केरल में मल्लपुरम में जमात ए इस्लामी के संस्थापक अब्दुल अल मौदूदी के राजनीतिक विचारों पर एक चर्चा के आयोजन ने केरल कांग्रेस को चिंता में डाल दिया है। अब्दुल अल मौदूदी ने वर्ष 1941 में राजनीतिक इस्लामिक आंदोलन जमात ए इस्लामी की शुरुआत की थी। इस संगठन की स्थापना पूरे भारतीय उप महाद्वीप में इस्लामिक मूल्यों और निर्देशों को फैलाने के लिए की गई थी।
विभाजन के बाद पाकिस्तान भागा मौदूदी
विभाजन के बाद अब्दुल अल मौदूदी पाकिस्तान चला गया और यह आंदोलन कई हिस्सों में बंट गया, जैसे जमात-ए-इस्लामी हिन्द और जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान। जब भारत के विभाजन की बात आरंभ हुई थी, तो शुरू में जमात ने इस विभाजन का विरोध किया था, मगर बाद में मौदूदी और उसके समर्थकों ने पाकिस्तान को एक इस्लामिक राज्य के रूप में समर्थन करना आरंभ कर दिया था।
मौदूदी के राजनीतिक विचारों को लेकर भारत में असहजता है, इतनी असहजता कि जमात जिस कांग्रेस की पूर्व में साथी रह चुकी है, वह भी इन विचारों से सहमत नहीं है। हालांकि, जमात –ए- इस्लामी हिन्द, अपनी राजनीतिक शाखा वेल्फेयर पार्टी ऑफ इंडिया के माध्यम से कॉंग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के साथ केरल में जुड़ी हुई है और इसे लेकर यूडीएफ पर यह भी आरोप लगते हैं कि वह कट्टरपंथी सोच का साथ दे रही है। वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया ने खुलकर यूडीएफ को वर्ष 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में इस आधार पर समर्थन दिया था कि वह राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी को पराजित करेगी। और यह समर्थन निलंबूर उपचुनावों में भी दिया गया था, जो वर्ष 2025 में हुए थे।
केरल में मौदूदी के राजनीतिक विचारों पर कार्यक्रम
अब जमात की यूथ विंग सालिडैरीटी यूथ मूवमेंट द्वारा 3 अक्टूबर को जमात के संस्थापक अब्दुल मौदूदी और शेख करदावी के राजनीतिक विचारों पर एक कार्यक्रम का आयोजन का समाचार था। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सालिडैरीटी यूथ मूवमेंट की मल्लपुरम जिला समिति ‘Sayyid Maududi and Sheikh Qaradawi: Islamic political thought and development’ पर एक कार्यक्रम आयोजित कराने जा रही थी।
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कांग्रेस असहज क्यों?
मौदूदी ने राजनीतिक इस्लाम की अवधारणा को फैलाया था, जबकि मिस्र के इस्लामिक व्यक्ति यूसुफ अल करदावी का विश्वास मुस्लिम ब्रदरहुड में देखा गया था। कांग्रेस इस आयोजन को लेकर असहज थी, क्योंकि राज्य में दो चुनाव आने वाले हैं तो वह राजनीतिक असमंजस में है, क्योंकि यह वही विचारधारा है, जिसने भारत के विभाजन की नींव डाली थी।
मुस्लिम तुष्टिकरण करती है कांग्रेस
केरल में कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप रह-रह कर लगते रहते हैं। और ऐसा भी माना जाता है कि इस कारण प्रभावी हिंदू समूह जैसे एनएसएस और एसएनडीपी उससे दूरी बना रहे हैं। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार निलंबूर उपचुनावों में विपक्ष के नेता सतीशन ने यूडीएफ का जमात के साथ गठबंधन का यह कहते हुए बचाव किया था कि जमात राजनीतिक इस्लाम के विचारों को छोड़ चुका है। और इसके बाद ही मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने यह दावा किया था कि कांग्रेस जमात और उसके आदर्शों को रीपैकेज करने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस-यूडीएफ के विचार अब भी जमात का समर्थन वाले
मगर यह भी हैरानी की बात है कि जहां यूडीएफ अर्थात कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के नेता सतीशन यह दावा कर रहे थे कि जमात अपनी राजनीतिक इस्लाम की विचारधारा से बाहर आ चुकी है, तो उसी के कुछ महीने बाद ही जमात की यूथ विंग राजनीतिक इस्लाम पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है। यह भी ध्यान दिया जाए कि मल्लपुरम जिले का निर्माण भी जब वर्ष 1969 में लेफ्ट की सरकार द्वारा किया गया था, उस समय जनसंघ ने विरोध किया था। यह मुस्लिम जनसांख्यिकी के आधार पर बसाया गया था और जनसंघ ने यह कहते हुए विरोध किया था कि यह कदम इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को खुश करने के लिए उठाया गया था।
मापिलास्तान के सपने का विस्तार
यह किसी से छिपा हुआ नहीं है कि कैसे केरल में मापिला मुस्लिमों ने वर्ष 1921 में मालाबार हिंदुओं का कत्लेआम किया था और इसके साथ ही मापिलास्तान का सपना भी सच था। यह भी कहा जाता है कि यह सपना विभाजन के बाद भी मरा नहीं। और जनसंघ ने इसी के आधार पर इस जिले के निर्माण का विरोध किया था और यह आरोप लगाया था कि यह एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र का निर्माण करने की बड़ी योजना है।
हालांकि, वर्ष 2024 में सत्ताधारी एलडीएफ की ओर से यह कहा गया था कि कांग्रेस ने मल्लपुरम के निर्माण के समय जनसंघ के साथ मिलकर इसका विरोध किया था और कहा था कि हमें एक छोटे पाकिस्तान की जरूरत क्या है? और इस समय एलडीएफ जमात का और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का विरोध कर रही है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने हालांकि मौदूदी की विचारधारा से पल्ला झाड़ लिया है। उनका कहना है कि लीग का कोई भी संबंध जमात ए इस्लामी से नहीं है।
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जमात हालांकि मौदूदी को एक जनजागरण वाला नेता मानता है। और यह कार्यक्रम उनके विचारों को जनता तक ले जाने का कार्यक्रम है। सत्ताधारी गठबंधन के नेता के टी जमील का कहना है कि ये लोग संघ के अखंड भारत के विरोध में एक इस्लामिक मुल्क के विचार को फैलाना चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर मौदूदी का इरादा इस्लामिक सिद्धांत वाले मुल्क का निर्माण करना नहीं था, तो फिर उन्होनें पाकिस्तान जाना क्यों चुना? जमात मुस्लिम समाज में आईयूएमएल के माध्यम से इस विचार को डाल रही है और यूडीएफ इसका समर्थन कर रही है। अंत में जमात लीग को निगल जाएगी।
हालांकि, इस आयोजन के विषय में और जानकारी अभी सालिडैरीटी यूथ मूवमेंट के टी इस्माइल के पेज पर नहीं है, बस इस आयोजन का पोस्टर अवश्य साझा किया गया है।

















