अब नारे नहीं, नतीजा चाहता है राज्य
August 24, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 : अब नारे नहीं, नतीजा चाहता है राज्य

राजग के पक्ष में एमवाई (महिला-युवा) समीकरण बिहार की राजनीति में निर्णायक पहलू बनता जा रहा है। एक ओर है जातीय समीकरणों की राजनीति, दूसरी ओर विकास और अवसर पर आधारित राजनीति

Written byPanchjanyaPanchjanya
Nov 3, 2025, 05:54 pm IST
inविश्लेषण, बिहार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 किसी नए नारे या नैरेटिव का नहीं, बल्कि मौजूदा नेतृत्व और विकास की निरंतरता का चुनाव बन चुका है। हमने जनता के मन की थाह लेने की कोशिश को तो पता चला कि वह बदलाव नहीं, बल्कि स्थिरता और प्रगति को प्राथमिकता दे रही है। राज्य के हर सर्वेक्षण में भी यही झलक रहा है। राजद के परंपरागत मुस्लिम-यादव (एमवाई) समीकरण के सामने अब भाजपा-जदयू का नया महिला-युवा (एमवाई) समीकरण खड़ा है। यह टकराव केवल वोटों का नहीं, दृष्टिकोणों का भी है। एक ओर जातीय समीकरणों की राजनीति, दूसरी ओर विकास व अवसर पर आधारित राजनीति।

नवीन कुमार
क्षेत्रीय निदेशक
राजनीति पॉलिटिकल कन्सल्टेंसी

पिछले चुनाव में जदयू की स्थिति कमजोर थी और वह 43 सीटों पर सिमट गई थी। इसका बड़ा कारण लोजपा का अलग चुनाव लड़ना था, जिससे राजग को नुकसान हुआ। इस बार जमीन पर तस्वीर बदली हुई दिख रही है। महागठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण को लेकर है। राजद-कांग्रेस कई सीटों पर आमने-सामने हैं, जिससे ‘फ्रेंडली फाइट’ जैसी स्थितियां बन रही हैं। ऐसे में अंदरूनी मतभेद गठबंधन के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। इसके उलट, राजग में संगठनात्मक स्थिति अपेक्षाकृत व्यवस्थित और अनुशासित है।

प्रशांत किशोर की चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बार प्रशांत किशोर पर भी है। वे सीटें जीतें या न जीतें, कुछ क्षेत्रों में बड़े नेताओं का समीकरण बिगाड़ने की स्थिति में जरूर हैं। उनकी रणनीति जमीन से जुड़ने के बजाय दिल्ली-केंद्रित रही, जिसके कारण प्रभाव सीमित है। आम आदमी पार्टी की शुरुआती सफलता में जिस सामूहिक संगठन की भूमिका थी, वह प्रशांत किशोर के प्रयासों में अनुपस्थित दिखाई देती है।

विकास और जनता का भरोसा

नीतीश सरकार की कई योजनाएं इस समय जनता के बीच लोकप्रिय हैं। 125 यूनिट बिजली माफी, महिला स्वयं सहायता समूहों को 10,000 रुपये की सहायता जैसी योजनाओं ने महिलाओं के बीच मजबूत आधार बनाया है। उद्योग मंत्री नितीश मिश्रा के प्रयासों से औद्योगिकीकरण को लेकर भी एक नई उम्मीद बनी है। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव का ‘हर परिवार को नौकरी’ वाला वादा जनता को अवास्तविक लग रहा है। जनता अब घोषणाओं से ज्यादा परिणामों को महत्व दे रही है। इसी के चलते महिला और युवा मतदाता बड़ी संख्या में एनडीए के पक्ष में झुकते दिख रहे हैं। यही नया एमवाई समीकरण बिहार की राजनीति में निर्णायक फैक्टर बनता जा रहा है।

जातीय राजनीति का बदलता संतुलन

इस चुनाव में जातीय विभाजन पहले की तुलना में कमजोर पड़ता दिख रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के ओबीसी फोकस और नीतीश कुमार के सामाजिक संतुलन ने मिलकर एनडीए को व्यापक आधार दिया है। पासवान (लोजपा), मांझी (मुसहर), उपेंद्र कुशवाहा (कुशवाहा) और नीतीश कुमार (कुर्मी) जैसे नेताओं के साथ-साथ कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ मिलने से सामाजिक समीकरण सशक्त हुए हैं। यादव समाज में भी एक वर्ग ऐसा है जो अब विकास और स्थिर शासन को प्राथमिकता दे रहा है। उन्हें लगने लगा है कि प्रगति केवल एनडीए के नेतृत्व में संभव है। महिलाओं-युवाओं की सक्रिय भागीदारी, रोजगार, शिक्षा व इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अपेक्षाएं बिहार की राजनीति का नया आधार बन चुकी हैं। बिहार अब नारे नहीं, नतीजे चाहता है।

