क्या इको फ्रेंडली बकरीद नहीं मनाई जा सकती ? निरीह प्राणियों की कुर्बानी क्यों ?
June 18, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

क्या इको फ्रेंडली बकरीद नहीं मनाई जा सकती ? निरीह प्राणियों की कुर्बानी क्यों ?

चयनात्मक एक्टिविज़्म के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक आंदोलनों में अक्सर ऐसा देखा गया है कि - जिस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देना “सुरक्षित” हो, उसी पर आवाज़ ऊँची होती है।

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
May 28, 2026, 05:43 pm IST
in भारत, मत अभिमत
भोपाल में एक समिति ने इक्रोफ्रेंडली बकरा बनाया

भोपाल में एक समिति ने इक्रोफ्रेंडली बकरा बनाया

ये किस प्रकार के बुद्धिजीवी लोग हैं, जो निरीह प्राणियों की कुर्बानी पर मौन हो जाते हैं और उच्चतम न्यायालय की बात भी नहीं मानते। उच्चतम न्यायालय द्वारा खतरनाक कुत्तों को समाप्त करने की बात की जाती है, तो उसके विरुद्ध याचिकाओं पर याचिकाएं दायर की जाती हैं, और उच्चतम न्यायालय पर दवाब बनाने का अभ्यास किया जाता है।

अहिंसा की वकालत करने वाले कथित सेक्युलर भी मौन धारण कर लेते हैं, यह अत्यंत दुखद है। प्राणि (प्राणी) हित,जनहित और पर्यावरण हित की बात करने वाली नामी -गिरामी संस्थाएं और वो पेटा (PETA) संगठन के 20 लाख सदस्य ना जाने कहां गायब हो जाते हैं? महाशिवरात्रि, होली और दीपावली पर विलाप करने वाले बुद्धिजीवी लुप्त हो जाते हैं ?

बॉलीवुड के नायक और नायिकाओं का तो कहना ही क्या है? उन्होंने तो हिंदू सभ्यता और संस्कृति का उपहास बनाने का ठेका ही ले लिया है! हिंदुओं के त्योहारों के समय कैडबरी का विज्ञापन करते हुए कुछ मीठा हो जाए, कहने में कोई संकोच नहीं होता है, परंतु ऐसा ईद और बकरीद के समय, कहने में उन्हें संकोच होता है।

चयनात्मक विरोध क्यों

उल्लेखनीय है कि वीगन/इको-फ्रेंडली एक्टिविज़्म और “चयनात्मक विरोध” के सवाल पर अनेक लोग पर्यावरण, पशु-अधिकार, या क्रएल्टी वीगन/इको-फ्रेंडली एक्टिविज़्म और “चयनात्मक विरोध” का सवाल पर कई लोग पर्यावरण, पशु-अधिकार, या क्रूएल्टी -फ्री जीवन शैली की बात करते हैं—जैसे:- “वीगन फूड अपनाओ”
– “गाय/दूध/दही मत लो”
– “सेव डॉग–सेव एनिमल”

परंतु वे कभी-कभी कुछ खास कौमी अवसरों पर पशु-अधिकार की आवाज़ नहीं उठाते, जैसे बकरीद पर अथवा खुले स्थानों क्यों काटे जाये..!? यह विरोधाभास लोगों को स्वाभाविक रूप से प्रश्न पूछने पर मजबूर करता है।

चयनात्मक एक्टिविज़्म के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक आंदोलनों में अक्सर ऐसा देखा गया है कि – जिस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देना “सुरक्षित” हो, उसी पर आवाज़ ऊँची होती है। जहाँ प्रतिक्रिया देने से सामाजिक टकराव हो सकता है,राजनीतिक प्रतिक्रिया मिल सकती है,आरोप लग सकते हैं-वहाँ कई तथाकथित एक्टिविस्ट जानबूझकर चुप रहना चुनते हैं।

सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के फैसले

अब 2014 के बाद बकरीद पर कुर्बानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों का मुख्य आधार “मोहम्मद हनीफ कुरैशी बनाम बिहार राज्य” का ऐतिहासिक फैसला बना है। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि इस्लाम में बकरीद (ईद-उल-अजहा) के मौके पर गाय की कुर्बानी देना कोई अनिवार्य या मौलिक मजहबी प्रथा नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने माना है कि गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाले राज्य के कानून संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन नहीं करते हैं। यह भी अभिनिर्धारित किया कि किसी भी सार्वजनिक स्थल, सड़क, गली या खुले क्षेत्र में कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी,पशु वध केवल निर्दिष्ट और वैध बूचड़खानों में ही किया जाना चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने माना है कि पशुओं की सुरक्षा, साफ-सफाई और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकारों को कानून बनाने और पशु वध को नियंत्रित करने का पूरा अधिकार है। इस कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत, विभिन्न राज्य सरकारें (जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल) अपने स्थानीय कानूनों के अनुसार बकरीद पर गाय, बछड़े या ऊंट की कुर्बानी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाती हैं। सार्वजनिक स्थानों पर नियमों का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

