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अब नहीं बचेगा नक्सलवाद, अमित शाह ने बताया कब और कैसे होगा इसका अंत?

गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद को सिर्फ बंदूक से नहीं, बल्कि उस सोच से भी लड़ना होगा जो इसे जन्म देती है। जब तक समाज यह नहीं समझेगा कि नक्सलवाद को समर्थन देने वाले लोग हमारे ही बीच रहते हैं, तब तक इससे पूरी तरह छुटकारा पाना मुश्किल होगा।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Sep 28, 2025, 07:42 pm IST
in भारत
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन (SPMRF) द्वारा दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘भारत मंथन 2025’ नामक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस बार का विषय था “नक्सल मुक्त भारत”। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाग लिया और एक प्रभावशाली भाषण दिया। अमित शाह ने कहा कि भारत 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद की केवल हिंसक गतिविधियों को खत्म करना ही काफी नहीं है, बल्कि इस विचारधारा को जन्म देने और पोषण करने वालों को पहचानना और समझना भी जरूरी है।

गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद को सिर्फ बंदूक से नहीं, बल्कि उस सोच से भी लड़ना होगा जो इसे जन्म देती है। जब तक समाज यह नहीं समझेगा कि नक्सलवाद को समर्थन देने वाले लोग हमारे ही बीच रहते हैं, तब तक इससे पूरी तरह छुटकारा पाना मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद इसलिए नहीं फैला कि विकास नहीं हुआ, बल्कि नक्सलवाद के कारण ही विकास रुका। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है- 2014 से 2025 तक सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 12,000 किलोमीटर सड़कें बनाई हैं, जिससे इन इलाकों में विकास की रफ्तार तेज हुई है। अमित शाह ने खुलासा किया कि हाल ही में नक्सलियों की ओर से एक पत्र जारी किया गया जिसमें उन्होंने आत्मसमर्पण की बात कही लेकिन साथ ही युद्धविराम की मांग भी की। शाह ने साफ कहा कि जो आत्मसमर्पण करना चाहता है, उसके लिए युद्धविराम की जरूरत नहीं। वह हथियार डाले, सरकार उसे पुनर्वास देगी। उन्होंने वामपंथी दलों और कुछ एनजीओ पर निशाना साधते हुए कहा कि जब ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट हुआ, तो कई लोग अचानक सहानुभूति जताने लगे। उन्होंने सवाल किया कि इन लोगों ने कभी नक्सली हिंसा में मारे गए आदिवासियों के लिए आवाज क्यों नहीं उठाई?

अमित शाह ने बताया कि साल 2024 में नक्सल विरोधी अभियानों में 290 नक्सली मारे गए, जो हथियारों से लैस थे। इसके अलावा 1090 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और 881 ने आत्मसमर्पण किया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति साफ है- “जो आत्मसमर्पण करेगा, उसके लिए रेड कार्पेट है लेकिन जो बंदूक उठाएगा, उसे गोली से जवाब मिलेगा।”

जम्मू-कश्मीर में भी सफलता की कहानी- अपने भाषण में अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद, वहां शांति और विकास की दिशा में बड़ा बदलाव आया है। सुरक्षाकर्मियों की मौतों में 65% और आम नागरिकों की मौतों में 77% की कमी आई है। पहली बार वहां ग्राम पंचायत और जिला परिषद चुनाव में भारी मतदान हुआ- कुछ क्षेत्रों में 99.8% वोटिंग दर्ज की गई। अंत में, अमित शाह ने उन सभी परिवारों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने 1960 के दशक से लेकर अब तक नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्रियजनों को खोया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर उस व्यक्ति के साथ है, जो इस लड़ाई में भारत के साथ खड़ा है।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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