दारानगर में हो रही है 245 वर्ष से रामलीला, यहां एकादशी को होता है रावण का वध
September 25, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

दारानगर में हो रही है 245 वर्ष से रामलीला, यहां एकादशी को होता है रावण का वध

उत्तर प्रदेश में कौशाम्बी जनपद के दारानगर में परंपरागत तरीके से होती है रामलीला। प्रभु श्रीराम की सेना लाल वस्त्र में और रावण की सेना काले वस्त्र में होती है। दोनों ओर से 25-25 सैनिक होते हैं और एक युद्ध का समय 10 मिनट का होता है।

Written byहरि मंगलहरि मंगल — edited by अरुण कुमार सिंह
Sep 26, 2025, 11:01 am IST
inभारत, उत्तर प्रदेश, धर्म-संस्कृति
दारानगर की रामलीला का एक दृश्य

दारानगर की रामलीला का एक दृश्य

समय के साथ बढ़ते संसाधन और डिजिटल तकनीक पर आधारित होते समाज का सीधा असर रामलीला पर पड़ा है। इस कारण आज अनेक स्थानों की रामलीलाओं की लोकप्रियता का ग्राफ इतना आगे बढ़ गया है कि उनके सजीव प्रसारण विश्व स्तर पर हो रहे हैं। दूसरी ओर ग्रामीण जीवन में अनेक ऐसे स्थान हैं, जिन्होंने सदियों से अपनी पुरानी परम्पराओं और संसाधनों के सहारे रामलीला और राम-रावण युद्ध की लोकप्रियता को आज भी बरकरार रखा है। परम्परागत संसाधनों से हो रही रामलीलाओं में कौशाम्बी जनपद के दारानगर की रामलीला भी शामिल है।

प्रयागराज से 75 किमी दूर दारानगर कौशाम्बी जनपद का एक बड़ा कस्बा है, जिसके समीप शक्तिपीठ माता शीतला धाम और संत मलूक दास का आश्रम है। दारानगर की रामलीला में अंतिम दो दिन चलने वाले सजीव कुप्पी युद्ध को देखने के लिये बड़ी संख्यामें लोग आते हैं। इस रामलीला का मंचन और श्रीराम और रावण के बीच सजीव युद्ध की परम्परा का इतिहास काफी पुराना है। बताया जाता है कि शाहजहां के सबसे बड़े बेटे दारा शिकोह ने ही दारानगर बसाया था जो एक उदारवादी शासक था और सभी मत—पंथों का सम्मान करता था। उसके काल में विभिन्न प्रकार के धार्मिक आयोजन प्रारम्भ हुये थे लेकिन उसकी हत्या करके गद्दी पर बैठने वाले औरंगजेब के कार्यकाल में हिन्दू धर्म के सभी आयोजनों पर रोक लगा दी गई।

245 वर्ष पुरानी रामलीला

रामलीला के मंचन का क्रमवद्ध इतिहास 1779-80 से मिलता है। दारानगर रामलीला समिति के अध्यक्ष जयमणि तिवारी बताते हैं कि पिछले 245 वर्ष से रामलीला का मंचन और रामलीला मैदान में श्रीराम और रावण के बीच सजीव युद्ध होता आ रहा है। इस अवधि में तमाम बदलाव हुये हैं, आधुनिकता का बोलबाला बढ़ा, लेकिन हम अपनी पुरानी परम्पराओं और संसाधनों के सहारे ही पूरा आयोजन करते आ रहे हैं जिसमें मौलिकता और प्राचीन काल की झलक दिखायी पड़ती है। यही कारण है कि हमारी रामलीला और युद्ध जो कि कुप्पी युद्ध के नाम से पूरे क्षेत्र में विख्यात है, को देखने के लिये समीप के जनपद प्रयागराज, प्रतापगढ़, बांदा, फतेहपुर, रायबरेली,चित्रकूट सहित प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई जनपदों से भी लोग आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में पर्यटक और शोधकर्ता भी शामिल हैं। इस क्षेत्र के तमाम लोग जो जीवन—यापन के लिये दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहते हैं, वे लोग भी इस नवरात्रि में रामलीला और कुप्पी युद्ध का आनंद लेने अथवा भाग लेने के लिये गांव आते हैं।

दशमी और एकादशी को होता है युद्ध

रामलीला का प्रारम्भ शारदीय नवरात्रि प्रतिपदा के दिन दारानगर गांव में मुकुट पूजन से होता है। शादीपुर की रामलीला में सीताहरण का मंचन होता है। शादीपुर, कटरा, दारानगर, म्योहरा आदि प्रमुख स्थानों पर अलग—अलग तिथियों में क्रमवार रामलीला का मंचन होता है, लेकिन यह सब दारानगर की रामलीला के नाम से ही सुप्रसिद्ध है। रामलीला का प्रमुख आकर्षण राम-रावण के बीच सजीव कुप्पी युद्ध है जो दशमी और एकादशी को होता है। पहले दिन 4 युद्ध और दूसरे दिन 3 युद्ध होते हैं। दोनों ही दिन म्योहरा के रामलीला मैदान में सुबह से ही बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचने लगते हैं, यद्यपि युद्ध दोपहर में शुरू होता है। प्रभु श्रीराम की सेना लाल वस्त्र में और रावण की सेना काले वस्त्र में होती है। दोनों ओर से 25-25 सैनिक होते हैं और एक युद्ध का समय 10 मिनट का होता है। दोनों ओर के सभी सैनिक स्थानीय होते हैं। मैदान में युद्ध के संचालन के लिये रामलीला कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य तथा क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोग युद्ध मैदान में मौजूद रहते हैं।