उच्चतम न्यायालय का यह निर्णय पुनः तेजी से उभर कर तब आया,जब 13 मई को पश्चिम बंगाल की नई गठित शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बकरीद को देखते हुए पशुओं की कुर्बानी से जुड़ी अधिसूचना जारी की। इस अधिसूचना के जरिए हर साल होने वाली नागरिकों की परेशानी देखते हुए बकरीद के दौरान पशु वध को नियंत्रित करने के लिए कई नियम तय किए गए थे।

याचिकाकर्ताओं के तर्क खारिज

अधिसूचना के बाद विवाद होना शुरु हो गया। याचिकाएं कलकत्ता हाईकोर्ट में पहुंची। तर्क यह था कि यह आदेश धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करता है और मुस्लिम समुदाय की परंपराओं पर अनुचित प्रतिबंध लगाता है। हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं के तर्कों को खारिज कर दिया।

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि, ऐसा नहीं है कि सरकार की अधिसूचना कोई नया प्रतिबंध नहीं लगा रही है, बल्कि 2018 में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों को ही लागू करती है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध की अनुमति नहीं दी जा सकती। बिना स्वास्थ्य परीक्षण के पशु वध रोकना सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशु संरक्षण के लिए आवश्यक है।न्यायालय ने माना कि प्रशासन का दायित्व है,कि त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पालन हो।

धार्मिक आयोजनों को संवैधानिक व्यवस्था और राज्य के नियामक कानूनों के भीतर ही संचालित किया जाना चाहिए।अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक मामले मोहम्मद हनीफ कुरैशी बनाम बिहार राज्य का हवाला देते हुए कहा कि, गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य मजहबी अभ्यास नहीं मानी जा सकती।

भारत ने विश्व को अहिंसा का पाठ पढ़ाया

भारतीय सभ्यता और संस्कृति ने विश्व को अहिंसा का पाठ पढ़ाया है और जियो और जीने दो” (Live and Let Live) का नारा भगवान महावीर स्वामी द्वारा दिया गया था। वे जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। महावीर स्वामी ने अपने उपदेश में अहिंसा और जीव दया को महत्व दिया था। “जियो और जीने दो” का अर्थ है कि हर प्राणी को अपने जीवन जीने का अधिकार है, और हमें दूसरों को उनके जीवन जीने में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अतः यक्ष प्रश्न यही उठता है कि क्या निरीह पशुओं की कुर्बानी,
धार्मिक संस्कार हो सकता है?

संत कबीर ने भी मुखर होकर कहा कि,

कहत कबीर सुनो भई साधु –

“काटा कूटी जो करै, ते पाखंड को भेष,
निश्चय राम न जानहीं, कहैं कबीर संदेस।”

वहीं कुर्बानी और हलाल के बारे में कहते हैं कि,

“गाफिल गरब करैं अधिकाई।
स्वारथ अरथि वधै ए गाई।।
जाको दूध धाइ करि पीजे।
ता माता को बध क्यों कीजे।।
पकरी जीउ आनिआ देह बिनाशी।
माटी कहु बिसमिल कीआ।।
जोति सरुप अनाहत लागी।
कहु हलाल किउ कीआ।।

इस्लाम का शाब्दिक अर्थ शांति से भी लगाया गया है। कुरान भी कुर्बानी की ऐसी गलत अवधारणाओं की जड़ पर प्रहार करती है और जोर देकर कहती है कि ” न तो जानवरों का मांस और न ही खून अल्लाह तक पहुंचता है, बल्कि आपकी तकवा ही उस तक पहुंचती है ,” क्योंकि ईश्वर को भोजन या रक्त की आवश्यकता नहीं है।

क्या मिट्टी के बकरों की कुर्बानी नहीं हो सकती

अंत में इस विमर्श के आलोक प्रश्न यह है कि क्या मिट्टी के बकरे सहित अन्य दूधारु पशुओं की कुर्बानी प्रतीकात्मक नहीं दी जा सकती है? उत्तर है -हाँ, परन्तु इसके लिए मनोदशा को बदलना होगा और कुर्बानी का सही अर्थ समझना होगा। अतः आग्रह है आइये नवाचार करें, मिट्टी का बकरा क़ुर्बान करें। एक क़ुर्बानी के बाद लाखों लीटर पानी सफ़ाई में बर्बाद हो जाता है। मीट के अलावा जानवर का बाक़ी शरीर भी लाखों टन कबाड़ बन जाता है, जो कि प्रदूषण का कारण बन जाता है। जैसे हिंदुओं द्वारा रंगोत्सव पर्व पर जल का प्रयोग कम किया जा रहा है।

दीपोत्सव पर्व पर पटाखों का प्रयोग कम किया जा रहा है, जिससे वायु प्रदूषण ना हो।गणपति और दुर्गा भी इको फ्रेंडली बन रहे है। हिंदुओं में विभिन्न अवसरों पर मिट्टी और गोबर के प्रतीकात्मक स्वरूप बनाकर विविध अनुष्ठान किए जाते हैं,उसी प्रकार आप लोग भी आगे बढ़ें और मिट्टी के बकरे की क़ुर्बानी दें।अगर आपको यह सुझाव अच्छा लगा हो; तो सभी लोगों को अवगत कराएं और इको फ्रेंडली बकरीद मनाइए।

ये भी पढ़ें – भोपाल में ‘इको फ्रेंडली बकरे, मिट्टी से तैयार किए गए मॉडल

Topics: इस्लामबकरीदपेटाबकरों की कुर्बानीइको फ्रेंडली बकरा
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

प्रतीकात्मक तस्वीर

हिंदू युवती से जुबैर ने करन बनकर की दोस्ती, फिर बोला इस्लाम कबूलने पर मदरसे से मिलेंगे 12 लाख रूपये

भोपाल में एक समिति ने इक्रोफ्रेंडली बकरा बनाया

भोपाल में ‘इको फ्रेंडली बकरे, मिट्टी से तैयार किए गए मॉडल

मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ

बकरीद पर सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं, प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर जीरो टॉलरेंस: मुख्यमंत्री

Supreme court

हिंदू नहीं तो SC दर्जा नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा?

Representational Image

…तो क्या Trump Iran से उखाड़ देंगे इस्लामी सत्ता तंत्र? America-Israel हमले के पीछे एजेंडा ‘आम ईरानियों की आजादी’!

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का पश्चिम एशिया का दौरा कई मायनों में है ऐतिहासिक।

पश्चिम एशिया और भारत के हित: आवश्यकता से रणनीति तक

Load More

ताज़ा समाचार

Guru Arjan Dev ji

जहांगीर की कट्टरता के शिकार हुए गुरु अर्जुन देव जी

प्रतीकात्मक तस्वीर

क्या है “रेप ऑफ ब्रिटेन?” और क्यों एलन मस्क ने कहा “जेल भेजे जाएं इसे अनदेखा करने वाले नेता?”

Gold Silver Price Today

सोना खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर: 18 जून को जारी हुए नए रेट, जानिए आपके शहर का भाव

PM Modi France visit Airport honour

Explainer: प्रधानमंत्री मोदी की यूरोप यात्रा और G7: भारत की नई वैश्विक कूटनीति का नया अध्याय

आईआईटी दिल्ली

QS World University Ranking 2027: IIT Delhi ने रचा इतिहास, लगातार दूसरे साल बना भारत का नंबर-1 संस्थान

Parad Shivling Haridwar

हरिद्वार में रचा गया इतिहास: स्थापित हुआ 5,211 किलो वजनी विश्व का सबसे विशाल पारद शिवलिंग

Ayodhya Ram Mandir

हरिद्वार: संत समाज ने अयोध्या राम मंदिर चंदे हेराफेरी में चंपत राय को दिया क्लीन चिट, विपक्ष की साजिश बताया

Suprime Court

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर ठगों को क्यों कहा परजीवी? जानिए क्या था पूरा मामला?

प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली से केरल तक बारिश का अलर्ट, जानिए आपके राज्य का कैसा रहेगा मौसम

Uttarakhand Fake arms

उत्तराखंड STF ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस गैंग पर शिकंजा कसा, दानिश उर्फ दानू गिरफ्तार; पिस्टल-रायफल समेत 17 कारतूस बरामद

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies