राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना का अर्थ, इतिहास और महत्व जानें
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना का अर्थ, इतिहास और महत्व जानें

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना, जिसे हम "संघ प्रार्थना" कहते हैं, केवल कुछ श्लोकों का समूह भर नहीं है, बल्कि यह संगठन के मूल भाव, ध्येय और जीवनदृष्टि का सार प्रस्तुत करती है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Sep 30, 2025, 11:18 am IST
inसंघ गीत, संघ @100
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना, जिसे हम “संघ प्रार्थना” कहते हैं, केवल कुछ श्लोकों का समूह भर नहीं है, बल्कि यह संगठन के मूल भाव, ध्येय और जीवनदृष्टि का सार प्रस्तुत करती है। इसमें मातृभूमि के प्रति गहन श्रद्धा, राष्ट्रभक्ति, परमेश्वर से शक्ति और सद्गुणों की प्रार्थना, तथा संगठन की सामूहिक कार्यशक्ति का आह्वान समाहित है। यह प्रार्थना संस्कृत भाषा में रचित है और 1940 से संघ के दैनिक व्यवहार में प्रचलित है। आइए संघ प्रार्थना और उसके अर्थ के बारे में जानें-

संघ की प्रार्थना

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।

महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे

पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ।।1।।

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्‌ङ्गभूता

इमे सादरं त्वां नमामो वयम्

त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयं

शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं

सुशीलं जगद् येन नम्र भवेत् श्रुतं चैव यत् कण्टकाकीर्णमार्ग

स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ।।2।।

समुत्कर्षनिःश्रेयसस्यैकमुग्रं

परं साधनं नाम वीरव्रतम्

तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा

हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्

विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्।

परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्र

समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ।।3।।

॥ भारत माता की जय ।।

प्रार्थना का अर्थ

हे वत्सल मातृभूमि! तुझे मेरा सदैव प्रणाम। हे हिन्दुभूमि ! तूने ही मुझे सुख से बढ़ाया है। हे महामंगलमयी पुण्यभूमि तेरे ही कार्य में मेरी यह काया (जीवन) समर्पित हो। तुझे मैं अनन्त बार प्रणाम करता हूं।

हे सर्वशक्तिमान् परमेश्वर! हम हिन्दू राष्ट्र के अंगभूत घटक, तुझे आदरपूर्वक प्रणाम करते हैं। तेरे ही कार्य के लिए हमने अपनी कमर कसी है। उसकी पूर्ति के लिए हमें शुभ आशीर्वाद दें।

विश्व के लिए जो अजेय हो ऐसी शक्ति, सारा जगत विनम्र हो ऐसा विशुद्ध शील तथा स्वतः स्वीकृत हमारे कण्टकमय मार्ग को सुगम करने वाला ज्ञान भी हमें दें।

अभ्युदय सहित निःश्रेयस की प्राप्ति का जो एकमेव श्रेष्ठ उग्र साधन है, उस वीरव्रत का हम लोगों के अन्तःकरण में स्फुरण हो। अक्षय तथा तीव्र ध्येयनिष्ठा हमारे हृदय में सदैव जाग्रत रहे !

तेरे आशीर्वाद से हमारी विजयशालिनी संगठित कार्यशक्ति स्वधर्म का रक्षण कर, अपने इस राष्ट्र को परम वैभव की स्थिति पर ले जाने में पूर्णतः समर्थ हो।

।। भारत माता की जय।।

प्रार्थना संबंधी जानकारी

1. अपनी प्रार्थना के तीन श्लोक हैं। वह संस्कृत भाषा में हैं। ‘भारत माता की जय’ यह प्रार्थना का ही भाग है।

2. प्रार्थना के प्रथम श्लोक का वृत ‘भुजंगप्रयात’ है। उसकी प्रत्येक पंक्ति में बारह अक्षर हैं।

3. दूसरे और तीसरे श्लोक का वृत्त है ‘मेघनिर्घोष’। उसकी प्रत्येक पंक्ति में तईस अक्षर हैं। तेईस अक्षरों की पंक्ति बड़ी होने से हम लोग प्रत्येक पंक्ति के दो भाग करते हैं। प्रथम बारह अक्षर बोलते हैं और बाद में ग्यारह।

4. यह प्रार्थना सन् 1940 से व्यवहार में आई। इसके पूर्व आधी मराठी और आधी हिन्दी में प्रार्थना थी। प्रार्थना के आशय का प्रारूप सन् 1939 में नागपुर के पास सिन्दी में हुई बैठक में तैयार किया गया। उस बैठक में आद्य सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार, श्री गुरुजी, श्री अप्पाजी जोशी, श्री बाबा साहब आपटे, श्री बालासाहब देवरस ये प्रमुख लोग उपस्थित थे। श्री नानासाहब टालाटुले भी इस बैठक के विचार-विनिमय में सहभागी थे।

5. प्रार्थना के प्रारूप का संस्कृत रूपांतर नागपुर के श्री नरहर नारायण भिड़े ने किया और श्री यादवराव जोशी ने उसे आज बोली जाने वाली पद्धति और स्वर दिया। श्री यादवराव ने ही पुणे के संघ शिक्षा वर्ग में उसका प्रथम गायन किया।

प्रतिज्ञा और प्रार्थना

प्रतिज्ञा और प्रार्थना का घनिष्ठ संबंध है। प्रतिज्ञा व्यक्तिगत है, प्रार्थना सामूहिक। प्रतिज्ञा में स्वतः का संकल्प रहता है। पुरुषार्थ का निश्चय प्रकट होता है। प्रार्थना में इस संकल्प की पूर्ति के लिए भगवान के आशीर्वाद की याचना रहती है। प्रतिज्ञा में अपने निश्चय के विचार से व्यक्ति में अहंकार आ सकता है। प्रार्थना भगवान की कृपा की अपेक्षा रखने से अहंकार नियंत्रित करती है। केवल प्रार्थना व्यक्ति को भाग्यवादी और निष्क्रिय कर सकती है। प्रतिज्ञा व्यक्ति को कार्यप्रवण करती है। प्रतिज्ञा व प्रार्थना का इस तरह परस्परपूरक मेल है।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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