क्या छोटे बच्चों को रोने पर मोबाइल देना उचित है?
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होम जीवनशैली

क्या छोटे बच्चों को रोने पर मोबाइल देना उचित है?

घर के काम और व्यस्त जीवनशैली के कारण उन्हें बच्चों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। इस वजह से बच्चे मोबाइल या टीवी की ओर आकर्षित हो जाते हैं। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि इतने छोटे बच्चों को फोन देना उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Oct 23, 2025, 02:13 pm IST
in जीवनशैली
प्रेमानंद जी महाराज

प्रेमानंद जी महाराज

आजकल के समय में छोटे बच्चे, विशेषकर डेढ़ साल के, अक्सर माता-पिता की मस्ती या व्यस्तता के कारण मोबाइल या फोन के सामने समय बिताने लगते हैं। घर के काम और व्यस्त जीवनशैली के कारण उन्हें बच्चों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। इस वजह से बच्चे मोबाइल या टीवी की ओर आकर्षित हो जाते हैं। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि इतने छोटे बच्चों को फोन देना उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी ने भी कहा है कि 35 साल पहले की जीवनशैली अब जैसी नहीं है। पहले जॉइंट फैमिली का प्रचलन था, जहां बच्चे दादी, नानी या अन्य बुजुर्गों की देखभाल में बड़े होते थे। परिवार के बड़े सदस्य बच्चों की सेवा और सुरक्षा का ध्यान रखते थे। बच्चे अपने परिवार के प्यार और संस्कारों के बीच बड़े होते थे। उस समय मोबाइल या अन्य डिजिटल चीजें बच्चों के जीवन में इतनी प्रवेश नहीं करती थींऔर वे प्राकृतिक और सरल जीवन जीते थे। आज की पीढ़ी में मोबाइल और डिजिटल गैजेट्स का अत्यधिक प्रयोग बच्चों में अनुशासन की कमी, ध्यानभंग और मानसिक असंतुलन पैदा कर सकता है। बच्चे सुबह उठकर माता-पिता के चरण स्पर्श, भगवान का स्मरण और भजन-पूजा जैसी परंपराओं से दूर हो रहे हैं। 9 बजे तक सोना, मोबाइल में लगे रहना और धार्मिक या नैतिक शिक्षा से वंचित रहना बच्चों के चरित्र और संस्कार पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

यह भी पढ़ें- कर्म से भाग्य बनता है या भाग्य से कर्म?

इसलिए छोटे बच्चों को मोबाइल या डिजिटल स्क्रीन देने से बचाना चाहिए। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के साथ समय बिताएं, उन्हें खेल, बातचीत और नैतिक शिक्षा के माध्यम से संस्कारित करें। बच्चों को सिखाना चाहिए कि सुबह उठकर अपने माता-पिता के चरण स्पर्श करें, भगवान का स्मरण करें और दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखें। यही सरल, प्राकृतिक और संतुलित जीवन बच्चों के लिए सबसे अच्छा है। अतः, मोबाइल और डिजिटल चीज़ों का अत्यधिक उपयोग छोटे बच्चों के लिए हानिकारक है। हमें अपने बच्चों को प्यार, ध्यान और सही संस्कार देने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि वे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकें।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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