नई दिल्ली: अमेरिका के बाद हंगरी ने भी एंटीफा समूहों को आतंकवादी सूची में शामिल कर दिया है। यह उस वामपंथी आंदोलन के खिलाफ एक सशक्त लड़ाई है जो दशकों से दुनियाभर में छदम नामों और छदम चेहरों के जरिए सांप्रदायिक माहौल बनाने और फांसीवादी विचारों को बढ़ावा देकर हिंसा के लिए युवाओं को प्रेरित करने व हिंसा की आग में झोंकने के सुनियोजित षडयंत्र में जुटा है। एंटीफा जैसे वामपंथी आंदोलन और समूह किसी भी देश की मूल संस्कृति और उसके मूल विचार में जहर घोलने का काम करते हैं। अपने सहयोगी चार्ली किर्क की हत्या के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वामपंथी आंदोलन के खिलाफ सशक्त मुहिम छेड़ी और एंटीफा (Antifa) को आतंकवादी संगठन में शामिल कर दिया था। इसके बाद हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने भी यह कदम उठाया है।
भारत में भी एंटीफा जैसे कई वामपंथी संगठन
एंटीफा खुद को वामपंथी फासीवाद-विरोधी और नस्लवाद-विरोधी संगठन बताता है। लेकिन सच यह है कि यह संगठन दुनियाभर में हिंसक गतिविधियों में संलिप्त रहा है। यह वामपंथी अतिवादी समूह किसी संगठन से नहीं बल्कि समूहों और व्यक्तियों के नेटवर्क से चलता है। हंगरी ने एंटीफा समूह और हैमरबैंड/एंटीफा ओस्ट (Hammerbande/Antifa Ost) समूह को आतंकवादी सूची में शामिल किया है। यह एक जर्मन सूमह है जो 2023 के बुडापेस्ट हमलों में संलिप्त था।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना था कि एंटीफा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने के लिए हिंसा और आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने इस समूह को बीमारी और वामपंथी आपदा करार दिया था। एंटीफा जैसे कई वामपंथी समूह भारत में भी सक्रिय हैं जो जगह-जगह देश विरोधी माहौल तैयार करते हैं और सनातन धर्म को चोट पहुंचाने का कृत्य करते हैं। अभी हाल ही में उत्तराखंड के देहरादून में हुए पेपर प्रकरण में जिस तरह से आजादी के नारे लगाए गए और नेपाल की स्थिति करने की धमकी दी गई यह किसी भी राज्य के लिए चिंता का विषय है। वामपंथी समूहों की खासियत रही है कि वो किसी भी आंदोलन को हाईजैक करके युवाओं का बरगलाने का काम करते हैं और उन्हें हिंसक गतिविधियों की तरफ धकेलते हैं।
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पोर्टलैंड में सैनिक भेज रहा है अमेरिका, एंटीफा फैला रहा है यहां ‘आतंकवाद’
पोर्टलैंड की स्थिति भी बेहद खराब है। अमेरिका यहां सैनिक भेज रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अगर जरूरत पड़े तो पूरे ताकत के साथ पोर्टलैंड की स्थिति में सुधार किया जाएगा और वहां होने वाली हिंसा से निपटा जाएगा। ट्रंप का आरोप है कि यहां Antifa और वामपंथी समूहों द्वारा घरेलू आतंकवाद फैलाया जा रहा है और इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट सुविधाओं को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर ओरेगन राज्य ने इसे संघीय अतिक्रमण बताया और अदालत में मुकदमा दायर कर कहा कि राष्ट्रपति का आदेश अवैध है। Antifa और Black Lives Matter जैसे वामपंथी समूह खुद को सामाजिक न्याय के पक्षधर बताते हैं लेकिन इनकी गतिविधियां हिंसात्मक रूप ले लेती हैं।
पोर्टलैंड के मेयर का दावा- कोई अराजकता और हिंसा नहीं हुई
वहीं पोर्टलैंड के मेयर कीथ विल्सन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओरेगॉन के सबसे बड़े शहर में संघीय सैनिकों को भेजने की योजना का विरोध किया है। उनका दावा है कि यहां कोई अराजकता या हिंसा नहीं है। ट्रंप ने इससे पहले घोषणा की थी कि गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम के अनुरोध पर पोर्टलैंड में सैनिक भेजने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना था कि अगर एंटीफा के खिलाफ जरूरत पड़े तो सैनिकों को पूरी ताकत के इस्तेमाल का अधिकार दिया जाएगा।

एंटीफा के साथ ही मुस्लिम एक्टिविस्ट नेटवर्क भी पोर्टलैंड में सक्रिय…
पोर्टलैंड की जनसंख्या लगभग 6.4 लाख है। यह शहर लंबे समय से लेफ्ट-लिबरल और LGBTQ समुदाय की सक्रियता का केंद्र रहा है। यहां अमेरिका का सबसे पुराना Antifa संगठन ‘रोज सिटी Antifa’ सक्रिय है। यहां मुस्लिम एक्टिविस्ट नेटवर्क भी सक्रिय हैं। ये लोग यहां फिलिस्तीन और इस्लामी मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं। समस्या यह है कि ऐसे आंदोलन परंपरागत अमेरिकी परिवार व्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थानों और समाज की स्थिरता के लिए चुनौती बन रहे हैं। Antifa और वामपंथी समूह परंपरागत मूल्यों और सामाजिक संरचना का विरोध करते हैं। उन्हें पुराना और दमनकारी बताते हैं। समर्थक इसे नागरिक अधिकारों की लड़ाई कहते हैं जबकि आलोचक इसे अराजकता और हिंसा का मार्ग मानते हैं।
पोर्टलैंड में प्रोटेस्ट साल 2020 में शुरू हुए। जॉर्ज फ्लॉयर्ड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद अमेरिका भर में Black Lives Matter आंदोलन हुआ। पोर्टलैंड में इसका सबसे ज्यादा असर हुआ और यहां लंबे समय तक हिंसक प्रदर्शन हुए। इसी के बाद ICE (Immigration and Customs Enforcement) का विरोध हुआ। हाल के प्रदर्शन ज्यादातर ICE बिल्डिंग के आसपास हुए। ओरेगन की गवर्नर और पोर्टलैंड के मेयर दोनों का कहना है कि हालात काबू में हैं और सैनिकों की जरूरत नहीं है। लेकिन ट्रंप इसे कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताकर हस्तक्षेप कर रहे हैं और उनका कहना है कि Antifa और वामपंथी समूहों यहां घरेलू आतंकवाद फैला रहे हैं।
ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद US में फिर से सक्रिय हुआ एंटीफा
ANTIFA वामपंथी विचारधारा का समूह है। यह अमेरिका में दक्षिणपंथी विचारधारा का विरोध करता है। एंटीफा: द एंटी-फासीस्ट हैंडबुक के लेखक मार्क ब्रे के अनुसार इस समूह की उत्पत्ति यूरोप में 1920 या 1930 के दशक में हुई थी। एंटीफा आंदोलन 1980 के दशक में एंटी-रेसिस्ट एक्शन नामक एक समूह के साथ अमेरिका आया था। 2000 के दशक की शुरुआत तक एंटीफा आंदोलन लगभग निष्क्रिय हो गया था। लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद से फिर से ANTIFA खड़ा हुआ और अमेरिका की सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन होने लगे।

















