ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग को लेकर लगातार जांच और प्रदर्शन दोनों ही चल रहे हैं। जांच चल रही है और उसका दायरा बढ़ रहा है और आरोपी भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब पाकिस्तान से परे और भी मुस्लिम मुल्कों के लोग आ रहे हैं और ग्रूमिंग गैंग्स की समय सीमा भी बढ़ रही है। और जैसे-जैसे मुस्लिम मुल्कों के लोग सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे यूके में स्थानीय लोगों का विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है।
बुधवार को नॉर्विच में भी आम लोगों ने प्रदर्शन किया। नॉर्विच सिटी हॉल के बाहर ‘रेप गैंग प्रोटेस्ट नॉर्विच’ नाम से आयोजित आप्रवासन-विरोधी प्रदर्शन के लिए सैकड़ों लोग जमा हुए, जिसके बाद उनकी जवाबी प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प हो गई। गुस्साए प्रदर्शनकारी कीर स्टार्मर के खिलाफ भी नारे लगा रहे थे।
क्यों थे लोग गुस्सा?
लोगों का गुस्सा आखिर किस बात पर फूटा था और वह भी इस तरह कि वे लोग घरों से बाहर निकलकर बिना किसी डर के विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। दरअसल, अगस्त 2023-205 के बीच दो किशोरियों को शिकार बनाने को लेकर सात अफगानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। नॉरफ़ॉक कॉन्स्टेबुलरी ने बताया कि ये लोग “अफ़ग़ान नागरिक और शरणार्थी” हैं; इनमें से छह की उम्र 20 साल है, जबकि बाकी 21 साल के हैं।
ये हैं 20 वर्षीय अहमदिन अहमदजेइ, 20 वर्षी जामिल खलील, 20 वर्षीय फजल, 20 वर्षीय कैस ककेर, 20 वर्षीय मोहम्मद फारुक शीनवारी, 21 वर्षीय अली अहमद, और 20 वर्षीय सैयद वाहिद। ये सभी रेफ्यूजी हैं। पुलिस के अनुसार इन सातों में से पाँच लोग छोटी नावों के माध्यम से देश में घुसे थे। एक एक लॉरी में छिपकर आया था तो एक पोर्ट के माध्यम से।
इनमें से कोई भी नोरफ़ॉल्क में किसी भी शरणार्थी होटल में नहीं रुका था और न ही ये अपराध ऐसे किसी भी होटल में हुए थे, जहां पर शरणार्थी रुके हुए थे।
लोग विरोध प्रदर्शन करने पहुँच गए
जैसे ही अफगानी नागरिकों के ग्रूमिंग गैंग्स में शामिल होने और उन्हें हिरासत मे लिए जाने की खबर वायरल हुई वैसे ही आम लोगों के बीच गुस्सा फैल गया और लोग प्रदर्शन करने के लिए पहुँच गए। लोग “मेक ब्रिटेन ग्रेट अगेन” का हैट लगाकर भी पहुंचे हुए थे और नारे लगा रहे थे कि “देशभक्ति एक करती है, ब्रिटिश पहचान सबसे पहले हैं, और आइए हमारे साथ जुड़ें!”
डेली मेल के अनुसार, ग्रूमिंग गैंग्स के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों की भीड़ यूनियन जैक वाला झण्डा लिए हुए थी और उनके हाथों में बैनर थे, जिन पर लिखा गया था कि “स्टॉप इमग्रैशन, स्टार्ट डेपोर्टिंग,” और “यूनाइट द राइट!” जैसे ही इन लोगों के इकट्ठा होने की खबर वायरल हुई, वैसे ही इनका विरोध करने के लिए भी एक समूह प्रदर्शन करने के लिए पहुँच गया और आपस में झड़प हो गई।
मगर ग्रूमिंग गैंग्स का विरोध कर रहे नागरिकों ने प्रदर्शन जारी रखा। उनमें से लोग कह रहे थे कि “ब्रिटिश लोगों को ऐसा लगता है कि उनकी पीठ में छुरा भोंक दिया गया है। और वे खतरे में हैं। उन्हें सुरक्षित महसूस नहीं होता है।“
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एक 46 वर्षीय व्यक्ति पैट्रिक कॉर्नर ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ रही है क्योंकि वे अब विदेशियों के आगे झुकना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि “लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। हमें इस बात को लेकर बहुत चिंता है कि आखिर माइग्रेन्ट कर क्या रहे हैं। बस बहुत हुआ।“
लगातार हो रहे ऐसे विरोध प्रदर्शन
यूरोप के कई देशों में अब शरणार्थियों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले साल ही एक 14 वर्षीय लड़की और एक महिला के यौन शोषण को लेकर बॉल होटल के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए थे। और हाल ही में नीदरलैंड्स में भी लूसड्रेक्ट में भारी संख्या में इकट्ठा होकर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था कि वहाँ पर लड़कियों के हॉकी क्लब के बगल में शरणार्थियों के रहने के लिए शेल्टर बनाया जा रहा है।
लोगों ने लड़कियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए न केवल विरोध प्रदर्शन किया था, बल्कि यह भी कहा जा रहा है कि परिसर के एक हिस्से को आग के भी हवाले कर दिया था।
कड़ी कार्यवाही का आश्वासन
डेली मेल के अनुसार 2023 में एक किशोरी द्वारा घटना की रिपोर्ट कराए जाने के बाद पुलिस ने कार्यवाही आरंभ की थी। पिछले सप्ताह ही Safeguarding and Violence Against Women and Girls विभाग की मंत्री, नैटली फ़्लीट ने कहा था कि ये बहुत ही घिनौने मामले हैं, और यह बात कि संदिग्ध अवैध रास्तों से आए थे और भी खतरनाक है और उनकी प्रवृत्ति को बताती है और उन्होनें यह भी कहा था कि इन अपराधों के लिए दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को क़ानून की पूरी सख़्ती का सामना करना होगा, और यह सरकार इस बात पर पूरी तरह स्पष्ट है कि घिनौने विदेशी अपराधियों के लिए UK में कोई जगह नहीं है।
ग्रूमिंग गैंग के विषय में उन्होनें सरकार की असफलता को मानते हुए कहा कि ग्रूमिंग गैंग्स इस देश की सबसे बड़ी असफलताओं में से एक है। हम कमज़ोर लड़कियों की सुरक्षा के लिए अपनी पूरी ताक़त लगा देंगे, और हम पीड़ितों को नज़रअंदाज़ नहीं होने देंगे, जैसा कि पहले कई लोगों के साथ हुआ था। देखना होगा कि इस मामले में पीड़ित लड़कियों को न्याय मिलता है या नहीं।

















