊंचे पर्वतों व चंदन की सुगंध लिए उपजाऊ व हरे भरे वनों से अच्छादित मैदानों वाली भारत माता।
- फुल्लां महिकाई,
- सरद चानणी खिड़ाई,
- रुक्खां बूटियां सजाई,
- अनां धनां दी पटारी, माता।2।
अर्थ :- हे फूलों से महकती हुई, चांदनी खिली हुई, विभिन्न वनस्पतियों से अच्छादित अन्न और दन की पिटारी भारत माता।
- हास ते मिठास भरी,
- सुख दाती, वर दाती,
- माण दाती, त्राण दाती,
- शोभा दी अटारी, माता।3।
अर्थ :- हे खुशियों व मिठास भरी, सुख देने वाली और वर देने वाली, सम्मान दिलवाने वाली और प्राण रक्षा करने वाली शोभा से अटी अटारी वाली भारत माता।
- पैंती करोड़ कंठों किलकारनी,
- सत्तर करोड़ बाहू बल धारनी,
- हे भारत पिआरी, माता।4।
अर्थ :- हे पैंतीस करोड़ कण्ठों से किलकारियां भरने वाली और सत्तर करोड़ बाहुबल धारण करने वाली भारत प्यारी माता।
- कमला भवानी,
- सेज फुल्लां दी सजाण वाली,
- देवी तूं सरस्वती,
- वाक विदिआ वधाणी माता।5।
अर्थ :- हे कमला, हे भवानी तेरे आशीर्वाद से भारत भूमि फूलों की सेज जैसी सजी है, तू सरस्वती है और अपनी संतान को वाक विद्या और ज्ञान देने वाली है।
- भूषणां दी लद्दी तूं अनूप रूप लच्छमी दा,
- चोलिआं शिंगारी, उच्चे पर्बतां दी राणी माता।
- जलां भरी, थलां भरी, जोधियां दे दलां भरी,
- लाज भरी, तेज भरी, शोभा शान पाणी माता।6।
अर्थ :- हे आभूषणों से अच्छादित भारत माता तू लक्ष्मी अर्थात वैभव का रूप है, तू सुंदर वस्त्र धारण करने वाली ऊंचे-ऊंचे पर्वतों की रानी है। हे जलों से भरी, सुरम्य स्थलों से भरी, योद्धा दलों से भरी, लाज भरी, तेज भरी शोभायमान भारत माता।
- बार-बार नमस्कार भारत भवानी तैनूं,
- हरी भरी ठंडी ठरी, बरकतां वसाणी, माता।
- अैडे इकबाल, बलकार, परवार वाली,
- किंज तैनूं मन्ने अबला निमाणी, माता।7।
अर्थ :- हे भारत भवानी तुझे बार-बार मेरा नमस्कार है। हे हरी भरी शीतलता देने वाली, बरकत देने वाली माता तेरा चरित्र इतना ऊंचा है, तेरा तेज अनुपम है, तेरा परिवार बलशाली है, ऐसे में कौन है जो तुझे अबला और कमजोर कह सकता है।
- वैरी दल चीर-चीर सुट्णी तूं बीर काली,
- तूहें मेरी लाज, धरम, विदिआ बचाणी माता।
- सीने सतकार तेरा,
- प्राणां नूं अधार तेरा,
- जीभे तेरी बाणी, माता।
- जस होवे मंदरीं ते गढ़ां ते निशान झुल्ले,
- दसे हथिआरीं सजी हिंद राज राणी माता।8।
अर्थ :- हर सीने में तेरी सम्मान है, मेरे प्राणों को तेरा ही आधार है, मेरी जिव्हा से तेरी ही बाणी का प्रस्फुटन होता है। हे दसों हाथों में हथियार सजे हिन्द राजराजनी माता तेरे मंदिरों का यश बढ़े, तेरे गढ़ों पर तेरे निशान झूलते रहें।
आज वंदेमातरम् की 150 वर्ष पूरा होने पर देश अपने महान सपूत लाला धनीराम चात्रिक का भी पुण्य स्मरण करता है।

















