अस्थिरता में भारत से समाधान की अपेक्षा कर रही दुनिया: डॉ. मोहन भागवत
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अस्थिरता में भारत से समाधान की अपेक्षा कर रही दुनिया: डॉ. मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में तख्तापलट व अशांति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये पड़ोसी देश हमारे अपने हैं और इनकी अस्थिरता भारत को प्रभावित करती है। दुनिया भारत से अराजकता का समाधान अपेक्षा कर रही है, जहां संस्कृति और आध्यात्मिकता पर जोर है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Oct 2, 2025, 02:39 pm IST
in भारत
100 years of RSS dr Mohan Bhagwats messege to US

डॉ मोहन भागवत जी, आरएसएस सरसंघचालक

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख डॉ मोहन भागवत ने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हुए तख्तापलट और अशांति की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ये पड़ोसी देश हमारे अपने ही हैं। ये भारत ही थे। ऐसे में इन देशों का अस्थिर होना हमारे लिए भी चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कुछ ऐसी पैदा हो गई हैं कि सुख सुविधाएं बढ़ी हैं, मनुष्य के ज्ञान औ विज्ञान की प्रगति हुई है। व्यवस्थाएं बनी और राष्ट्र पास आए। लेकिन इस परिवर्तन की गति इतनी अधिक है कि मनुष्यों की गति बदलने और विज्ञान का तालमेल नहीं बैठ रहा है। युद्ध और छोटे-मोट कलह तो चल ही रहे हैं। लेकिन, इसके साथ ही चिंता का विषय यह है कि परिवारों का भी पतन हो रहा है, उनमें अत्याचार और अनाचार बढ़ रहा है। इसके अलावा अस्वस्थता, कलह, हिंसा को बढ़ाते हुए विश्व में सब प्रकार की परंपरा, मांगल्य, संस्कृति, श्रद्धा का संपूर्ण विनाश ही परिवर्तन लाएगा, इस प्रकार की उल्टी विचारधारा लेकर एक नया पंथ उदित हो रहा है। इसके कारण समाज में अराजकता बढ़ रही है। अब जब दुनिया इस पर पुनर्चिंतन करता है तो वो अपेक्षा भरी दृष्टि से भारत की ओर देखता है।

दुनिया को अपेक्षा है कि भारत उसे अराजकता से निपटने का उपाय निकालेगा। अच्छी बात ये है कि भारत में लोगों में अपनी परंपरा, संस्कृति और आस्था के प्रति लोगों का प्रमाण लगातार बढ़ा है। संघ के स्वयं सेवकों के साथ ही व्यक्ति और सामाजिक संस्थाएं कमजोरों की सेवा करने के लिए आगे आ रही हैं। कई मामलों में तो समाज ने सरकार के पहल करने से पहले ही खुद से ही समस्याओं का निराकरण कर लिया। संघ भी इसका अनुभव करता है।

इसे भी पढ़ें: RSS@100: श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में उथल-पुथल है चिंता का विषय: डॉ मोहन भागवत

समाज में बढ़ रहा सहयोग और सहभाग

सरसंघचालक जी कहते हैं कि समाज में प्रत्यक्ष सहयोग और सहभाग करने की लोगों की इच्छा बढ़ रही है। देश के बुद्धिजीवी इस तरह के प्रतिमान को स्थापित कर रहे हैं। स्वामी विवेकानंद, दीन दयाल उपाध्याय से लेकर महात्मा गांधी तक ने इसी दृष्टिकोण को सामने रखते हुए कुछ चिंतन दिया है। हालांकि आधुनिक विश्व के पास चिंतन की जो दृष्टि है वो फिलहाल अधूरी है। क्योंकि मानव भौतिक विकास पर ध्यान तो देता है, लेकिन नैतिक विकास का क्या। इसी तरह से विकास होता है तो पर्यावरण की ओर से ध्यान हट जाता है। विकास भी असमान होता है। यही कारण है कि नित नई समस्याएं आन खड़ी हो रही हैं।

हमारी दृष्टि मन, बुद्धि और आध्यात्मिकता पर केंद्रित

आरएसएस प्रमुख भारत की दृष्टि को लेकर कहते हैं कि हमारी दृष्टि मन, बुद्धि, आध्यात्मिकता के साथ चलती है। हमारी दृष्टि व्यक्ति के साथ-साथ मानव समूह और श्रृष्टि का भी विकास साधने वाली है। इसी दृष्टि के आधार पर हजारों सालों तक हमने सुंदर और समृद्ध औऱ परस्पर संबंधों को पहचानने वाला और सहयोगी जीवन प्रस्थापित किया था। आज विश्व की समस्याओं का निदान करने वाला एक शाश्वत रचना दुनिया मांग रही है। दुनिया इसकी अपेक्षा भारत से कर रही है। संघ पिछले 100 साल से इस चिंतन को अपने साथ लेकर चल रहा है।

Topics: विवेकानंद दर्शनमोहन भागवतneighboring country instabilityMohan BhagwatSri Lanka coupNepal CrisisBangladesh unrestनेपाल संकटIndia cultureपड़ोसी देश अस्थिरताspiritual developmentश्रीलंका तख्तापलटsocial cooperationबांग्लादेश अशांतिVivekananda philosophyभारत संस्कृतिRSSआध्यात्मिक विकाससमाज सहयोग
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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