दीपावली की शुभकामनाएं भी अब ‘इंग्लिश’ में क्या? पढ़ना बदलते दौर की कहानी
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दीपावली की शुभकामनाएं भी अब ‘इंग्लिश’ में क्या? पढ़ना बदलते दौर की कहानी

कभी-कभी लगता है, निजी भावनाओं का भी ग्लोबलाइजेशन हो गया है। पहले, दीप मीठे तेल में डूबी बत्ती के जलते सिरे के माध्यम से उत्सव की खुशी की टिमटिमाती रोशनी फैलाते थे, लेकिन अब वे विभिन्न प्रकार की सुगंधों वाले मोम के साथ अपनी "खुशी" का प्रदर्शन करते हैं।

Written byराजकुमार जैनराजकुमार जैन — edited by Shivam Dixit
Oct 21, 2025, 10:29 pm IST
inभारत

कभी-कभी लगता है, निजी भावनाओं का भी ग्लोबलाइजेशन हो गया है। पहले, दीप मीठे तेल में डूबी बत्ती के जलते सिरे के माध्यम से उत्सव की खुशी की टिमटिमाती रोशनी फैलाते थे, लेकिन अब वे विभिन्न प्रकार की सुगंधों वाले मोम के साथ अपनी “खुशी” का प्रदर्शन करते हैं। पहले दिवाली घर पर प्रियजनों के साथ मनाई जाती थी, अब वीडियो कॉल पर दूर से ही जोर-जोर से “हैप्पी दिवाली!” कहा जाता है। यह देखकर मेरे मन में एक प्रश्न सुलगता नहीं सिसकता है, क्या सचमुच यह वही भारत है जहाँ लोग बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर, साथियों के गले मिलकर, अजनबियों के सामने भी हाथ जोड़कर “दीवाली की राम राम” या “शुभ दीपावली” कहा करते थे। वह शब्द, जिनमें प्रेम था, आशीर्वाद था, अपनापन था। अब वही देश “हैप्पी दीवाली” कहकर आधुनिक होने के गर्व से फूला नहीं समाता।

शुभ से हैप्पी तक: दीपावली का अंग्रेजीकरण

इन नवसाक्षर विद्वानों से पूछिए, क्या दीवाली अंग्रेजों के आने के बाद ही हैप्पी हुई थी? क्या उससे पहले जब अंग्रेज और उनकी अंग्रेजी दोनों ही हमारे किए अज्ञात थे तब क्या हम सब अनहैप्पी, अविकसित और अशिक्षित थे , क्योंकि उस समय हमें तो “हैप्पी” शब्द का उच्चारण भी नहीं आता था? हैप्पी’ का पहला चिराग अंग्रेज जब आए, तो रेल लाए, तोप लाए, चाय लाए, कानून लाए और साथ में ‘हैप्पी’ भी लाए। उन्होंने कहा, “यूं इंडियंस हैव लॉट ऑफ फेस्टिवल्स बट वेयर इज योर हैप्पीनेस ?”और हम लज्जित होकर नतमस्तक हो गए , “सॉरी सर, अभी लाते हैं हैप्पीनेस।” बस, उसी दिन से दीवाली शुभ से हैप्पी हो गई। वो दिन है और आज का दिन, अब हर गली, हर अख़बार, हर मोबाइल पर एक ही मंत्र गूंजता है, “हैप्पी दीवाली टू यू।” जैसे “शुभ दीपावली” कोई लोकल ट्रेन पकड़ना हो, और “हैप्पी दीवाली” हवाई जहाज में सफर करना।

घर-घर में ‘हैप्पी होने का स्कूल’ अब हर माँ एक शिक्षिका है, और हर बच्चा एक प्रोजेक्ट। “बेटा, दीवाली पर अंकल को क्या कहोगे?” बेटा बोला चरण स्पर्श करूंगा और “शुभ दीपावली” कहूंगा। नालायक! जस्ट शेक हैंड एंड से “हैप्पी दीवाली!” बच्चा ऐसे ही बोलता है, और पूरा परिवार हैप्पीनेस से ओवरफ्लो हो जाता है। मां सोचती है अब समाज में हमारी रिपयूट अपग्रेड हो गई। मंदिरों में भी हैप्पी’ की गूंज दीपावली के अवसर पर मंदिर परिसर दीवाली की राम राम से गूंजता था। लेकिन अब भक्त एक-दूसरे से कहते हैं , “हैप्पी दीवाली!” यह सुनकर भगवान भी मुस्कराते होंगे- “वाह रे मानव, कल को तो तू पूजा भी अंग्रेजी में करने लगेगा!” अगली बार शायद कहा जायेगा -“हैप्पी दीवाली टू यू लार्ड रामा!”

आजकल तो मजदूर भी हैप्पी दीवाली बोल रहा है, और रिक्शेवाला भी। उसे लगता है, अगर ज़ुबान अंग्रेजी हो जाए तो पेट की भूख भी कुछ क्लासी लगने लगेगी। आज अगर आप किसी को “शुभ दीपावली” कह दें, तो वह ऐसे देखता है जैसे आपने कोई मंत्रपाठ या धार्मिक उपदेश शुरू कर दिया हो। वो कहता है, अरे यार, जरा मॉडर्न बनो और हैप्पी हो जाओ ना। “शुभ” अब भावनाओं का नहीं, भाषाई पिछड़ेपन का प्रतीक बन गया है। “शुभ” में आशीर्वाद था, आत्मीयता थी। “हैप्पी” में रिंगटोन की टंकार है। “शुभ” आत्मा से जुड़ा था, “हैप्पी” नेटवर्क कनेक्शन से। “शुभ” रिश्ते जोड़ता था, “हैप्पी” रील्स पर लाइक्स बढ़ाता है।

‘हैप्पी’ का लोकतंत्र अब “हैप्पी” बोलना एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। कंपनी में बॉस को “हैप्पी दीवाली” न कहा तो इंक्रीमेंट अनहैप्पी। सोसाइटी में पड़ोसी को न कहा तो आप एंटी सोशल कहलाएंगे। अब तो राजनेता भी भाषण के अंत में कहते हैं- “हैप्पी दीवाली।” जैसे बिना अंग्रेज़ी के शुभकामना अवैध मानी जायेगी। “हैप्पी” अब एक करेन्सी है जो हर रिश्ते की वैल्यू तय करती है। “हैप्पी दीवाली” बोलिए, आपका स्टेटस बढ़ जाएगा। “शुभ दीपावली” बोलिए, और सब समझेंगे कि आप अशिक्षा की बस पकड़कर आए हैं।

‘हैप्पीवाली’ दीवाली अब यह त्योहार कम, इवेंट ज्यादा है। दिये अब तेल से नहीं, मोम की टी लाइट और एलईडी बल्बों से जलते हैं। शुभकामना संदेश अब भावनाओं से नहीं लिखे जाते, बने बनाए फॉरवर्ड किए जाते हैं। इंस्टाग्राम पर लोग दीवाली मनाते नहीं, पोस्ट करते हैं। त्यौहार की आत्मा अब इमोजी में सिमट गई है। ‘हैप्पी’ का अर्थशास्त्र मार्केटिंग के युग में “हैप्पी” न हो तो सेल नहीं लगती। “हैप्पी दीवाली ऑफर”, “हैप्पी दीवाली बोनस”, “हैप्पी बचत”, “हैप्पी लालच” हर व्यापारी अंग्रेजी में ही श्रद्धा व्यक्त करता है। “शुभ लाभ” की जगह अब “हैप्पी प्रॉफिट अनलिमिटेड” ने ले ली है। अब व्यापारी भी समझ चुका है “अंग्रेजी में बोले बिना ग्राहक हैप्पी नहीं होता है।”

भाषा नहीं, मानसिकता की गुलामी है ‘हैप्पी’ होने की आदत

‘हैप्पी’ होने की बीमारी यह सिर्फ भाषा का प्रश्न नहीं, सोच की बीमारी है। हमने अपनी संस्कृति को भाषाई वाशिंग मशीन में डाल दिया है। जिसमें धुलकर निकला हर शब्द फॉरेन फिनिशिंग में चमकता है। “धन्यवाद” से “थैंक यू”, “मित्र” से “फ्रेंड”, “शुभ दीपावली” से “हैप्पी दीवाली”, हर भाव को हमने वाश कर दिया है। अब हम अपनी ही जुबान बोलने में शर्मिंदगी महसूस करते हैं। हमें लगता है। यह मानसिक दासता का प्रतीक नहीं तो और क्या है? रामायण में ‘हैप्पी’? दीपावली का दीप बुझने से पहले सोचिए। जब प्रभु श्रीराम चौदह साल का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे, तो क्या जनता ने कहा था कि “वेल कम होम लॉर्ड श्रीराम, वी आर हैप्पी” नहीं! उन्होंने कहा था, “प्रभु श्रीराम पधारे हैं! दीपक जलाओ, दीवाली मनाओ!” वह दीपावली श्रद्धा और भक्ति की थी, ब्रांडिंग की नहीं। उस दीपक में आत्मा की लौ थी। तबसे लेकर अग्रेजों की गुलामी से पहले तक दीवाली में प्रेमपूर्ण रिश्तों की गर्माहट थी।

शुभ दीपावली- अपनी जड़ों से जुड़ने की एक छोटी-सी कोशिश

यह “हैप्पी” शब्द या अंग्रेजी भाषा के खिलाफ कोई आंदोलन नहीं है, यह तो उस षडयंत्र के खिलाफ आवाज है जो हमारे उत्सवों की आत्मा को विदेशी पैकेजिंग में बेचने लगा है। जिसकी नजर में दीवाली एक पर्व नहीं बिलियन डॉलर का बाजार है। कभी “शुभ दीपावली” या “दीवाली की राम राम” कह कर देखिए, कितनी आत्मीयता उतरती है मन के अंदर। उसमें आंगन की सोंधी सुगंध है, संस्कार की मिठास है। “हैप्पी दीवाली” में तो बस हवा है, वो भी ब्रिटिश ऑक्सीजन कंपनी की। और मैं… अब भी ‘शुभ’ हूँ, ‘हैप्पी’ नहीं जब कोई मुझसे कहता है, “हैप्पी दीवाली”, तो मेरे भीतर एक छोटा-सा दीया बुझ जाता है। मैं सोचता हूं, क्या हमारी भाषा इतनी ग़रीब हो गई कि हमें खुशी भी अंग्रेज़ों से उधार लेनी पड़ रही है? क्या “शुभ” कहना अब एक्सटिंक्ट हो गया है? शायद हां या शायद नहीं। शुभ तो शाश्वत है, “हैप्पी” बस एक सीज़नल सेल है। इस दीवाली मैं प्रार्थना करता हूं “हे प्रभु, मुझे इतना साहस देना कि मैं अब भी आपको शुभ दीपावली कह सकूं।” क्योंकि मैं “हैप्पी-हिप्पी” नहीं, एक भारतीय हूं।

Topics: Shubh DeepawaliAnglicization of DiwaliSlavery of LanguageEconomics of DiwaliIndian Culturehappy diwali
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