रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरोकी और प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में राष्ट्रपति करोल नवरोकी ने प्रधानमंत्री टस्क की आलोचना करते हुए उन्हें 1989 के बाद से पोलैंड का सबसे खराब प्रधानमंत्री करार दिया है।
ये बयान उन्होंने wPolsce24 चैनल को दिए इंटरव्यू में दिया। नवरोकी ने इस साल ही राष्ट्रपति पद संभाला है। दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय मुद्दों पर झगड़ा चल रहा है, खासकर यूक्रेन को सपोर्ट करने की पॉलिसी पर। ये विवाद सोशल मीडिया से लेकर मीटिंग्स तक फैल गया है।
टस्क पर नवरोकी की कड़ी नाराजगी
नवरोकी ने साफ कहा कि टस्क की अगुवाई में पोलैंड की हालत खराब हो रही है। उन्होंने टस्क को “पोस्ट-1989 हिस्ट्री का सबसे बुरा पीएम” करार दिया। ये आलोचना राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को लेकर है। नवरोकी का कहना है कि टस्क ने पोलैंड की सीक्रेट सर्विसेज के हेड्स को राष्ट्रपति से मिलने से रोका। ये पहली बार हुआ जब 1989 के कम्युनिस्ट दौर के बाद इंटेलिजेंस चीफ्स ने ट्रेडिशनल मीटिंग स्किप की। नवरोकी ने ये भी बताया कि टस्क की सरकार ने खुफिया विभागों को कंट्रोल करने की कोशिश की, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।”
टस्क का पलटवार
दूसरी तरफ, टस्क ने भी पिछले शुक्रवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) के जरिए नवरोकी पर आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ने 136 ग्रेजुएट्स को ऑफिसर रैंक देने से मना कर दिया। ये ग्रेजुएट्स हाल ही में इंटेलिजेंस और काउंटर-इंटेलिजेंस ट्रेनिंग पूरी कर चुके थे। टस्क ने लिखा, “राष्ट्रपति बनने के लिए सिर्फ चुनाव जीतना काफी नहीं है।” नवरोकी ने ये आरोप खारिज कर दिया और कहा कि ये राजनीतिक स्टंट है।
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यूक्रेन सपोर्ट पर मतभेद
यूक्रेन को लेकर दोनों की राय अलग है। पोलैंड 2022 से यूक्रेन का सबसे जोरदार समर्थक रहा है, लेकिन नवरोकी का मानना है कि हम बहुत आगे चले गए। उन्होंने कहा कि पोलैंड ने अपने हितों की कीमत पर ज्यादा मदद की। नवरोकी यूक्रेन को नाटो और ईयू में शामिल होने के खिलाफ हैं, हालांकि सामान्य सपोर्ट तो देते हैं। सितंबर में उन्होंने एक बिल साइन किया, जिससे यूक्रेनी माइग्रेंट्स के लिए बेनिफिट्स के नियम सख्त हो गए। टस्क की सरकार ने यूक्रेन को हथियार, ट्रेनिंग और शरणार्थियों की मदद दी है।
पोलैंड में यूक्रेन के खिलाफ बढ़ रहा असंतोष
पोलैंड की जनता का यूक्रेन के प्रति नजरिया बदल रहा है। 2022 की शुरुआत में 94 फीसदी लोग यूक्रेनी शरणार्थियों को स्वीकार करने के पक्ष में थे। लेकिन सितंबर 2025 के एक सीबीओएस सर्वे के मुताबिक, ये आंकड़ा गिरकर 48 फीसदी रह गया। टस्क ने वारसॉ सिक्योरिटी फोरम में इसकी बात की। उन्होंने कहा कि रूस की वजह से लोगों में यूक्रेन के खिलाफ नफरत फैली है। टस्क ने जोर देकर कहा, “यूक्रेन का युद्ध हमारा भी युद्ध है। ये पश्चिम के लिए फंडामेंटल इश्यू है।” पोलैंड ने यूक्रेन को अरबों डॉलर की मदद दी, लेकिन अब घरेलू दिक्कतें जैसे महंगाई और नौकरियां लोगों को परेशान कर रही हैं।













