प्रख्यात लेखक, उपन्यासकार, शोधकर्ता, सरस्वती सम्मान और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. एस. एल. भैरप्पा का बुधवार को बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और क्षेत्र संघचालक डॉ. पी. वामन शेनॉय ने शोक संदेश में कहा कि प्रख्यात लेखक, उपन्यासकार, शोधकर्ता, सरस्वती सम्मान और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. एस. एल. भैरप्पा के निधन की खबर से अत्यंत दुःख हुआ है। पर्व, गृहभंग, धर्मश्री, मंद्र, भिट्टी, सार्थ, आवरण आदि रचनाओं में अपनी अनूठी लेखन शैली के माध्यम से डॉ. भैरप्पा ने जनमानस के हृदय में अमिट जगह बनाई। उन्होंने साहित्य जगत में उल्लेखनीय योगदान दिया। कन्नड़ साहित्य के विकास के साक्षी के रूप में, उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से इस भूमि के समृद्ध इतिहास और संस्कृति से परिचित कराया और बौद्धिक चिंतन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी।
The news of the passing away of the eminent writer, novelist, researcher, recipient of the Saraswati Samman and Padma Bhushan, Dr. S. L. Bhyrappa, has caused immense grief.
Through his unique style of writing in works such as Parva, Grihabhanga, Dharmashree, Mandra, Bhitti,… pic.twitter.com/5aVyu8NFN2
— RSS (@RSSorg) September 25, 2025
आरएसएस से था गहरा नाता
डॉ. एस.एल. भैरप्पा का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से गहरा नाता था। उन्होंने राष्ट्रोत्थान साहित्य, मंथन कार्यक्रम, मंगलुरु साहित्य उत्सव और कई अन्य कार्यक्रमों में भाग लिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से, हम डॉ. एस. एल. भैरप्पा के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ईश्वर उनके परिवार और असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें और दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।
डॉ भैरप्पा सांस्कृतिक जड़ों के प्रति समर्पित रहे : राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी शोक व्यक्त किया। बुधवार को जारी शोक संदेश में उन्होंने लिखा कि कन्नड़ साहित्य जगत की एक प्रतिष्ठित हस्ती और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. एस. एल. भैरप्पा के निधन से अत्यंत दुःखी हूं। उन्होंने साहित्य, दर्शन, संस्कृति और बौद्धिक अन्वेषण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से कन्नड़ साहित्य को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई और साथ ही इसकी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति भी समर्पित रहे। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। मैं उनके परिवार, प्रशंसकों और असंख्य पाठकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं।
प्रधानमंत्री ने जताया दुख
डॉ भैरप्पा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया। पीएम मोदी ने शोक संदेश में कहा कि एसएल भैरप्पा जी के निधन से, हमने एक ऐसे प्रखर व्यक्तित्व को खो दिया है, जिन्होंने हमारी अंतरात्मा को झकझोर दिया और भारत की आत्मा में गहराई से उतर गए। एक निडर और कालजयी विचारक, उन्होंने अपनी विचारोत्तेजक रचनाओं से कन्नड़ साहित्य को गहन रूप से समृद्ध किया।

















