अरब देश दुबई की चमक-दमक को देखकर लोग बहुतायत में उसकी ओर आकर्षित होते हैं। लेकिन उसी चमक दमक के बीच एक काला सच ये भी है कि वहां पर लोगों का ब्रेनवॉश और उनका इस्लामिक कन्वर्जन कराया जाता है। इसी क्रम में दुबई से चौंकाने वाली खबर प्रकाश में आई है, जहां इसी साल (2025) में अब तक के 6 महीनों में ही 3600 से अधिक लोगों का इस्लामिक कन्वर्जन हुआ है। ये कन्वर्जन वहां का इस्लामिक मामलों का धर्मार्थ गतिविधियों का विभाग काम करता है।
ये वो विभाग है, जहां लोगों को इस्लामिक कन्वर्जन के लिए मानसिक तौर पर तैयार कराया जाता है। यहां लोगों का इतना अधिक ब्रेनवॉश कर दिया जाता है कि लोगों को इस्लाम के अलावा कुछ दिखता ही नहीं। इस्लामिक मामलों और धर्मार्थ गतिविधियों विभाग (IACAD) इसके लिए बकायदा क्लासेज आयोजित करता है। वहीं पर लोगों को इस्लामिक परंपराओं और मजहब के बारे में बताया जाता है। लोगों को कुरान के बारे में पढ़ाया जाता है।
इस साल 47 कक्षाओं का आयोजन
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल की शुरुआत में सेंटर ने 47 जागरूकता और शिक्षण कक्षाएं आयोजित कीं, जिनमें 1,400 से ज्यादा लोग शामिल हुए। इन कक्षाओं में इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाया गया। 1,300 से अधिक छात्रों ने इस्लामिक शिक्षा के कोर्स में हिस्सा लिया, जहां उन्हें कुरान की शिक्षाएं और जीवन में इसकी उपयोगिता बताई गई। सेंटर के डायरेक्टर जसीम अल खज्राजी का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ शिक्षा देना नहीं, बल्कि लोगों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक समझ बढ़ाना भी है। वे मानते हैं कि इस्लाम का असली रूप सहनशीलता, ज्ञान और आपसी भाईचारे में है।
सस्टेनेबल नॉलेज रूम’ की खास पहल
दुबई में लोगों को इस्लामिक कन्वर्जन के लिए तैयार करने के लिए बकायदा ‘सस्टेनेबल नॉलेज रूम’ नाम के एक स्पेस को रिजर्व किया गया है, जो एक 360 डिग्री वर्चुअल लर्निंग स्पेस है। यह आधुनिक तकनीक के जरिए इस्लाम की शिक्षा को रोचक बनाता है। यहां लोग सिर्फ सुनने वाले नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं। इस रूम में 190 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया, जिसमें हर उम्र के लोग शामिल थे। यह जगह वर्कशॉप, ट्रेनिंग और धार्मिक आयोजनों के लिए भी इस्तेमाल होती है। दावा किया जाता है कि इस तकनीक से इस्लाम को और अधिक अच्छे से समझा जा सकता है।
IACAD: इस्लामिक मूल्यों को बढ़ावा
IACAD की स्थापना 1969 में शेख राशिद बिन सईद अल मकतूम ने की थी। इसका उद्देश्य दुबई में इस्लामिक मूल्यों को फैलाना और धार्मिक जागरूकता बढ़ाना है। यह विभाग कई काम करता है, जैसे फतवा जारी करना, कुरान का प्रकाशन और वितरण, हज और उमराह की व्यवस्था, और धार्मिक शिक्षकों को लाइसेंस देना। इसके अलावा, यह मस्जिदों का प्रबंधन करता है और ऑनलाइन सेवाओं के जरिए लोगों को धार्मिक जानकारी देता है, जैसे सवाल-जवाब, नए मुस्लिमों के लिए मार्गदर्शन, और मस्जिदों की जानकारी।
मजबूत कानूनी ढांचा
2011 के कानून नंबर 2 के तहत IACAD को और ताकत मिली। अब यह इस्लामिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए नीतियां बनाता है, धार्मिक सामग्री छापता और बांटता है, और इस्लामिक शिक्षण संस्थानों को लाइसेंस देता है। यह हिजरी कैलेंडर तैयार करता है, धार्मिक आयोजनों की मंजूरी देता है, और जकात के प्रति जागरूकता बढ़ाता है।

















