पाकिस्तान में एक बार फिर से अहमदिया समुदाय को लेकर भेदभाव के समाचार सामने आए हैं और इस बार तो सेलेब्रिटी डिजाइनर ज़ैन अहमद को लेकर यह विवाद सामने आया है। पाकिस्तान की गायिका आईमा बेग ने फैशन डिजाइनर ज़ैन अहमद से शादी कर ली है। ज़ैन अहमद कोई मामूली इंसान न होकर ग्लोबल स्ट्रीटवियर लेबल “रास्ता” के संस्थापक हैं। उनका अच्छा खासा नाम है और पहचान है।
ज़ैन अहमदिया समुदाय से आते हैं। अब इस शादी को लेकर पाकिस्तान में हंगामा बरपा हुआ है। लोग कह रहे हैं कि यह शिर्क है। ज़ैन अहमद कादियानी संप्रदाय के संस्थापक मिर्जा गुलाम अहमद के पड़पोते हैं। आईमा बेग को लेकर लोग कह रहे हैं कि आईमा ने एक काफिर से शादी की है, जिसके पूरे परिवार ने शिर्क किया था और दूसरों को एक सदी से शिर्क करने के लिए कह रहे हैं और अब तो सार्वजनिक रूप से ज़िना किया है क्योंकि यह शादी इस्लाम को कुबूल है ही नहीं।
आईमा बेग के पीछे पड़े इस्लामिक कट्टरपंथी
यह शादी कनाडा में हुई है। मगर पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया के कट्टरपंथी आईमा के पीछे पड़े हुए हैं। एक यूजर ने एक्स पर लिखा कि एम मुस्लिम औरत किसी भी गैर-मुस्लिम से तब तक निकाह नहीं कर सकती है, जब तक कि वह इस्लाम न अपना ले। यह शरिया का कानून है। और उसने कादियानी से शादी की है और लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं, ऐसा लग रहा है कि सब सामान्य हो गया है। दरअसल सोशल मीडिया पर जहां लोग आईमा बेग की बुराई कर रहे हैं, तो काफी लोग ऐसे भी हैं, जो आईमा के समर्थन में उतर आए हैं। लोगों का कहना है कि शादी किससे करनी है और किससे नहीं, यह आईमा का अपना फैसला है और उसे यह फैसला करने का अधिकार होना ही चाहिए।
एक यूजर ने लिखा कि आईमा बेग ने अपना जीवन साथी चुनने के मूलभूत अधिकार का पालन किया है। एक तरफ हैदर अली मुल्क के झंडे के साथ पूरे देश के लिए शर्म का विषय बन गया था। और अनुमान लगाइए कि किसपर यह पैट्रियार्क माशरा हंगामा कर रहा है? यही होता है जब एक माशरे में ऐसी पॉलिसी बनती हैं, जो औरतों की पसंद के लिए कठोर होती हैं और मारपीट करने वाले आदमियों को कम जिम्मेदार बताती हैं।
क्या है हैदर अली वाला मामला?
हैदर अली पाकिस्तान का क्रिकेटर है, जिसे यौन शोषण के आरोप में यूके में गिरफ्तार किया गया है और उसे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड द्वारा सस्पेंड कर दिया गया है। एक यूजर ने एक वीडियो साझा किया तो शायद किसी स्पेस का था। जिसमें हैदर अली की इस हरकत को लोग उचित ठहरा रहे हैं। हैदर अली पर एक नाबालिग लड़की के बलात्कार का आरोप है।
https://Twitter.com/MullahpostingLs/status/1953830919607136273?
लोग कह रहे हैं कि देश में किसके कारनामों पर शर्म होनी चाहिए, आईमा बेग के या फिर हैदर के? जबाव तो सोशल मीडिया पर मिल ही रहा है कि आईमा बेग की बुराई हो रही है या हैदर की? हैदर की बुराई नहीं हो रही है, बल्कि उसे कहीं न कहीं ऐसा ठहराया जा रहा है कि ठीक है, हो गया तो हो गया।
आईमा बेग को गैर-मुस्लिम भी लोग बता रहे
वहीं एक वर्ग ऐसा भी है सोशल मीडिया पर जो यह कह रहा है कि आईमा बेग टैटू बनवाती थी, उसकी आय का स्रोत गाना और मौडलिंग थी और वह शरीर दिखाने वाले कपड़े पहनती थी, उसमें इस्लामी मूल्य नहीं थे तो फिर इससे क्या फर्क पड़ता है कि वह किससे शादी करती है? वह लड़की इस्लामी तो थी ही नहीं। एक ने लिखा कि उसने निकाह किया ही नहीं है, उसका रिश्ता केवल लिव इन वाला है।
एक ने लिखा कि कुछ लोग यहाँ पर आईमा बेग की एक अहमदिया मुस्लिम से शादी को सही ठहरा रहे हैं, और वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं, कि खुद को लिबरल साबित कर सकें। वे लोग ऐसा न करें, क्योंकि एक मुस्लिम महिला कभी भी एक गैर मुस्लिम से शादी नहीं कर सकती है। हर चीज लिबरल और कूल होने वाली नहीं होती है।
अहमदिया मुस्लिमों को मुस्लिम नहीं मानते हैं मुस्लिम
अहमदिया समुदाय के लोगों को मुस्लिम लोग मुस्लिम नहीं मानते हैं। वे यहाँ तक इस समुदाय के लोगों से घृणा करते हैं कि भौतिकी में नोबेल पुरस्कार पाने वाले भौतिक विज्ञानी डॉक्टर अब्दुस सलाम की कब्र से मुस्लिम शब्द उनकी अहमदी पहचान के कारण हटा दिया गया था।
उनके साथ तमाम भेदभाव होते हैं और उन्हें मुस्लिम माना नहीं जाता और वे खुद को अल्पसंख्यक नहीं मानते हैं। वे अपनी इबादत करने की जगह को मस्जिद नहीं कह सकते हैं और न ही वे ईद आदि त्योहार खुलेआम मना सकते हैं।

















