सागर में राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग का सख्त रुख : हिंदू पलायन पर प्रशासन से जवाब तलब, लापरवाही पर दी चेतावनी
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सागर में राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग का सख्त रुख : हिंदू पलायन पर प्रशासन से जवाब तलब, लापरवाही पर दी चेतावनी

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सागर में हिंदू पलायन, अवैध मांस दुकानों और प्रशासनिक लापरवाही पर अधिकारियों को फटकार लगाई।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Oct 6, 2025, 01:28 am IST
in भारत, मध्य प्रदेश
Priyank Kanoongo in Sagar inspecting human rights issues

सागर । मध्‍य प्रदेश के सागर शहर के शुक्रवारी और शनीचरी वार्ड में बढ़ते हिन्‍दू पलायन, अवैध मांस दुकानों, धार्मिक असहिष्णुता और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार जैसे गंभीर मामलों को लेकर रविवार को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सागर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उनके दौरे ने प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी, क्योंकि मौके पर उपस्थित अधिकारी न तो स्पष्ट जवाब दे पाए और न ही अपने दायित्वों पर कोई ठोस सफाई दे सके। कानूनगो ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर मानव अधिकारों का उल्लंघन हुआ, तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

स्थानीय लोगों से संवाद, शिकायतों की गंभीरता पर नाराजगी

प्रियंक कानूनगो ने सबसे पहले प्रभावित क्षेत्रों में जाकर स्थानीय निवासियों से मुलाकात की। नागरिकों ने बताया कि कुछ समय से इलाके में अवैध मांस की दुकानें खुल गई हैं, जिनसे न केवल स्वच्छता और स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है बल्कि धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाली घटनाएं भी सामने आ रही हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि जैन और हिंदू परिवारों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। महिलाओं पर छींटाकशी, धार्मिक मार्गों पर मांस के टुकड़े फेंकना और अवांछित तत्वों की धमकियां जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं।

कानूनगो ने मौके पर ही नगर निगम और पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा, लेकिन अधिकारी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए। स्थिति यह रही कि प्रशासनिक अधिकारी एक-दूसरे की ओर देख रहे थे और कोई भी ठोस कार्रवाई या जवाब प्रस्तुत नहीं कर पाया।

सभी नागरिक समान हैं, कानून का पालन भी जरूरी

आयोग के इस दौरे के दौरान प्रियंक कानूनगो ने कहा कि भारत के संविधान में सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं और मानव अधिकार आयोग का दायित्व है कि किसी के भी मौलिक अधिकारों का हनन न हो। उन्होंने कहा कि सागर जैसे शहर, जहां जैन समुदाय की बड़ी आबादी रहती है, वहां इस समुदाय की धार्मिक आस्थाओं का सम्मान अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “अगर उनके मंदिर जाने के रास्तों पर मांस, मछली या अंडों के अवशेष फेंके जा रहे हैं, तो यह न केवल धार्मिक भावना को आहत करने वाला कृत्य है, बल्कि मानव अधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में भी आता है।”

शहर की अधिकांश मांस की दुकानें अवैध – कानूनगो

दौरे के दौरान जब नगर निगम अधिकारियों से मांस दुकानों की अनुमति से जुड़ी जानकारी मांगी गई, तो सामने आया कि शुक्रवारी और शनीचरी वार्ड में एक भी दुकान के पास लाइसेंस नहीं है। यह तथ्य सुनकर प्रियंक कानूनगो ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बिना लाइसेंस मांस की दुकान चलाना नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने तत्काल निर्देश दिए कि ऐसी सभी दुकानों को बंद किया जाए और संबंधित अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि रहवासी इलाकों में चल रहे रेस्टोरेंट और होटलों की सूची तैयार कर उन पर कार्रवाई की जाए, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य और धार्मिक सौहार्द दोनों सुरक्षित रह सकें।

हिन्‍दू पलायन प्रशासनिक विफलता की निशानी

कानूनगो ने वार्डों में हो रहे पलायन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “पलायन किसी हथियार की नोक पर नहीं कराया जाता, बल्कि तब होता है जब जीवन की सामान्य परिस्थितियां असंभव हो जाती हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति के धार्मिक मार्ग पर मांस के टुकड़े फेंके जा रहे हैं, उसकी धार्मिक आस्था को बार-बार अपमानित किया जा रहा है, तो वह अपने घर से निकलने में भय क्यों न महसूस करेगा? उन्होंने इसे मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में रखते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

अवैध मदरसों और बाहरी तत्वों की जांच के निर्देश

इसके साथ ही प्रियंक कानूनगो ने सागर में अवैध मदरसों और मस्जिदों में बाहरी व्यक्तियों की गतिविधियों की जांच के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि “किसी भी धार्मिक स्थल को अवैध गतिविधियों का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा।” उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि नियत सीमा से अधिक लगाए गए लाउडस्पीकरों को तत्काल हटाया जाए, ताकि सार्वजनिक शांति बनी रहे।

रात में गश्त और असामाजिक तत्वों पर सख्ती के निर्देश

वार्ड वासियों की शिकायतों पर उन्होंने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए कि रात में घूमने वाले असामाजिक युवकों, पटाखे फोड़ने और वाहनों में बैठकर अभद्रता करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि “कानून का भय तभी बनेगा जब अपराधियों को संरक्षण नहीं मिलेगा।” उन्होंने ऐसे वाहनों के परमिट निरस्त करने के भी निर्देश दिए जिनका उपयोग सामाजिक शांति भंग करने में किया जा रहा है।

पलायन समाधान नहीं– बाल आयोग के पूर्व सदस्य

राज्य बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य ओंकार सिंह ने भी इस मौके पर कहा कि नागरिक अपनी शिकायतें लिखित रूप में प्रस्तुत करें ताकि कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि “पलायन किसी समस्या का हल नहीं है, बल्कि यह सामाजिक विफलता की ओर इशारा करता है। यदि क्षेत्रवासी एकजुट होकर शिकायत दर्ज कराएंगे, तो प्रशासन को जवाबदेह बनाना आसान होगा।”

अधिकारियों पर सख्त नजर

दौरे के दौरान प्रियंक कानूनगो और ओंकार सिंह के साथ जिले के कई प्रशासनिक अधिकारी, बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य मौजूद रहे। प्रमुख रूप से अभिषेक रजक, प्रशांत जैन, विकास सेन, मदन घोषी, सचिन यादव, एड. राजेन्द्र नामदेव एड. जितेन्द्र साहू, अशोक जैन, प्रदीप यादव, जितेन्द्र यादव, अर्पित पांडे, नीरज तिवारी, कपिल स्वामी, कौशल यादव, बबीता राजपूत, शिवम पांडे, शुभम शुक्ला, योगेन्द्र स्वामी, किशोर न्याय बोर्ड सदस्य वंदना तोमर, चंद्रप्रकाश शुक्ला, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष किरण शर्मा, सदस्य अनीता राजपूत, सुरेन्द्र सेन, अनिल रैकवार, भगवत शरण बनवारिया सहित जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।

लेकिन जब वास्तविक स्थिति सामने आई, तो कई अधिकारी निरुत्‍तर दिखे। कानूनगो ने स्पष्ट कहा कि “मानव अधिकारों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर सीधी जिम्मेदारी तय होगी और वे किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे।”

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