सड़कों ने बदली तस्वीर

1998 में गया जिले के एक गांव के 35 वर्षीय रामलखन सिंह को दिल का दाैरा पड़ा। लालू-राज में सड़कें खस्ताहाल होने के कारण उन्हें एंबुलेंस से 80 किमी. दूर पटना एम्स तक पहुंचने में पांच घंटे से अधिक समय लगा। उनकी रास्ते में ही मौत हो गई। एम्स के डॉक्टरों ने कहा कि एक-दो घंटे पहले पहुंचते तो जान बच सकती थी।

2019 में वैशाली जिले की राधा देवी को प्रसव के दौरान गंभीर जटिलताएं आईं। स्वास्थ्य केंद्र ने उन्हें तुरंत पटना रेफर किया। सड़कें अच्छी होने के कारण एंबुलेंस मात्र 45 मिनट में 30 किमी. दूर पटना पहुंच गई। समय पर इलाज से न सिर्फ राधा देवी की जान बची, बल्कि उन्होंने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। ये दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि बेहतर सड़कों ने कितनी जिंदगियों को नई राहत दी है।

Topics: महागठबंधन की चुनौतीकर्पूरी ठाकुर 'भारत रत्न'Karpoori Thakur 'Bharat Ratnaप्रशांत किशोरसड़कों ने बदली तस्वीरपाञ्चजन्य विशेषआंतरिक समस्यानारे नहींनतीजाजातीय बनाम विकास राजनीतिजनता की वर्तमान मांगलोजपा से नुकसान
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

सिद्धपीठ श्रीहनुमन्निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण

‘लोक कल्याण की कामना ही लोकतंत्र का सत्य ‘

भारतीय संस्कृति और परिवार व्यवस्था : बदलते समय में हमारी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

‘राष्ट्र निर्माण के यज्ञ में सतत आहुति दे रहा पाञ्चजन्य’

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए रा.स्व. संघ, राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक श्री रमेश चंद्र अग्रवाल। साथ में हैं (बाएं से) भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक
श्री अरुण कुमार गोयल, आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण, पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर एवं भारत प्रकाशन के निदेशक श्री बृज बिहारी गुप्ता।

सुशासन से सुराज, सुराज से राष्ट्र निर्माण

आज का श्लोक : विरोधिनोऽपि श्रोतव्यम् आत्मनीनतया मतम्।

बहुआयामी वीर सावरकर

बहुआयामी वीर सावरकर की लिपि-दृष्टि

Load More

ताज़ा समाचार

ध्रुव जुरेल

IND vs SL : ध्रुव जुरेल का धमाकेदार शतक, बाजुओं पर ‘जय जवान-जय किसान’, कारगिल हीरो पिता का बढ़ाया मान

Odisha Weather: बारिश-बाढ़ की स्थिति पर सरकार की कड़ी नजर, प्रशासन 24 घंटे सतर्क

तस्करों के पास से बरामद हेरोइन और पिस्तौल

पंजाब पर विदेशी तस्करों की नजर: अमृतसर में 6 किलो हेरोइन और तुर्की की पिस्तौल बरामद, पांच गिरफ्तार

सुकमा में नक्सली डम्प से 23 हथियार, 492 जिंदा राउंड और 240 जिलेटिन स्टिक बरामद

उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सोमवार को समीक्षा बैठक की

उत्तराखंड में SIR : लापरवाह अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी, उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने की समीक्षा बैठक

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर इस बार नहीं रहेगा भद्रा का साया, 28 अगस्त को ही बांधी जाएगी राखी

CM धामी ने कहा- 500 वर्षों से अधिक पुरानी हिलजात्रा पिथौरागढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान

रोपवे परियोजनाओं के संबंध में समीक्षा बैठक करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

रोपवे परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर मुख्यमंत्री ने जताई नाराजगी, राज्य स्थापना दिवस तक दी समय-सीमा

Pushkar Singh Dhami

जौनसार-बावर के लगभग 700 बीघा जनजातीय भूमि प्रकरण पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा- मामला गंभीर, शीघ्र होगी कार्रवाई

प्रतीकात्मक चित्र

युवती के पिता का दोस्त था तौफीक, नहाने का वीडियो बनाया और करने लगा ब्लैकमेल, अंकल कहकर बुलाती थी पीड़िता

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies