...'वह एक कातिल था' : सुहरावर्दी उद्यान के नाम पर तस्लीमा नसरीन ने उठाए सवाल, कहा- 'उसने हिन्दुओं को मरवाया'
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…’वह एक कातिल था’ : सुहरावर्दी उद्यान के नाम पर तस्लीमा नसरीन ने उठाए सवाल, कहा- ‘उसने हिन्दुओं को मरवाया’

ढाका के सुहरावर्दी उद्यान पर तस्लीमा नसरीन ने बड़ा सवाल उठाया, कहा- यह वही स्थान है जहां 1971 में पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण किया था।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Oct 30, 2025, 04:45 pm IST
inविश्व

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक उद्यान का नाम है सुहरावर्दी उद्यान। यह उद्यान ढाका के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वही स्थान है, जहां पर 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण किया था। हालांकि उसका नाम उस समय रमना रेस कोर्स था और बाद में हुसैन सुहरावर्दी के नाम पर इसका नाम सुहरावर्दी उद्यान रख दिया गया।

क्या लिखा तस्लीमा ने और क्यों हैं विवादास्पद सुहरावर्दी?

पहले यह जानते हैं कि तस्लीमा ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा..? तस्लीमा ने एक्स पर एक पोस्ट लिख कर एक बार फिर से इतिहास के उस पन्ने को खरोंच दिया, जिसे सहज कोई छूना ही नहीं चाहता है। तस्लीमा ने बांग्लादेश की कट्टर मुल्क की पहचान के प्रतीकों के विषय में फिर से बहस शुरू की। उन्होंने लिखा कि

“ढाका में सुहरावर्दी उद्यान का नाम बदला जाना चाहिए। सुहारावर्दी एक अच्छा इंसान नहीं था – वह एक कातिल था। वह ‘ग्रेट कलकता किलिंग’ का जिम्मेदार था।

हालांकि अंग्रेजों का कहना था कि 4,000 लोग मारे गए थे, मगर 16 अगस्त 1946 से 19 अगस्त 1946 तक लगभग 10,000 लोगों की हत्याएं हुई थीं। लगभग एक लाख लोगों को अपने घर से बेघर होना पड़ा था और उस समय सुहारावर्दी बंगाल का मुख्यमंत्री था और फिर भी उसने खुद ही दंगे भड़काए। वह उर्दू बोलने वाले मुस्लिमों को बंगाल के हिंदुओं को मारने के लिए बिहार से लेकर आया। और ऐसे कातिल के नाम पर किसी भी पार्क का नाम नहीं होना चाहिए!”

Let the name of Suhrawardy Udyan in Dhaka be changed. Suhrawardy was not a good man — he was a killer. He was responsible for the Great Calcutta Killing. Though the British government claimed 4,000 people were killed, in reality about 10,000 were massacred between August 16 and…

— taslima nasreen (@taslimanasreen) October 29, 2025

कौन था सुहरावर्दी?

सुहरावर्दी मुस्लिम लीग का नेता था और जो डायरेक्ट एक्शन डे के समय बंगाल का मुख्यमंत्री था। डायरेक्ट एक्शन डे में हालांकि शेख मुजीबुर्रहमान की भी भूमिका रही थी, परंतु सुहरावर्दी की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण थी, क्योंकि वह उस समय बंगाल का मुख्यमंत्री था। डायरेक्ट एक्शन डे पाकिस्तान के निर्माण के लिए की गई हिंसक अपील थी, जिसमें हजारों हिन्दू मारे गए थे। पाकिस्तान और बांग्लादेश में उन्हें ऐसे इंसान के रूप में याद किया जाता है, जिसने दक्षिण एशियाई मुस्लिमों के लिए अलग मुल्क बनाने के लिए कार्य किया।

डायरेक्ट एक्शन डे का मास्टरमाइंड

सुहरावर्दी को डायरेक्ट एक्शन डे का मास्टर माइंड भी कहा जाता है। यह इसलिए किया गया था, जिससे भारत का विभाजन किया जा सके और मुस्लिमों को कथित रूप से उनका मुल्क मिल सके। जिन्ना ने डायरेक्ट एक्शन डे की अपील करते हुए कहा था कि उन्हें दो ही बातें दिखती हैं — या तो विभाजित भारत या फिर नष्ट भारत। और इस अपील के बाद मुस्लिम लीग के नेताओं ने कलकत्ता को जला दिया था। हजारों हिंदुओं को मार डाला गया और लाखों को बेघर होना पड़ा। इन हजारों हत्याओं में सुहरावर्दी की भूमिका बहुत बड़ी थी। पहले तो इस दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित करवाया गया और फिर ऐसा भी कहा जाता है कि हिंदुओं के स्वामित्व वाली दुकानों पर जो हमले हुए, उन्हें रोकने का भी कोई प्रयास नहीं किया गया।

