क्या पाकिस्तानी सीरियल भारतीय मुस्लिम परिवारों में फैला रहे तनाव? देवबंद के मौलाना ने आखिर क्या कहा
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क्या पाकिस्तानी सीरियल भारतीय मुस्लिम परिवारों में फैला रहे तनाव? देवबंद के मौलाना ने आखिर क्या कहा

देवबंद के मौलाना कारी इशाक ने सहारनपुर में दावा किया कि पाकिस्तानी टीवी ड्रामा सास-बहू झगड़ों से मुस्लिम परिवारों में तनाव बढ़ा रहे हैं। इस्लामी तालीम छोड़ महिलाएं इन्हें देख रही हैं, जिससे तलाक के मामले उछाल पर।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Sudhir Kumar Pandey
Oct 28, 2025, 04:51 pm IST
inविश्लेषण
Maulana Qari Ishaq Gora Pakistan drama

मौलाना कारी इशाक गोरा

सहारनपुर के देवबंद के मौलाना ने बहुत ही हैरान करने वाली बात कही है। मौलाना कारी इशाक गोरा ने दावा किया कि पाकिस्तानी ड्रामा देखने के कारण भारत के मुस्लिम परिवार टूट रहे हैं। कारी इशाक ने कहा कि पाकिस्तानी ड्रामा में अधिकतर सास-बहू और अन्य घरेलू टेंशन दिखाई जाती हैं, और जिसके कारण भारत में मुस्लिम परिवार भी टेंशन का शिकार हो रहे हैं। कारी का कहना है, “पाकिस्तानी टीवी सीरियल्स ने हमारे घरों में तनाव और असंतोष भर दिया है। वे हमारे परिवार की वैल्यूज को नष्ट कर रहे हैं, और यही कारण है कि हमारे यहां तलाक बढ़ रहे हैं!”

बार-बार दिखा रहे सास-बहू के झगड़े

मौलाना की शिकायत है कि ऐसे ड्रामा में बार-बार सास और बहू के बीच झगड़े दिखाए जाते हैं। पुरुषों को उनका शोषण करने वाला दिखाया जाता है और मुस्लिम औरतों को बेसहारा पीड़ित। इन्हें दिखाने के कारण लोग भी घरों में ऐसा ही व्यवहार करने लगे हैं और हमारे घरेलू रिश्ते खराब हो रहे हैं। मौलाना ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी ड्रामा भारतीय मुस्लिमों पर बहुत खतरनाक प्रभाव डाल रहे हाँ और उन्होंने मुस्लिम समुदाय से यह अपील की कि वह ऐसे मनोरंजन से खुद को दूर रखें।

मुस्लिम महिलाएं इस्लामी तालीम की जगह ड्रामा देख रहीं

मौलाना ने कहा, “टीवी ने हमारे घरों में जहर भर दिया है। इन दिनों कई औरतें इस्लामिक तालीम की जगह ये ड्रामा देख रही हैं, और यही कारण हैं कि हमारे माशरे (समुदाय) में घरों में मारपीट और तलाक बढ़ते जा रहे हैं।“ मौलाना ने अपने लोगों से अपील की कि वे इस्लामिक तालीम की तरफ वापस लौटें। अगर हमें अपने घरों में प्यार और दुआएं चाहिए तो हमें अपनी रोज की जिंदगी में कुरआन और इस्लामिक तालीम की तरफ लौटना होगा!” मौलाना ने शरिया के अनुसार रहने की अपील की।

क्या खास है पाकिस्तानी ड्रामा में?

