उत्तराखंड ब्यूरो । बद्रीनाथ धाम, आज भगवान बद्री विशाल की नगरी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर पथ संचलन का आयोजन हुआ। संघ के शताब्दी वर्ष में यह पहला पथ संचलन कार्यक्रम काफी हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। यह दृश्य देखने लायक था।
पथ संचलन का महत्व
पथ संचलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इसमें स्वयंसेवक शारीरिक अनुशासन, एकता और सामूहिकता का प्रदर्शन करते हैं। यह आयोजन संघ की विचारधारा और मूल्यों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को जगाने के मकसद से किया जाता है।
स्वयंसेवकों की पारंपरिक पोशाक और प्रदर्शन
पथ संचलन में शामिल स्वयंसेवक परंपरागत भारतीय पोशाक में सजे हुए होते हैं और मार्च करते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। इस दौरान वे संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं।
समाज में एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश
संघ के पथ संचलन का मकसद समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार करना है। इस अवसर पर शरद पूर्णिमा का पर्व भी था, जिसने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया। पूरा वातावरण “नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमे” से गूंज उठा।
संघ के 100 वर्ष का ऐतिहासिक सफर
संघ के 100 वर्ष का यह सफर ऐतिहासिक यात्रा से कम नहीं है। यह प्रत्येक भारतीय को एकता का पाठ और हिन्दुत्व के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। हमें संघ के आदर्शों पर चलना चाहिए और देश प्रेम को सर्वोपरि मानना चाहिए। देश की सुरक्षा में अपने आप को समर्पित करने में किसी को संकोच नहीं करना चाहिए।
बद्रीनाथ में प्रमुख उपस्थितियां
आज के इस खास अवसर पर उत्तराखंड के प्रांत प्रचारक डा. शैलेन्द्र का पाथेय प्राप्त हुआ। गरिमामय उपस्थित विभाग प्रचारक मनोज, महात्मा अमित दास, जिला प्रचारक मिथिलेश और अतुल शाह सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की उपस्थिति ने बद्रीनाथ का दृश्य देखने लायक बना दिया।
