कलकत्ता का भयावह काला दिन

यह भयावह दिन भारत की स्मृति में अभी तक अंकित है। तमाम तस्वीरें यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि आखिर उन दिनों कलकत्ता कितना छलनी होता रहा था और देखते ही देखते पूरा शहर लाशों से भर उठा था। सुहरावर्दी ने विभाजन के बाद पाकिस्तान जाना चुना और पाकिस्तान का प्रधानमंत्री पद भी सुहरावर्दी की किस्मत में रहा।

उर्दू और अंग्रेजी को महत्व देने वाला नेता

यह बात और भी हैरान करने वाली है कि बंगाल की राजनीति में स्थान रखने वाला सुहरावर्दी परिवार बंगाली से अधिक उर्दू और अंग्रेजी को महत्व देता था। तस्लीमा नसरीन ने लिखा कि —
“मिदनापुर का एक बंगाली होने के बावजूद, इस हत्यारे को बंगाली भाषा से नफ़रत थी। खुद को कुलीन वर्ग का हिस्सा साबित करने के लिए, वह सिर्फ़ उर्दू और अंग्रेज़ी बोलता था। बंगालियों को इस सांप्रदायिक मुस्लिम लीगी के प्रति कोई प्यार नहीं रखना चाहिए!”

सुहरावर्दी परिवार, जो बंगाल की राजनीति में ऊंचा मुकाम रखता था, वह भी उर्दू ही बोलता था और बंगाल का होने के बाद भी बंगाली पहचान बताना पसंद नहीं करता था। हुसैन शहीद सुहरावर्दी की वालिदा उर्दू की विद्वान थी और यह कहा जा सकता है कि हुसैन सुहारावर्दी पर अपनी वालिदा का असर रहा होगा। सुहारावर्दी मुस्लिम लीग का नेता था और बाद में वह पाकिस्तान का प्रधानमंत्री भी बना।

विरोधाभास: पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के नाम पर उद्यान

यह बहुत ही हैरानी और अचंभित करने वाली बात है कि जिस पाकिस्तानी सेना ने दिसंबर 1971 में उस मैदान में आत्मसमर्पण किया था, उस मैदान का नाम एक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के नाम पर रख दिया गया? यह न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से विरोधाभासी है, बल्कि बांग्लादेश की राष्ट्रीय अस्मिता पर भी प्रश्न खड़ा करता है।

तस्लीमा का विरोध और जनता की प्रतिक्रिया

बांग्लादेश के कई नागरिक तस्लीमा की इस पोस्ट का विरोध कर रहे हैं। और सुहारावर्दी को बांग्लादेश का नेता बता रहे हैं। एक यूजर ने सुहारावर्दी को “पायनियर ऑफ मुस्लिम बंगाल” कहा। एक यूजर ने लिखा कि वह एक सच्चा मुस्लिम बंगाली नेता था और उनका आदर्श। वह हमेशा उनके बीच और उनकी यादों में रहेगा।

यह और भी हैरान करने वाली बात प्रतीत होती है कि लोग तस्लीमा की इस बात का भी समर्थन नहीं कर रहे हैं कि उस उद्यान का नाम बदलकर “स्वाधीनता उद्यान” कर दिया जाए!

Topics: सुहरावर्दी उद्यान नाम बदलने की मांगबांग्लादेश इतिहासढाका रमना रेस कोर्सपाकिस्तान प्रधानमंत्री सुहरावर्दीबंगाल दंगे 1946तस्लीमा नसरीन सुहरावर्दीढाका पार्क विवाद1971 आत्मसमर्पण स्थलडायरेक्ट एक्शन डेकलकत्ता किलिंग 1946तस्लीमा नसरीन ट्वीटसुहरावर्दी कौन थाहुसैन शहीद सुहरावर्दीतस्लीमा ट्वीट विवाद1971 आत्मसमर्पण
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