'जिहादी Osama Bin Laden बुर्के में छुपकर भागा था तोरा-बोरा पहाड़ियों से', एक और बड़ा खुलासा Ex CIA Officer किरियाकू का
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‘जिहादी Osama Bin Laden बुर्के में छुपकर भागा था तोरा-बोरा पहाड़ियों से’, एक और बड़ा खुलासा Ex CIA Officer किरियाकू का

जॉन किरियाकू का यह खुलासा अमेरिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उस समय की खुफिया चूक का पता चलता है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Oct 25, 2025, 03:24 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
ओसामा बिन लादेन तोरा-बोरा पहाड़ियों के अपने अड्डे में छुपा रहता था (File Photo)

ओसामा बिन लादेन तोरा-बोरा पहाड़ियों के अपने अड्डे में छुपा रहता था (File Photo)

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाकू ने हाल ही में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने पाकिस्तान के पूर्व फौजी राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ के क​रोड़ों डॉलर में अपने इस्लामी देश का न्यूक्लियर कंट्रोल अमेरिका के सुपुर्द करने की जानकारी तो दी है। इसके अलावा भी जॉन ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। एक अन्य तथ्य जो उसने बताया, वह उस जिहादी ओसामा बिन लादेन से जुड़ा है जिसने 9/11 हमले कराए थे और अमेरिका की नींद उड़ाई थी। उसकी खोज में अमेेरिका ने अफगानिस्तान ही नहीं, दुनिया का कोना—कोना छान मारा था। लेकिन अंतत: उसे अफगानिस्तान में ही तोरा—बोरा पहाड़ियों में अपने अड्डे में छुपे होने की भनक लगी थी। इसके बावजूद, अमेरिकी फौज उसे वहां दबोच नहीं पाई थी। कारण यह कि अल-कायदा का जिहादी संस्थापक ओसामा बिन लादेन वहां से महिलाओं का भेष बनाकर, बुर्का ओढ़कर पाकिस्तान की ओर भाग गया था। जॉन ने यह खुलासा जानकारी एक इंटरव्यू में किया है।

जॉन ने बताया कि 2001 में जब अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अफगानिस्तान में तालिबान और अल-कायदा के ठिकानों पर हमला किया, तब ओसामा बिन लादेन अपने साथियों के साथ तोरा-बोरा की पहाड़ियों में छिपा हुआ था। अमेरिकी सेना को भरोसा था कि उसने लादेन को घेर लिया है। इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एक बड़े वाले कमांडर के साथ काम करने वाला एक अनुवादक दरअसल अल-कायदा का ही सदस्य निकला। उसी ने ओसामा को भागने की कवायद में उसका साथ दिया था।

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाकू

जॉन किरियाकू के अनुसार, जब अमेरिकी सेना ने उन पहाड़ियों को घेर लिया था, तब उस अनुवादक ने अमेरिकी अधिकारियों को यह कहकर उलझा दिया था कि अल-कायदा हथियार डालने को तैयार है, लेकिन पहले उन्हें महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए सुबह तक का समय चाहिए। इस प्रस्ताव पर अमेरिकी सेना ने रातभर इंतजार करने का फैसला किया। इसी दौरान, बिन लादेन रात के अंधेरे में महिलाओं वाला बुर्का पहनकर एक पिकअप ट्रक में बैठकर पाकिस्तान की ओर भाग निकला।

पूर्व सीआईए अधिकारी जॉन ने आगे बताया कि वह अनुवादक अमेरिकी सेना में घुसपैठ किए हुए था। अमेरिकी अधिकारियों ने उस पर भरोसा कर लिया था, इसी वजह से उसकी तरकीब कामयाब हो गई थी। सीआईए अधिकारी ने कहा कि ‘हमें यह पता नहीं था कि हमारा ही अनुवादक अल-कायदा का ऑपरेटिव था।’ उसी की मदद से बिन लादेन पहाड़ियों से नीचे उतरा और पाकिस्तानी सीमा पार करने में सफल रहा।

सुबह जब अमेरिकी सैनिकों ने तोरा-बोरा में सर्च ऑपरेशन शुरू किया, तो पता चला कि अब वहां कोई था ही नहीं। सभी जिहादी भाग खड़े हुए थे। यह सीआईए के लिए एक बड़ी नाकामी थी। इसके बाद ही, अमेरिका ने पाकिस्तान के अंदर अल-कायदा नेटवर्क को खत्म करने की रणनीति अपनाई।

उधर, पाकिस्तान पहुंचकर जिहादी ओसामा बिन लादेन कई साल अलग-अलग ठिकानों में छिपा रहा। अंततः वह पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में एक ऊंची दीवारों से घिरे एक संदिग्ध मकान में अपने परिवार के साथ छिपा हुआ पाया गया था। वहां वह बेहद गोपनीय जीवन व्यतीत कर रहा था, जैसे बाहर न निकलना, बच्चों को स्कूल न भेजना और पड़ोसियों से संपर्क न रखना।

तोरा—बोरा पहाड़ियों में एक सुरंग में लादेन के अड्डे में भरा मिला था गोला-बारूद (File Photo)

2 मई 2011 को अमेरिकी नौसेना के विशेष बलों, ‘नेवी सील्स’ ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को भनक लगने दिए बिना एबटाबाद में ऑपरेशन चलाकर ओसामा को मार गिराया। यह वही जिहादी था जिसने न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले बोलकर लगभग 3,000 निर्दोष लोगों की जान ली थी।

जॉन किरियाकू का यह खुलासा अमेरिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उस समय की खुफिया चूक का पता चलता है। यदि अमेरिकी सेना को यह समझ होती कि उसका अनुवादक उसी जिहादी संगठन का सदस्य है, तो संभवतः इतिहास कुछ और ही होता। यह बात यह भी जताती है कि वह आतंकवादी संगठन न केवल हथियारों से, बल्कि दिमाग और छल से भी अपने सबसे बड़े दुश्मनों को मात देने में सक्षम था।

पूर्व सीआई अधिकारी किरियाकू के खुलासे ने ओसामा बिन लादेन के फरार होने की कहानी को एक नया मोड़ दिया है। इससे सामने आया है कि अमेरिकी तकनीकी ताकत और बमबारी के बावजूद, वह चालाकी और परिस्थितियों का फायदा उठाकर भागने में सफल हुआ। बुर्का ओढ़कर उसका पाकिस्तान पहुंचना बताता है कि अल-कायदा सरगना ने अपनी जान बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने की तैयारी कर रखी थी। इस घटना ने युद्ध और खुफिया अभियानों के इतिहास में एक ऐसी कड़ी जोड़ दी है, जो बताती है कि युद्ध में केवल हथियार नहीं, बल्कि छल—कपट की रणनीति भी निर्णायक भूमिका निभाती है।

Topics: ओसामा बिन लादेनसीआईएosama bi ladenjohn kiriyakouअमेरिकाAmericaterrorismciaal quedaअल-कायदा
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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