दशकों की मानसिक पीड़ा के बाद रोशडेल की एक ग्रूमिंग गैंग पीड़िता शेर्लोट टेटले ने ट्रेन के आगे आकर अपना जीवन समाप्त कर लिया था और अब सुनवाई के दौरान कई ऐसी बातें सामने निकलकर आ रही हैं, जिनसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। 33 वर्षीय शेर्लोट रोशडेल ग्रूमिंग गैंग की पीड़िता थीं। पिछले वर्ष 25 जून को उन्हें मानसिक अस्पताल से भी बाहर कर दिया गया था, जबकि उनकी मानसिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। पिछले ही वर्ष सितंबर में उन्होंने आत्महत्या की थी।
मानसिक स्वास्थ्य की जटिल स्थिति और लगातार यौन उत्पीड़न
अब इस मामले की सुनवाई चल रही है। इसमें पता चल रहा है कि उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहद जटिल था और वह रोशडेल में ग्रूमिंग गैंग की पीड़िताओं में से एक थीं, जिनके साथ बहुत ही अधिक यौन उत्पीड़न हुआ था। जुलाई 2023 में मैक्लेसफील्ड सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य टीम से अपना इलाज करवा रही थीं। वर्ष 2023 में रोशडेल में उनका उत्पीड़न करने वाला व्यक्ति रोशडेल वापस आ गया था। वे इसे बर्दाश्त नहीं कर पाई थीं।
भावनात्मक अस्थिरता और पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस का शिकार
यह भी इस कार्यवाही के दौरान पता चल रहा है कि उन्हें कई व्यवहार संबंधी और मनोदशा संबंधी बीमारियां थीं, और इनमें भावनात्मक अस्थिरता एवं पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस भी शामिल है। डेली मेल के अनुसार चेशायर कोरोनर सारा मर्फी ने पहली बार टेटली का नाम रोशडेल चाइल्ड सेक्स अब्यूज़ रिंग की पीड़िता के रूप में लिया। कोरोनर ने यह भी बताया कि टेटली को अस्पताल से बिना किसी योग्य आंकलन के छोड़ दिया गया था।
बार-बार आत्महत्या की कोशिश और पुलिस-एम्बुलेंस की लापरवाही
शेर्लोट ने पहले भी ड्रग्स की ओवरडोज के कारण अपनी जान लेने की कोशिश की थी और उन्हें हाई रिस्क वाले मिसिंग पर्सन के रूप में रखा गया था, फिर भी पुलिस और एम्बुलेंस सर्विसेज़ ने उन पर ध्यान नहीं दिया। मर्फी ने Prevention of Future Deaths रिपोर्ट में कहा कि शेर्लोट का मानसिक उत्पीड़न का इतिहास रहा था और वह रोशडेल ग्रूमिंग गैंग की पीड़िता थीं, जिसमें उन्हें अथाह शारीरिक शोषण सहना पड़ा था। जून 2024 में भी उन्होनें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, और कहा था कि उनके दिमाग में ट्रेन के सामने कूदने जैसे विचार आते हैं।
अस्पताल से छुट्टी और बेड न देने की बड़ी चूक
उनकी जांच एक सप्ताह तक की गई थी और फिर यह पाया गया कि उन्हें किसी भी मानसिक स्वास्थ्य के रोगी के बेड की जरूरत नहीं है। उनके लिए घर के विकल्प तलाशे जाने चाहिए। मिस मर्फी का कहना है कि बार-बार शेर्लोट के मन में खुद को मारने के विचार आ रहे थे, मगर पुलिस और एम्बुलेंस ने उनकी सहायता नहीं की। 24 सितंबर 2024 को भी एक सुनवाई में उन्हें आना था, मगर वह नहीं आईं और उन्होंने अपने मानसिक स्वास्थ्य कर्मी से बात की और कहा कि उन्हें खुद को मारने के विचार आ रहे हैं।
आत्महत्या से पहले का दर्दनाक दिन
बाद में वे कम्युनिटी ड्रग और एल्कोहल टीम के ऑफिस गईं और लोगों का कहना था कि वे रो रही थीं। उनका मूड बहुत खराब था। बाद में उन्होंने ट्रेन के सामने आकर आत्महत्या कर ली थी। शेर्लोट की इस आत्महत्या पर अब सोशल मीडिया पर लोग चर्चा कर रहे हैं। टॉमी रॉबिन्सन ने एक्स पर लिखा कि रोशडेल ग्रूमिंग गैंग की एक पीड़िता ने अपना जीवन समाप्त कर लिया। “हर स्तर पर हम फेल हुए हैं!” उन्होंने अपनी पोस्ट में “rape of Britain” की तस्वीर लगाई।
A woman attacked by the Rochdale Muslim rape gang has ended her own life, an inquest heard.
Charlotte Tetley, 33, deliberately sat on train tracks after battling a ‘complex longstanding mental health history’, it emerged today. Ms Tetley turned to drugs in her adult life as a… pic.twitter.com/IxgFMWANQr
— Tommy Robinson 🇬🇧 (@TRobinsonNewEra) September 19, 2025
सोशल मीडिया पर आक्रोश और सिस्टम पर सवाल
लोगों का कहना है शेर्लोट की हत्या सिस्टम ने की है, जिसने उसे न ही सहारा दिया और न ही उसका साथ दिया। लोगों ने लिखा कि एक तरफ पीड़िताएं हैं, जिन्हें अस्पताल में जगह नहीं मिल रही है, तो वहीं दूसरी तरफ इममिग्रेंट बलात्कारी हैं, जिन्हें कम्युनिटी में वापस आने दिया जाता है। पीड़िताएं यह सब देखकर निराशा से भर जाती हैं। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि उसे उन लोगों ने निराश किया, जिन्हें उसकी सहायता करनी चाहिए और उसके साथ खड़ा होना चाहिए था।
मीडिया की चुप्पी और पीड़िताओं की पीड़ा
लोग यह भी प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर जब उसकी मानसिक स्थिति इस सीमा तक खराब थी, तो उसे अस्पताल से छुट्टी क्यों दी गई? शेर्लोट का जीवन पहले बर्बाद हुआ और उसके साथ देश की तमाम संस्थाओं ने दुर्व्यवहार किया और अंत में निरंतर उपेक्षाओं के बाद उसने अपना जीवन समाप्त कर दिया। लोग कह रहे हैं, “अब बहुत हुआ, हमारे लोग बेहतर जीवन के हकदार हैं!” एक यूजर ने लिखा कि एक रेल ट्रैक पर बैठने से पहले वह युवती किस सीमा तक निराश, हताश और टूट गई होगी कि वह ट्रैक पर बैठी रही और तब तक बैठी रही जब तक कि ट्रेन ने उसे मार नहीं डाला। गैंग्स द्वारा प्रताड़ित और अधिकारियों द्वारा निराश शेर्लोट की मृत्यु अत्यंत हृदय विदारक है। शेर्लोट की मृत्यु हृदय विदारक है, परंतु इससे भी कहीं अधिक हृदय विदारक है वहां की मीडिया का अभी भी इन पीड़िताओं की पीड़ा को अगर-मगर करके लिखना और इस प्रकार लिखना कि कहीं उनपर इस्लामोफोबिक होने का ठप्पा न लग जाए।

















