नई दिल्ली: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूचि में शामिल करने को लेकर चल रहे आंदोलन में चार लोगों की मौत हो गई। युवाओं को बरगलाने और हिंसा को भड़काने का आरोप झेल रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के एनजीओ के विदेशी फंड लेने के लाइसेंस को गृह मंत्रालय ने रद्द कर दिया है। उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने हिंसा की सख्ती से जांच की बात कही है। उनका कहना था कि यह लद्दाख को जलाने की साजिश थी। दूसर तरफ, पीपल्स कॉनफ्रेंस चीफ सज्जाद गनी लोन ने इस हिंसा में मारे गये लोगों को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने हिंसा के दौरान मारे गये लोगों की मौत पर कहा कि लद्दाख के लोग अपने कर्मों का फल भुगत रहे हैं।
70 सालों से लद्दाख ने कश्मीर के लोगों को किया बदनाम…
सज्जाद गनी लोन ने कहा कि लद्दाख के चार लोगों की मौत का मुझे दुख है। उनकी आत्मा का शांति मिले। मैं किसी बिना लांग लपेट के सच को सच कहना चाहता हूं। यहां जो कुछ भी हो रहा है वह अपने ही किए का फल है। 70 सालों तक लद्दाख ने कश्मीर के लोगों को बदनाम किया। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग जिस दौर से गुजर रहे हैं उनकी हालत एक ऐसे खरीदार जैसी हो गई है जो कि सौदा करने के बाद पछताता है। यहीं उनके कर्मों का फल है। हंदवाड़ा से विधायक लोन ने यही नहीं रुके और उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार लद्दाख का इस्तेमाल कश्मीरियों को परेशान करने के लिए करती है। लद्दाख का जम्मू-कश्मीर का हिस्सा होना भी हमारे लिए अच्छा नहीं था।
लेह हिंसा में पुलिस ने 60 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार था। जिनमें से कुछ प्रदर्शनकारियों की कोई भूमिका न पाए जाने पर उन्हें रिहा भी कर दिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में नेपाल और जम्मू-कश्मीर के डोडा के लोग भी शामिल हैं। हिंसा के दौरान पुलिस पर हमला करने वाले दो नेपाली नागरिकों को भी गिरफ्तार किया गया है। सरकार ने लद्दाख हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने लद्दाख आंदोलन की तुलना नेपाल से की थी। उनकी इस विवादास्पद टिप्पणी को भी हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि लेह में हो रहा विरोध प्रदर्शन एक ‘जेन-जेड क्रांति’ है और युवा बेरोजगारी और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के छीने जाने से आंदोलित हैं। दरअसल, लेह और लद्दाख में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। ये विरोध प्रदर्शन वांगचुक की भूख हड़ताल से और तेज हो गये थे और हिंसक रूप ले लिया था। कहा जा रहा है कि यह आंदोलन तब हिंसक हुआ जब युवाओं के एक समूह ने पथराव किया और पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे।

















