मलयालम फिल्मों के बड़े सितारे मम्मूटी को हाल ही में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। गुजरात में हुए इस समारोह के दौरान उनके स्वागत का एक वीडियो वायरल हो गया। इसमें एक महिला ने उनके माथे पर तिलक लगाया। ज्यादातर लोग उनकी जीत पर खुश हो रहे थे, लेकिन कुछ कट्टरपंथी मानसिकता से सने लोगों को यह रास नहीं आया और वे उनकी आलोचना करने लगे। इसके बाद अभिनेता और फिल्मकार हरिश्री यूसुफ ने मम्मूटी का बचाव किया है।
पुरस्कार और स्वागत का वीडियो
मम्मूटी को ब्रमायुगम फिल्म में उनके किरदार के लिए बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का समारोह गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास हुआ। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आधिकारिक पेज पर एक वीडियो डाला गया। इसमें मम्मूटी सफेद शर्ट और क्रीम रंग की पैंट्स में दिख रहे हैं। वे समारोह में पहुंचते हैं तो उनका स्वागत किया जाता है। एक महिला उन्हें फूलों का गुलदस्ता देती हैं, माथे पर तिलक लगाती हैं और गले में तिरंगे रंग का थोरथु (कंधे का कपड़ा) डालती हैं। मम्मूटी इस दौरान मुस्कुराते दिख रहे हैं।
कट्टरपंथियों को नहीं सुहा रहा तिलक
इस वीडियो के नीचे ज्यादातर कमेंट्स उनकी जीत की बधाई वाले थे। लेकिन कुछ लोगों ने पूछा कि मम्मूटी मुस्लिम हैं, फिर भी उन्होंने माथे पर तिलक क्यों लगवाया। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि उन्होंने तिलक लगाने की अनुमति क्यों दी।
हरिश्री यूसुफ ने किया बचाव
इस आलोचना पर हरिश्री यूसुफ ने इंस्टाग्राम पर अपनी बात कही। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मलयाली मम्मूटी की जीत पर खुश हैं, लेकिन कुछ लोग तिलक को लेकर नाराज हो रहे हैं। उन्होंने एक खास कमेंट का जिक्र किया और उस व्यक्ति को ‘कुएं का मेंढक’ कहा।
यूसुफ ने कहा कि क्रॉस बना लो, तिलक लगा लो या झुककर प्रार्थना कर लो, सब एक ही भगवान की तरफ जाता है। यह हमारे सृष्टिकर्ता के प्रति प्यार दिखाता है। उन्होंने बताया कि बड़े होटल या कार्यक्रमों में मेहमानों का स्वागत करने का एक तरीका होता है—फूलों का गुलदस्ता देना और माथे पर तिलक लगाना। यह सिर्फ स्वागत का तरीका है।
उन्होंने कहा कि कलाकार संकीर्ण सोच वाले नहीं होते, वे थोड़ा व्यापक सोचते हैं। धर्म को लेकर गाली-गलौज करने वाले लोग विभाजन पैदा करते हैं। धर्म लोगों को बेहतर इंसान बनाने के लिए है, झगड़ा कराने के लिए नहीं। उन्होंने मम्मूटी के काम का जिक्र करते हुए कहा कि वे समाज के लिए काफी कुछ करते हैं। कई संस्थाओं के संरक्षक हैं, चैरिटी करते हैं और कई बच्चों के मुफ्त हृदय शल्य चिकित्सा करवा चुके हैं। यूसुफ ने आलोचक से कहा कि भारत एक महान देश है। ऐसे सोच वाले लोग ही सांप्रदायिक तनाव पैदा करते हैं।












