नई दिल्ली: लेह हिंसा में अब नई-नई परतें खुल रही हैं। पुलिस ने दो नेपाली प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान इन दोनों नेपाली प्रदर्शनकारियों ने ही पुलिस पर हमला किया था। दोनों की गिरफ्तारी के साथ ही हिंसा के घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया है। पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि झड़पों में दो लोगों को गोली लगी है। इस बात के पुख्ता सबूत मिल चुके हैं कि इस हिंसा को फैलाने में विदेशी तत्वों का हाथ भी है। पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को पहले से ही इस हिंसा के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। क्योंकि उन्होंने ही सबसे पहले लद्दाख आंदोलन की तुलना नेपाल के हिंसक Gen-Z प्रदर्शन से की थी।
लेह हिंसा में नेपाल और डोडा के लोग भी शामिल…
अब तक लगभग 60 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों की कोई भूमिका न पाए जाने पर उन्हें रिहा भी कर दिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में नेपाल और जम्मू-कश्मीर के डोडा के लोग भी शामिल हैं। इससे हिंसा और आंदोलन में देश के बाहर के लोगों की मौजूदगी को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मीडिया रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि हिंसा में चार नेपाली नागरिक घायल हुए हैं। जिनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है और दो का इलाज चल रहा है। इससे इस बात का संकेत मिलता है कि अशांति में विदेशी तत्वों की गहरी संलिप्तता है। गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को अदालत में पेश करने से पहले मेडिकल जांच के लिए एसएनएम अस्पताल ले जाया गया है। जांच जारी रहने पर और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
क्या कहा था सोनम वांगचुक ने जिसके बाद हिंसा के लिए उन्हें ठहराया गया जिम्मेदार
सरकार ने लद्दाख हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने लद्दाख आंदोलन की तुलना नेपाल से की थी। उनकी इस विवादास्पद टिप्पणी को भी हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। बुधवार को सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा था कि लेह में हो रहा विरोध प्रदर्शन एक ‘जेन-जेड क्रांति’ है और युवा बेरोजगारी और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के छीने जाने से आंदोलित हैं। दरअसल, लेह और लद्दाख में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। ये विरोध प्रदर्शन वांगचुक की भूख हड़ताल से और तेज हो गये थे और हिंसक रूप ले लिया था। कहा जा रहा है कि यह आंदोलन तब हिंसक हुआ जब युवाओं के एक समूह ने पथराव किया और पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे।
6 अक्टूबर को केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच बातचीत
इसके बाद गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा कि सोनम वांगचुक ने अपने भड़काऊ बयानों के जरिए भीड़ को उकसाया था। जिसके कारण लेह में कई लोगों की जान गई। गृह मंत्रालय का कहना था कि एक्टिविस्ट सोनम वागचुंग ने अरब स्प्रिंग शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल की Gen-Z क्रांति का जिक्र कर युवाओं को गुमराह किया था। अब तक इन विरोध प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो चुकी है और 50 घायल हुए हैं। केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच 6 अक्टूबर को वार्ता होनी है।
राज्यपाल ने कहा- हिंसा फैलाने के लिए बाहरी लोगों को बुलाया गया
हिंसा को लेकर लेह औल लद्दाख के राज्यपाल कविंदर गुप्ता का कहना है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी बल्कि लद्दाख को जलाने की सुनियोजित साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में एक राजनीतिक पार्टी शामिल थी और हिंसा फैलाने के लिए बाहरी लोगों को बुलाया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस उपद्रव को अंजाम देने के लिए बाहर से लोगों को बुलाकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि साजिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
बता दें कि सीबीआई सोनम वांगचुक और उनकी संस्था के खिलाफ विदेश से मिली फंडिंग की जांच कर रही है। ये जांच पिछले 2 महीने से चल रही है। उन पर अवैध तरीके से विदेश फंडिंग लेने का आरोप है। वह पाकिस्तान भी जा चुके हैं। वहीं, बीजेपी ने लद्दाख में कांग्रेस पर हिंसा भड़काने का गंभीर आरोप लगाया है। बीजेपी ने कांग्रेस पार्षद फुंटसोग स्टैंजिन त्सेपाग की तस्वीरें और वीडियो जारी किए जिनमें उन्हें हिंसक भीड़ का हिस्सा दिखाया गया है।














