कहा जाता है कि नेतृत्व एक ऐसी शक्ति है, जो भविष्य की नींव रखती है और आने वाले युग की दिशा तय करती है। इसी सोच को सच कर दिखाया है सोनालीका ट्रैक्टर्स के संस्थापक एवं चेयरमैन एल. डी. मित्तल ने। उन्होंने अपने एक दूरदर्शी विचार को अद्भुत भारतीय तथा वैश्विक विरासत में बदल दिया। यह एक कंपनी की सफलता से कहीं बढ़ कर, मिट्टी से जुड़ी उस यात्रा की कहानी है, जिसने किसानों और राष्ट्रनिर्माण दोनों को ही ताकत दी। आज भारत से सोनालीका के ट्रैक्टर सबसे अधिक निर्यात होते हैं, ये 150 से अधिक देशों में जाते हैं। सोनालीका आज देश का तीसरा सबसे बड़ा ट्रैक्टर ब्रांड है।
सोनालीका का जन्म पंजाब के गैर-औद्योगिक क्षेत्र होशियारपुर की मिट्टी में हुआ, जहां से भारत में एक विश्वसनीय ट्रैक्टर ब्रांड बनने का सफर शुरू हुआ। श्री मित्तल का विश्वास हमेशा तीन सिद्धांतों पर आधारित रहा-ग्राहक सर्वोपरि, गुणवत्ता से समझौता नहीं और कारोबार में नैतिकता। उन्होंने छोटे रास्ते को अपनाने के बजाय आत्मनिर्भरता को चुना। वे कहते हैं, “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। सपने तभी पूरे होते हैं, जब इंसान खुद पर और अपने उद्देश्य पर विश्वास रखता है।”
सोनालीका की सबसे बड़ी ताकत रही है उसकी किसान-केंद्रित सोच। थ्रेशर निर्माण से आरंभ हुए इस सफर ने किसानों की मांग पर 1996 में ट्रैक्टर निर्माण का विस्तार किया। कंपनी ने ग्राहक को हर सुविधा प्रदान करने हेतु इंजन, गियरबॉक्स, ट्रांसमिशन और तकनीक स्वयं विकसित की। इस आत्मविश्वास का ही परिणाम है होशियारपुर में विश्व के सबसे बड़े एकीकृत ट्रैक्टर प्लांट की स्थापना।
रोबोट और ऑटोमेशन से लैस यह प्लांट आज हर दो मिनट में एक हैवी ड्यूटी ट्रैक्टर बनाता है और 20-120 एच.पी. में सबसे बड़े हैवी ड्यूटी ट्रेक्टर रेंज बनाने में सक्षम है। खेती एवं मिट्टी की जरूरत के अनुसार ट्रैक्टर बनाने की अपनी खासियत के कारण यह ब्रांड 17 लाख से अधिक किसानों का विश्वास बना हुआ है। आज सोनालीका में लगभग 10,000 लोग काम करते हैं। सोनालीका परिवार ने कोविड-19 के कठिन समय का बहुत ही धैर्य के साथ सामना किया। उसके अलावा कंपनी पर ऐसी कोई बड़ी समस्या नहीं आई।
सोनालीका का उद्देश्य किसानों की उन्नति और कृषि के विकास में योगदान देना है। इसी सोच के साथ कंपनी आगे बढ़ रही है और अपना काम विश्वास और जिम्मेदारी के साथ कर रही है। इस भावना को श्री मित्तल इन शब्दों में व्यक्त करते हैं, “मेरा सफर तभी सफल होगा, जब एक किसान का बेटा गर्व से कहेगा–मैं भी किसान बनूंगा।”
















