इन्दौर के प्रसिद्ध थोक कपड़ा बाजार से सटा हुआ बाजार सीतलामाता बाजार कहलाता है। सीतलामाता बाजार में मुख्यतः खुदरा कपड़ों की दुकान हैं वो भी विशेषकर महिलाओं के परिधानों की। बड़ी संख्या में महिलाएं यहां कपड़ा खरीदने आती हैं। इस बाजार के व्यापारियों के संगठन ने घोषणा की है कि उनकी दुकानों में कोई भी जिहादी मानसिकता का मुस्लिम सेल्समैन काउंटर पर नियुक्त नहीं किया जाएगा। कई दुकानों पर मुस्लिम कर्मचारी कार्यरत थे, उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया है। यही नहीं, पूरे बाजार में दुकानों के बाहर व्यापारिक संगठन की ओर से इस आशय के सूचना फलक लगा दिए गए हैं कि उनकी दुकानों पर अब कोई भी जिहादी मानसिकता का व्यक्ति कार्यरत नहीं है।
इस सनसनीखेज घटना के पीछे स्थानीय भाजपा नेता और ‘हिन्द रक्षक’ संगठन के संयोजक एकलव्य सिंह गौड़ की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। स्वयं एकलव्य सिंह भी इस सन्दर्भ में खुल कर बयान दे रहे हैं। उनका कहना है कि सीतलामाता बाजार मुख्यतः महिलाओं के परिधानों के लिए जाना जाता है और हजारों महिलाएं यहां रोज परिधान क्रय करने आती हैं। यह क्षेत्र पुराने इन्दौर का हिस्सा है और यहां दुकानों के बाहर छोटी छोटी गालियां हैं जिनमें दुकानों के नुमाइंदे और दलाल आदि ग्राहकों को अपनी दुकान की ओर चलने के आग्रह करते रहते हैं। चूंकि 90% ग्राहक महिलाएं ही होती हैं, अभद्रता की शिकायतें भी मिलती रहती हैं। कई मौकों पर महिलाओं के हाथ पकड़ कर उन्हें अपनी दुकान की ओर ले जाने जैसी घटनाएं भी प्रकाश में आती रही हैं।
एकलव्य गौड़ का दावा है कि इन कर्मचारियों या दलालों में बड़ी संख्या में जिहादी मानसिकता के युवा भी शामिल हैं। वे महिलाओं के साथ अभद्रता से पेश आते हैं और अश्लील इशारे करना या अश्लील भाषा में बातें करना आदि में शामिल रहते हैं। दुकानों के अन्दर भी इसी मानसिकता के कर्मचारियों की भरमार थी और वे अक्सर नई डिजाइन भेजने या कपड़ों सम्बन्धी अन्य सूचनाएं साझा करने के बहाने से महिलाओं से उनके मोबाइल नंबर प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद वे इन महिलाओं को, अक्सर अपनी मजहबी पहचान छुपा कर, फुसलाने का प्रयत्न करते थे और कई मामलों में सफल भी हो जाते थे। कई मामलों में युवतियों के फोटो या वीडियो बना कर ‘ब्लैकमेल’ किया जाता था और उनका मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता था। लोकलज्जा के भय से इस सम्बंध शिकायत या प्राथमिकी आदि को पीड़ित द्वारा टाल दिया जाता था।
एकलव्य गौड़ के अनुसार इस सम्बंध में निजी स्तर पर उन्हें लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं और इसी वजह से 6 जून, 2025 को उन्होंने शहर काजी, मदरसा बोर्ड एवं वक्फ बोर्ड के अध्यक्षों एवं सभी मस्जिद के सदरों के नाम एक खुला पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने उदाहरण सहित इस प्रकार की घटनाओं के घटित होने का उल्लेख किया था तथा सुसभ्य मुस्लिम समाज से इन तत्वों की पहचान कर उन पर नियंत्रण करने सम्बन्धी प्रश्न भी पूछे थे। परन्तु उन्हें कोई उत्तर प्राप्त नहीं हो सका। स्थिति में कोई सुधार न होता हुआ नजर आने पर एकलव्य सिंह गौड़ द्वारा सीतलामाता बाजार के व्यापारियों के साथ एक बैठक में भाग लिया और उन्हें इन समस्याओं की विकरालता से परिचित करवाया। एकलव्य बताते हैं कि परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए तथा अपनी मां—बहनों की सुरक्षा के लिए व्यापारी संघ द्वारा जिहादी तत्वों को तुरन्त प्रभाव से कार्यमुक्त करने का निर्णय लिया गया। यह उल्लेखनीय है कि उक्त निर्णय सीतलामाता व्यापारी संगठन द्वारा बगैर किसी बाहरी दबाव के लिया गया। यही नहीं, बाजार के व्यापारियों द्वारा अपनी दुकानों के बाहर जिहादी मुक्त होने के पोस्टर भी लगा लिए गए हैं। व्यापारी संगठन की कार्यकारिणी के सदस्य अनिल (बबलू) शर्मा द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि संगठन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं और महिला ग्राहक परेशान हो रही थी। बाजार में आने वाली महिलाओं और युवतियों ने व्यापारिक संगठन के इन कदमों पर हर्ष व्यक्त किया है। कई महिलाओं का कहना था कि अब वे यहां आने में सहज और सुरक्षित महसूस कर रही हैं। हालांकि, मुस्लिम पक्ष व्यापारियों के इस निर्णय को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं और इसके चलते होने वाली रोजगार की हानि का वास्ता भी दे रहे हैं। उनके अनुसार लगाए जा रहे आरोप आधारहीन हैं।
एकलव्य सिंह का स्पष्ट मत है कि शिकायत समूचे मुस्लिम समाज से न होकर उन उपद्रवी तत्वों से हैं, जो इस प्रकार की गतिविधियों में संलग्न हैं। स्मरण रहे कि सीतलामाता बाजार के नजदीक का काफी बड़ा क्षेत्र जनसांख्यिकी की दृष्टि से मुस्लिम—बहुल है और इसलिए स्वभावत: इस बाजार में कार्यरत लोगों में मुस्लिम कर्मचारियों की संख्या काफी बड़ी है। ऐसी स्थिति में अधिकांश प्रसार माध्यमों में इसे मुस्लिम विरोधी कदम बताने के ही प्रयास हुए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इस संदर्भ में इन्दौर पहुंचे थे। उन्होंने सम्बन्धित सराफा थाने में जाकर ज्ञापन दिया। परन्तु रास्ते में व्यापारियों और महिलाओं द्वारा उनका जम कर विरोध किया गया। दिग्विजय सिंह की गाड़ी पर चूड़ियां फेंकी गईं, वहीं जब वे थाने के अन्दर थे तब भी थाने के बाहर उनके विरोध में जमकर नारेबाजी हुई। दिग्विजय सिंह द्वारा इंदौर उच्च न्यायालय खंडपीठ में प्रदेश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को लेकर एक याचिका भी दायर की गई है।
अभी फिलहाल कुछ मुस्लिम कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया गया है। इस कदम की महिलाओं द्वारा जिस तरह से सराहना की गई है और इसको लेकर जैसी खुशी जाहिर की गई है, उसे देख कर यह समझा जा सकता है कि सीतलामाता बाजार में महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि, ऐसे निर्णयों में यह संभावना सदैव ही बनी रहती है कि गेहूं के साथ घुन भी पिस जाती है।

















