संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर Panchjanya ने संघ गीतों की विशेष श्रृंखला का विजयादशमी के अवसर पर शुभारंभ किया है. प्रस्तुत है इस श्रृंखला का पहला गीत-
शीर्षक – भारत मां तेरा अभिनंदन…वंदेमातरम्,वंदेमातरम्
शब्द एवं संगीत रचना –कीर्ति माधव व्यास
अध्यक्ष- संस्कार भारती, दुर्ग जिला छ. ग.इकाई
संघ गीत बोल:
भारत मां तेरा अभिनंदन
वंदेमातरम्,वंदेमातरम् ॥
चरण धो रहीं सागर लहरें
नीलांबर परिधान,
करधनी ताप्ती और नर्मदा
यमुना गंग समान,
अमिय धारवाही सरितायें,
वंदेमातरम् वंदेमातरम् ॥
मुकुट हिमालय उन्नत गर्वित भारत की पहचान,
विन्ध्य सतपुड़ा गिरि सह्याद्री,
रक्षा कवच समान,
कण कण मातृभूमि
जय गाये,
वंदेमातरम्, वंदेमातरम् ॥
कुरुक्षेत्र भी धर्मक्षेत्र सा
ऐसा समर विधान,
गीता का उपदेश पार्थ को,
कर्मयोग का ज्ञान,
रणदुंदुभि मुकुल ध्वनि गूंजे,
वंदेमातरम्,वंदेमातरम् ॥
ऋषि मुनि वेद ऋचाएँ गाते
योगी करते ध्यान,
आध्यात्मिकता जग को देता,
भारत देश महान,
जनगणमन श्रद्धा से उचरित,
वंदेमातरम्,वंदेमातरम् ॥
भाल तिलक है लोकमान्य सा
भगतसिंग की आन,
नेताजी सुभाष बाबू के
ओजस्वी व्याख्यान,
स्वतंत्रता संग्राम न भूलें,
वंदेमातरम्,वंदेमातरम् ॥
डॉक्टर हेडगेवार का सपना,
संघ रूप साकार,
हिन्दुभाव के बीज अंकुरित,
गोलवलकर जी के विचार,
भगवा ध्वज फहरायें सभी हम,
वंदेमातरम्,वंदेमातरम् ॥
भारत माँ……………
















