मध्य प्रदेश के विपक्षी नेता और कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी हलकों में तूफान खड़ा कर दिया। छिंदवाड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “आदिवासी हिंदू नहीं हैं।”
बयान का माहौल
उमंग सिंघार ने यह बात छिंदवाड़ा में आदिवासी विकास परिषद और राष्ट्रीय करमदार पूजा कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग संस्कृति, रीति-रिवाज और जीवनशैली है। “हम फसल, पेड़ और प्रकृति की पूजा करते हैं, फिर बीजेपी और आरएसएस को इससे क्या दिक्कत है?” सिंघार ने गर्व से कहा कि आदिवासी देश के मूल निवासी हैं और उनकी पहचान को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने पौराणिक कथा का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान राम को जामुन खिलाने वाली शबरी भी आदिवासी थीं।
बीजेपी का पलटवार
सिंघार के बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि कांग्रेस हमेशा हिंदुओं और हिंदुत्व के खिलाफ काम करती है। उन्होंने राहुल गांधी के पिछले बयानों को भी “बचकाना” करार दिया। बीजेपी का आरोप है कि सिंघार का बयान समाज को बांटने की कोशिश है।
आदिवासी वोट बैंक का महत्व
मध्य प्रदेश में आदिवासियों की आबादी 21% से ज्यादा है, जो देश में सबसे अधिक है। राज्य की 230 विधानसभा सीटों में 47 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं। सिंघार खुद भिल आदिवासी समुदाय से हैं, और उनका यह बयान आदिवासी वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
पहले भी विवादों में रहे हैं सिंघार
यह पहली बार नहीं है जब उमंग सिंघार के बयान से विवाद हुआ। 2023 में उन्होंने कहा था कि रामायण में वानर सेना आदिवासी थी और हनुमान जी भी आदिवासी थे, जिस पर बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया था।
जीतू पटवारी ने महिलाओं को कहा था शराबी
गौरतलब है कि इससे पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने करीब एक सप्ताह पहले कहा था कि मध्य प्रदेश की महिलाएं देश में कहीं और की तुलना में अधिक शराब पीती हैं। उस बयान के बाद एक बार फिर से कांग्रेस

















