अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई महीनों से दुनिया भर के नेताओं से नोबुल अवार्ड कमेटी पर दबाव डलवाते आ रहे थे कि शांति का नोबुल उन्हें दिया जाना चाहिए। कई देशों के नेताओं ने कमेटी को यह प्रस्ताव भेजा भी। लेकिन आखिरकार कल वेनेजुएला की नेता मारिया मचाडो को शांति का नोबुल दे दिया गया। इस पर व्हाइट हाउस का बिफरना स्वाभाविक भी था। आखिर इतनी लॉबिंग बेअसर जो रही थी। व्हाइट हाउस ने फौरन बयान जारी करके ट्रंप को नोबुल न दिए जाने की आलोचना कर दी। लेकिन बाद में ट्रंप को ख्याल आया कि ऐसा करके कहीं ‘…बिल्ली खंभा नोंचे’ जैसी बात न उठे सो आनन—फानन में मारिया से फोन पर हुई बात का खुलासा किया और फिर पत्रकारों को इसकी जानकारी दी।
पहले बात व्हाइट हाउस के बयान की। इस बयान में कहा गया है कि नोबुल कमेटी ने ‘शांति के बजाय राजनीति’ को चुना है। व्हाइट हाउस ने ट्रम्प की बजाय वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता को शांति पुरस्कार देने के फैसले की भर्त्सना की। जैसा पहले बताया, ट्रंप ने इस पुरस्कार के लिए अपनी जोरदार पैरवी करवाई थी और अंतरराष्ट्रीय युद्धविराम समझौतों में अपनी भूमिका का बखान किया था।
फिर देर शाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि नोबुल पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने उन्हें फोन करके कहा कि उन्होंने उनके सम्मान में पुरस्कार स्वीकार कर लिया है।

इधर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “राष्ट्रपति ट्रम्प शांति समझौते करते रहेंगे, युद्ध समाप्त करते रहेंगे और जानें बचाते रहेंगे। उनका दिल एक मानवतावादी है, उनके जैसा कोई नहीं होगा जो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर पहाड़ों तक को हिला सके।”
देर शाम ट्रंप ने अपने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से यह भी कहा, “जिन महिला को वास्तव में नोबुल पुरस्कार मिला है, उन्होंने मुझे फोन किया और कहा, ‘मैं आपके सम्मान में इसे स्वीकार कर रहा हूं, क्योंकि इसके हकदार वास्तव में तो आप थे।’ ट्रंप बोले, “यह बहुत अच्छी बात है। मैंने यह नहीं कहा, ‘तो इसे मुझे दे दो,’ हालांकि मुझे लगता है कि वह ऐसा कह सकती थीं। वह बहुत अच्छी हैं।”
नॉर्वे की नोबुल कमेटी ने मारिया मचाडो को यह वार्षिक पुरस्कार “स्वतंत्रता के साहसी रक्षक, जो उठ खड़े हुए और सत्तावादी नेतृत्व का विरोध किया”, का संदर्भ देते हुए प्रदान किया।
ट्रंप ने इस पुरस्कार कार्यक्रम से ठीक पहले भी स्वप्रचार किया था और इसी हफ्ते गाज़ा युद्ध समाप्त करने के लिए युद्धविराम और बंधक समझौते की घोषणा की थी। ट्रंप का कहना है कि पदभार ग्रहण करने के बाद से उन्होंने ‘आठ युद्ध समाप्त कराए हैं और वही शांति पुरस्कार के हकदार हैं। हालांकि हाल ही में उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाएगा। यानी उन्हें कुछ भनक तो लग चुकी थी कि उनका नाम नहीं है।
पिछले महीने ही शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारियों से बातचीत में उनसे जब पूछा गया कि “क्या आपको नोबुल पुरस्कार मिलेगा?” तो उन्होंने कहा—बिल्कुल नहीं। वे इसे किसी ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने कुछ भी नहीं किया। कहा कि अगर उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला तो यह संयुक्त राज्य अमेरिका का ‘बड़ा अपमान’ होगा। लेकिन अब पत्रकारों के सामने ट्रंप ने कहा, ‘हम आज मारिया कोरिना मचाडो को दिए गए 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार से बहुत प्रसन्न हैं।’
ट्रम्प ने पत्रकार वार्ता में यह स्वीकार किया कि कमेटी का निर्णय व्यवहारिक रूप से 2024 पर केंद्रित था, जब वह राष्ट्रपति पद के लिए प्रचार कर रहे थे। लेकिन उन्होंने सुझाव दिया कि शांति के क्षेत्र में उनका योगदान इतना बड़ा था कि उन्हें यह पुरस्कार दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, “मैं 2024 में चुनाव लड़ रहा था। लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि हमने इतना कुछ किया कि उन्हें यह करना चाहिए था।”
बेशक, नोबुल शांति पुरस्कार पाने की ट्रंप की महत्वाकांक्षा जगजाहिर है और अमेरिका के साथ राजनयिक हितों को आगे बढ़ाने के इच्छुक नेताओं के बीच इस पुरस्कार के लिए उनके नाम का उल्लेख आम हो गया था। इस्राएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित कई विदेशी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से तर्क दिया है कि ट्रम्प ही इस प्रतिष्ठित सम्मान के हकदार हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि ट्रम्प जटिल संकटों को हल करने के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं।
उधर मचाडो ने खुद अपनी जीत के बाद एक्स पर ट्रम्प की प्रशंसा करते हुए लिखा है, “मैं यह पुरस्कार वेनेज़ुएला के पीड़ित लोगों और हमारे उद्देश्य के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प के निर्णायक समर्थन को समर्पित करती हूं!” ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफार्म पर मचाडो के इस संदेश को साझा भी किया।
बता दें कि नोबुल कमेटी नामांकित व्यक्तियों की सूची को छोटा करने के लिए फरवरी और सितंबर के बीच बैठक करती है। मार्को रुबियो, जो अब ट्रंप के विदेश मंत्री हैं, उन कांग्रेस सदस्यों में शामिल थे जिन्होंने अगस्त 2024 में मचाडो को इस पुरस्कार के लिए नामित किया था, जबकि वह तब भी अमेरिकी सीनेटर थे।
कह सकते हैं कि ट्रंप की दखल से हुआ इस्राएल—हमास युद्धविराम समझौता एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन यह अभी भी अपने प्रारंभिक चरण में है। अपने इस दूसरे कार्यकाल में, ट्रंप ने “अमेरिका-प्रथम” नीति अपनाई है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक मंच पर अपनी स्थिति को बहुत ज्यादा बदल दिया है।
नोबुल कमेटी की वेबसाइट के अनुसार, यह कमेटी उन नेताओं को शांति पुरस्कार प्रदान करती है जो “हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण, शांति वार्ता, लोकतंत्र और मानवाधिकारों तथा एक बेहतर संगठित एवं अधिक शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण के उद्देश्य से कार्य” का समर्थन करते हैं।
उल्लेखनीय है कि अब तक चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों को नोबुल शांति पुरस्कार मिला है—थियोदोर रूजवेल्ट, वुडरो विल्सन, जिमी कार्टर और बराक ओबामा। केवल ओबामा ने ही पद पर रहते हुए यह पुरस्कार जीता था। उनके लिए अब ट्रंप का कहना है कि ओबामा को तो बिना कुछ किए ही यह सम्मान दे दिया गया था।

