पाकिस्तानी ड्रामा पूरे विश्व में लोकप्रिय हैं। महिलाओं के लिए यह और भी आकर्षण का केंद्र इसलिए हैं क्योंकि इनमें रोजमर्रा के जीवन की समस्याओं से जूझती महिलाएं दिखाई जाती हैं, हालांकि ये हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों में लोकप्रिय हैं और इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत सरकार द्वारा कई यूट्यूब चैनल्स पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी किसी न किसी तरीके से अधिकतर सीरियल्स यूट्यूब पर उपलब्ध हैं।

इसे भी पढ़ें: सऊदी अरब ने कफाला सिस्टम खत्म कर तोड़ दीं गुलामी की जंजीरें, भारत में कट्टरपंथियों को किताब नहीं हिजाब चाहिए

ये मुस्लिम समाज की हकीकत को दिखाते हैं कि कैसे एक लड़की पढ़ने-लिखने के बाद भी आजाद नहीं होती है और कैसे उस पर तलाक की तलवार लटकती रहती है। पाकिस्तानी सीरियल में मुस्लिम महिलाओं की वह हकीकत दिखाई जाती है, जिसे भारत में दिखाया भी नहीं जा सकता है। वह मुस्लिम महिलाओं की अलग तस्वीर पेश करते हैं। कई बार वह मजलूम है, कई बार वह घर तोड़ने वाली है तो कई बार वह विद्रोह करती हुई है। और सबसे रोचक बात यही है कि यदि लड़की विद्रोह भी कर रही है, तो भी वह शरीयत के हवाले से ही विद्रोह कर रही है।

वह मेहर की रकम के लिए बात करती हुई भी दिख जाती है तो वहीं ये सीरियल्स यह भी दिखाते हैं कि कैसे मुस्लिम समाज को जहेज (दहेज) जैसी कुरीतियों ने जकड़ रखा है। कैसे मुस्लिम आदमी केवल बहन या बेटियों का जहेज जुटाने के लिए पराए मुल्क जाते हैं। और यह भी सब बहुत स्पष्टता से दिखाया गया है कि कैसे बुआ, खाला, मामी, चाची, ताई जैसे रिश्ते इसलिए नहीं बन पाते हैं कि उन्हें यह लगता है कि कहीं किसी परिवार की कोई बेटी या बेटा उनके बेटे या बेटी को फंसा न ले!

इस ड्रामा में मुस्लिम समाज की जकड़न को दिखाया जाता है और भारत में अक्सर इन सीरियल्स पर बात होती रहती है। लोग पसंद करते हैं और वहां की अभिनेत्रियां यहां काफी लोकप्रिय हैं।

मौलाना इशाक का बयान पाकिस्तान के भी कुछ पोर्टल में चर्चा का विषय बना। वे इस बयान को पाकिस्तानी ड्रामा की लोकप्रियता बता रहे हैं। उनके अनुसार भारत सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद भी इस तरह से ड्रामा को देखा जाना, यह बताता है कि ये ड्रामा हिंदुस्तान में कितने लोकप्रिय हैं।

पाकिस्तानी पोर्टल पर वायरल हो रहे मौलाना

मौलाना का बयान पाकिस्तान में सुर्खियां तो बटोर रहा है, लेकिन इशाक का प्रश्न यह होना चाहिए था कि एक दुश्मन मुल्क के ड्रामा उनके मुल्क में पाबंदी के बाद भी क्यों दिखाए जा रहे हैं? मगर मौलाना को पाबंदी इसलिए नहीं चाहिए कि वह दुश्मन मुल्क है, बल्कि उन्हें पाबंदी इसलिए चाहिए क्योंकि उनके अनुसार उनकी महिलाएं इन सीरियल्स के कारण बिगड़ रही हैं, जबकि एक इस्लामी मुल्क होने के नाते पाकिस्तान के सीरियल्स में इस्लामिक हिदायतें शामिल हैं और इस्लामिक शब्दावली जैसे “माल ए गनीमत” आदि भी कभी-कभी प्रयोग किये जाते हैं।

और कई-कई सीरियल्स में तो कुछ लोग अपनी जड़ों के विषय में भी बात करते हैं कि “कभी राजपूत हुआ करते थे हम” आदि! तो क्या मौलाना की चिंता कुछ और है?

Topics: पाकिस्तानी ड्रामाशरियाIslamic Education
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