बिहार विधानसभा चुनाव 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए बिगुल बज चुका है। चुनाव आय़ोग के द्वारा राज्य की 243 सीटों के लिए तारीखों के ऐलान के बाद सियासी पार्टियां अपना पूरा दमखम लगा रही हैं। इस बीच एक सर्वे में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है। सत्ता में बैठा एनडीए ‘विकसित बिहार’ का नारा बुलंद कर रहा है। उनका कहना है कि नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार ‘जंगल राज’ से निकलकर 2047 के विकसित भारत के सपने की ओर बढ़ रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने एक बयान में कहा कि एनडीए ने बिहार को जंगलराज से बचाकर विकास और अच्छे शासन की राह दिखाई।
बिहार में चुनाव की तारीखों का ऐलान
चुनाव आयोग ने सोमवार को ऐलान कर दिया कि बिहार की 243 सीटों पर वोटिंग दो चरणों में होगी – 6 और 11 नवंबर को। गिनती 14 नवंबर को, क्योंकि मौजूदा विधानसभा का टर्म 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। अभी एनडीए के पास 129 विधायक हैं, जो बहुमत के 122 से ज्यादा है। विपक्ष के पास 112 हैं। 2020 में एनडीए को 125 सीटें मिली थीं, महागठबंधन को 110।
सर्वे में एनडीए को लीड
मेट्राइज ओपिनियन पोल के लेटेस्ट सर्वे से अच्छी खबर एनडीए के लिए निकल कर सामने आ रही है। जिसमें गठबंधन को 49% वोट शेयर के साथ 150 से 160 सीटें आने की उम्मीद जताई गई है। वहीं, महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वाम दल) को 36% वोट और 70 से 85 सीटें मिल सकती हैं।
इसे भी पढ़ें: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 : पहले 121 और दूसरे चरण में 122 सीटों पर होगा मतदान, जानिए आपके यहाँ कब पड़ेंगे वोट
मोदी-नीतीश की जोड़ी
पीएम मोदी की पॉपुलैरिटी और केंद्र की स्कीम्स-प्रोजेक्ट्स, नीतीश की ‘सुशासन बाबू’ वाली इमेज को परफेक्ट बैलेंस दे रही हैं। नीतीश नौ बार सीएम रह चुके हैं, खासकर अति पिछड़े वर्ग (ओबीसी) में उनकी पकड़ जबरदस्त है। हाल में ओबीसी को 27% आरक्षण बढ़ाने की कोशिश और लोकल बॉडीज में महिलाओं के लिए कोटा एक्सटेंड करना उनके सपोर्ट को और सॉलिड कर रहा है।
रणनीति में मोदी का फेस, शाह का मैनेजमेंट
कहा जा रहा है कि एनडीए की पूरी स्ट्रैटेजी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के चेहरे पर टिकी है। इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह का चुनावी कंट्रोल कमाल का है। जल्द ही सीटों का फाइनल ऐलान हो सकता है। हालांकि, एनडीए की राह में कांटे भी हैं। इंटरनल रिपोर्ट्स कहती हैं कि मौजूदा विधायकों से जनता नाराज है, इसलिए कई सीटों पर नए चेहरे ला रहे हैं। इससे कुछ जगह बगावत की हलचल है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर महागठबंधन जाति समीकरण साध ले, तो मुकाबला टाइट हो सकता है।
