सभी सैनिकों के हाथ में कुप्पी

सारे सैनिकों के हाथ में कुप्पी होती है जो मजबूत प्लास्टिक की बनी होती है। इसकी आकृति प्राचीन काल में होने वाले युद्ध में प्रयुक्त होने वाली कुप्पी जैसी होती है। आयोजकों की ओर से युद्ध शुरू करने की सीटी बजते ही दोनों ओर की सेनायें एक—दूसरे पर टूट पड़ती हैं, मानो वास्तविक युद्ध हो रहा है। दोनों ओर की सेनाओं का भाव अपने अपने ईष्ट को विजय दिलाने की ओर होता है। 10 मिनट का समय समाप्त होते ही संचालन करने वालों की सीटी बजती है और युद्ध रुक जाता है। सैनिक अपने स्थान पर जिस हालत में रहता है वहीं रुक जाता है। पहले दिन इस प्रकार के चार युद्ध होते हैं। परम्परा के अनुरूप पहले दिन के चारों युद्ध में लंकापति रावण की सेना को ही विजय मिलती है। आयोजक बताते हैं कि कालांतर में यह कुप्पी ऊंट के चमड़े की बनी होती थी लेकिन पिछले कुछ दशकों से वह उपलब्ध न हो पाने के कारण अब प्लास्टिक की कुप्पी का उपयोग हो रहा है। युद्ध में घायल होने वाले सैनिक वीर भूमि की मिट्टी लगाकर ही अपना इलाज करते हैं।

एकादशी को होता है रावण वध

एकादशी के दिन भी युद्ध का वही समय होता है। दोनों ओर की सेनायें अपने कुप्पी के साथ युद्ध मैदान में उतरती हैं लेकिन उस दिन का रोमांच ज्यादा होता है, क्योंकि रावण की सेनाओं की हार और रावण का वध होता है। आयोजकों की ओर से युद्ध का उद्घोष होते ही दोनों सेनाओं के योद्धा एक—दूसरे पर प्रहार करते हुये वास्तविक युद्ध का रोमांच पैदा करते हैं। दर्शक श्रीराम की सेना का उत्साहवर्धन करने के लिये जय सिया राम, जय सिया राम के गगनभेदी नारे लगाते रहते हैं। रामलीला समिति के सदस्य मृदुल मिश्र कहते हैं कि एकादशी के दिन होने वाले युद्ध का भी समय 10 मिनट का ही होता है और तीनों युद्ध प्रभु श्रीराम की सेना जीतती है। पहले युद्ध में मेघनाथ का वध और सुलोचना का विलाप होता है। तीसरे आखिरी युद्ध में रथ पर सवार भगवान श्रीराम और लक्ष्मण अपने धनुष वाण से राक्षस सेना को परास्त करके युद्ध लड़ रहे रावण का वध कर देते हैं।

एकादशी को रावण वध क्यों

सामाजिक जीवन में हम विजयादशमी पर श्रीराम-रावण युद्ध और रावण का पुतला दहन देखते आ रहे हैं, लेकिन दारानगर में दशमी के बजाय एकादशी के दिन रावण का सजीव वध होता है। जयमणि तिवारी बताते हैं कि रावण का वध दशमी तिथि को हुआ था, लेकिन रावण के प्राण एकादशी प्रारम्भ होने के बाद निकले थे। इसलिये हमारे यहां रावण का वध एकादशी की तिथि को होता है।

साम्प्रदायिक सद्भाव की अद्भुत मिसाल

दारानगर की रामलीला में हिन्दू समाज के साथ-साथ मुस्लिम समाज के लोग बहुत उत्साह से भाग लेते हैं। युद्ध के लिये निकले रामदल को सैयदवाडा के पास बड़ी संख्या में शिया मुसलमानों का समूह, जिसमें महिलायें भी शामिल होती हैं, रोक लेता है। महिलाओं की ओर से रथ पर सवार प्रभु श्रीराम परिवार की पूजा, आरती उतार कर फल और मिष्ठान का प्रसाद वितरण होता है। स्थानीय शिव शंकर मोदनवाल बताते हैं कि दारानगर रामलीला की लोकप्रियता के तीन प्रमुख कारण हैं— पहला, कुप्पी युद्ध, दूसरा, सजीव श्रीराम-रावण युद्ध और रावण वध और तीसरा सामाजिक समरस्ता और साम्प्रदायिक सदभाव का अनूठा संगम।

