रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जहां एक तरफ पश्चिमी देशों समेत अमेरिका रूस पर प्रतिबंध लगाने में लगे हैं। वहीं भारत जैसे कुछ देश अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर अभी भी रूस से तेल खरीद रहे हैं। इसी क्रम में दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम राष्ट्र इंडोनेशिया ने अमेरिकी प्रतिबंधों को धता बताते हुए रूसी तेल और गैस का आयात करने जा रहा है।
रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, रूस के राजदूत सर्गेई टोल्चेनोव ने टास न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में बताया कि इंडोनेशिया रूस से तेल और गैस मंगवाने में इच्छुक है। दोनों देशों के बीच इस पर बातचीत चल रही है, लेकिन कुछ सावधानियां भी बरतनी पड़ रही हैं। इंडोनेशिया तेल और लिक्विफाइड गैस का बड़ा आयातक है, इसलिए रूस जैसे पार्टनर से सप्लाई लेने का मौका अच्छा लग रहा है।
तेल-गैस सप्लाई पर चल रही चर्चा
एंटोल्चेनोव ने कहा, “इंडोनेशियाई पक्ष रूस से तेल और लिक्विफाइड गैस की सप्लाई में दिलचस्पी रखता है। कई रूसी कंपनियों के साथ बात हो रही है।” उन्होंने ये भी जोड़ा कि वो अभी कोई आंकड़े या कंपनी के नाम नहीं बता रहे, ताकि अनावश्यक हलचल न मचे। साथ ही, इंडोनेशियाई पार्टनर्स को पश्चिमी देशों की सेकेंडरी सैंक्शंस का खतरा न हो। “पश्चिमी देश हमारी हर हरकत पर नजर रखे हुए हैं, खासकर इंडोनेशिया में,” उन्होंने समझाया। रूस ने इंडोनेशिया को साफ कहा है कि वो कोई भी एनर्जी प्रोडक्ट या प्रोसेस्ड सामान सप्लाई करने को तैयार है, जो इंडोनेशिया को चाहिए। काम चल रहा है, धीरे-धीरे लेकिन आगे बढ़ रहा है।
न्यूक्लियर एनर्जी में रूस की भूमिका
एनर्जी के दूसरे क्षेत्रों में न्यूक्लियर पावर को सबसे अहम बताया गया। रूस की स्टेट कॉर्पोरेशन रोसाटॉम ग्लोबल न्यूक्लियर मार्केट में लीडर है। वो इंडोनेशिया में सक्रिय है और कोऑपरेशन के लिए तैयार है। टोल्चेनोव ने कहा, “रोसाटॉम इंडोनेशियाई पक्ष के साथ काम करने को उत्सुक है।” डायलॉग धीमा चल रहा है, लेकिन इंडोनेशिया में न्यूक्लियर इंडस्ट्री का सेटअप लगभग पूरा हो रहा है। एजेंसियां तय हो रही हैं, जिनके साथ असली नेगोशिएशंस हो सकें। इससे न्यूक्लियर एनर्जी के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर बात प्रैक्टिकल स्टेज पर पहुंच जाएगी।
भविष्य की संभावनाएं
राजदूत ने उम्मीद जताई कि यहां बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट बनेगा या छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर्स लगेंगे – या तो जमीन पर या फ्लोटिंग। रूस इंडोनेशिया के साथ इन सभी क्षेत्रों में पार्टनरशिप करने को तैयार है। ये सब इंडोनेशिया की एनर्जी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा, बिना ज्यादा शोर-शराबे के।
















