गत 5 अक्तूबर को हल्द्वानी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर ‘शताब्दी शंखनाद’ का आयोजन किया गया। स्वयंसेवकों ने बांसुरी वादन के साथ कुमाऊंनी लोक गीत ‘दैणा होया खोली का गणेशा हे…’ की मधुर ध्वनि पर योग और आसन का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री आलोक कुमार ने कहा कि 100 वर्ष के दौरान हम क्या कर पाए और क्या नहीं, उसे छोड़कर जो काम अभी अधूरे हैं, आगे उन्हें पूरा करने का संकल्प लिया गया है। जैसा समाज होना चाहिए, अभी वैसा नहीं बन पाया है।
हिंदू समाज में अभी भी कई सारी कुरीतियां हैं, लोगों में आज जैसी जागरूकता होनी चाहिए, वैसी नहीं है। समाज को संगठित करने, सेवा और स्वावलंबन आदि विभिन्न पहलुओं को देखते हुए पंच परिवर्तन के बिंदु बनाए गए। इसमें कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण और नागरिक कर्तव्य बोध शामिल हैं।
पंच परिवर्तन के विषय को लेकर संघ अभी 5.25 लाख परिवारों तक पहुंचा है, लेकिन आगामी वर्षों में प्रत्येक घर तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि हम परम वैभव की ओर बढ़ रहे हैं और इसमें समाज के प्रत्येक नागरिक का योगदान रहने वाला है। इस अवसर पर अनेक वरिष्ठ जन उपस्थित थे।
