स्थानीय कलाकार और सैनिक

रामलीला के आयोजन पर साल-दर-साल बढ़ते खर्च पर समिति के महामंत्री योगेन्द्र मिश्र बताते हैं कि रामलीला हो या कुप्पी युद्ध उसमें भाग लेने वाले सभी कलाकार और सैनिक स्थानीय होते हैं। हम बाहर से कलाकार नहीं बुलाते हैं जिससे हमारा खर्च सीमित रहता है। अनेक लोग तो एक लम्बे अर्से से जुड़े हैं और वे कहीं भी रहते हैं रामलीला मंचन के समय आ जाते हैं। इस मेले की तैयारी और पात्रों के अभ्यास नवरात्रि से काफी पहले शुरू हो जाता है, जिसमें स्थानीय लोगों का बड़ा सहयोग होता है।

 

Topics: दारानगरकुप्पी युद्धकौशाम्बी जनपदDaranagar245 साल पुरानी रामलीलाप्राचीन रामलीलाऐतिहासिक रामलीलाUttar PradeshरामलीलाRamlilaKaushambi
हरि मंगल
हरि मंगल
वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार। संस्कृति के जानकार। विभिन्न समाचार पत्रों में लेख प्रकाशित। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

ayodhya deepotsav 2026 2650101 diyas 56000 ghats

अयोध्या दीपोत्सव-2026 में 26,50,101 दीयों का लक्ष्य, 56 घाटों पर 35 हजार वालंटियर्स करेंगे दीप प्रज्ज्वलन

BJP नेता स्मृति ईरानी बोलीं-PM मोदी के सेवा समर्पण संदेश को हर घर तक पहुंचाएं कार्यकर्ता-पदाधिकारी, 17 सितंबर से शुरुआत

Sugar Crises के बीच CM Yogi बोले- हमारे पास कोई कमी नहीं, 7 महीने की चीनी उपलब्ध

Azam Khan

आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय पर ईडी का शिकंजा,जमीन के बाद अब 496 करोड़ के खर्च और चंदे का हिसाब खंगाल रही जांच एजेंसी

Rahul Gandhi

‘राहुल गांधी को झारखंड के छात्रों की चीख सुनाई नहीं पड़ रही, दोहरा चरित्र…’

Ram Mandir

राम मंदिर चढ़ावा मामले में बड़ा खुलासा! बैंक खातों में अचानक बढ़ी लाखों की रकम, एसआईटी जांच तेज

Load More

ताज़ा समाचार

कल का मौसम: 26 सितंबर को 23 राज्यों में ‘मूसलाधार बारिश’, IMD का बड़ा अपडेट

Varanasi Manikarnika Ghat Cleanliness Drive Ganga River Waste Removal Rajesh Shukla Panchjanya

उत्तराखंड: नमामि भारतम् के तहत हरिद्वार में गूंजा ‘पूर्ण वंदे मातरम्’

पत्रकारवार्ता में लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओपी बब्बर (मध्य में)। साथ में राजन ढींगरा (बाएं) और राजकुमार सपड़ा।

जेपी और नानाजी देशमुख की जयंती पर लोकतंत्र सेनानियों का बड़ा आंदोलन: सम्मान की मांग, गृहमंत्री के आवास तक करेंगे मार्च

Varanasi Manikarnika Ghat Cleanliness Drive

वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटते ही बड़ा अभियान: मणिकर्णिका घाट की तलहटी से निकला 100 किलो कपड़ा!

Varanasi Bulldozer Action Zaika Restaurant Demolition VDA Kachhari Road Widening Panchjanya

वाराणसी में फिर चला बुलडोजर: फोर लेन सड़क के रास्ते में आ रहे ‘जायका रेस्टोरेंट’ का अवैध निर्माण ध्वस्त!

Varanasi Kashi Air Show 2026 Namo Ghat Police Review Mohit Agarwal Panchjanya

काशी के आसमान में दिखेगा वायुसेना का गर्जन: 30 लाख की भीड़ संभावित; नमो घाट पर एयर शो की तैयारियां तेज!

VHP Ashok Singhal Centenary Year Programs Bharat Mandapam Amit Shah Panchjanya

अशोक सिंहल जन्मशताब्दी: VHP ने किया कार्यक्रमों का ऐलान- सेवा, समरसता, हिन्दू सशक्तिकरण और मंदिर मुक्ति पर रहेगा फोकस!

श्रीनगर का ऐतिहासिक शीतलनाथ मंदिर जीर्णोद्धार के बाद

कश्मीर में सांस्कृतिक पुनर्जागरण: 36 वर्षों बाद शीतलनाथ मंदिर के खुले कपाट, वैदिक मंत्रों से शुरू हुई पूजा!

Namami Bharatam Vande Mataram 1 Crore People Singing Asia India Book of Records Panchjanya

‘नमामि भारतम्’ ने रचा इतिहास: 1 करोड़ लोगों ने एक साथ गाया ‘वंदे मातरम्’, एशिया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज!

RSS Vijayadashami Utsav Nagpur Reshimbag Sarsanghchalak Mohan Bhagwat Sanjay Gupta Panchjanya

संघ के विजयादशमी उत्सव में मुख्य अतिथि होंगे दैनिक जागरण के मुख्य संपादक संजय गुप्ता, रेशिमबाग में होगा भव्य आयोजन

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies