ब्रिटेन में वेल्स के मॉन्माउथशायर (Monmouthshire, united kingdom) काउंटी में एक बहुत बड़ी इमारत में एक लाइब्रेरी चला करती थी। वह एक सार्वजनिक संपत्ति है और जनता के लिए ही उस स्थान का प्रयोग हो सकता है। शहर की काउंसिल का मन हुआ और उसने सार्वजनिक इमारत को एक मजहब विशेष को लीज पर देने को तैयार हो गई। एक ऐतिहासिक लाइब्रेरी की इमारत को कस्बे की पहली मस्जिद के रूप में बदलने के निर्णय का विरोध करते हुए एक ईसाई समूह ने कानूनी कदम उठाया।
इस काउंटी में काउंसिल में लेबर का शासन है। इस इमारत को दस वर्षों से प्रयोग नहीं किया गया। इसलिए मुस्लिम कम्युनिटी एसोसिएशन को 30 साल तक पट्टे पर देने के लिए तैयारी की गई। मगर इस निर्णय का लोगों ने विरोध किया। दीवारों पर “नो मस्जिद” के नारे लिखे। यह ग्रेड II इमारत वर्ष 1905 में बनी कार्नेगी लाइब्रेरी की इमारत है, जिसे स्कॉटिश अमेरिकन स्टील व्यापारी एंड्रू कार्नेगी द्वारा स्थापित £4000 की निधि के साथ बनाया गया था।
डेली मेल के अनुसार क्रिश्चियन लीगल सेंटर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंड्रिया विलियम्स ने एक बयान में कहा कि यह मामला ‘पारदर्शिता, निष्पक्षता और सार्वजनिक संपत्ति के उचित उपयोग के बारे में गंभीर प्रश्न उठाता है।’ परंतु काउन्सलर बकलर का कहना है कि यह मामला धार्मिक न होकर एक संप्रदाय विशेष को विशेषाधिकार दिए जाने को लेकर है। यह कोई ईसाई एजेंडा नहीं है, बल्कि यह उस तथ्य के विषय में है कि एक ऐसी इमारत को बेहद ही मामूली किराए पर एक संप्रदाय को दिया जा रहा है, जिसे जनता को कार्नेगी ट्रस्ट ने वर्ष 1905 में सौंपा था।
लोगों का कहना है कि यह इमारत सरकार की है ही नहीं, तो फिर वह कैसे किसी मजहबी कारण के लिए मॉन्माउथशायर मुस्लिम कम्युनिटी एसोसिएशन को दिया जा सकता है? बीबीसी के अनुसार यह निर्णय काउंसिल ने जून में लिया था।
रेशल बकलर ने लोकल डिमॉक्रेसी रेपोर्टिंग सर्विस को बताया कि वह और उनके सहकर्मी उस पूरी प्रक्रिया से असन्तुष्ट थे, जिस तरह से तमाम चिंता को नकारा जा रहा था। वहीं सेवानिवृत्त बैपटिस्ट मंत्री और एबरगावेनी टाउन काउंसिल के लेबर सदस्य रेवरेंड गैरेथ वाइल्ड, जो इस पट्टे के पक्ष में हैं, उन्होनें हैरानी व्यक्त की कि इसका विरोध एक ईसाई संगठन द्वारा किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस पट्टे का विरोध नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि पट्टे को लेकर मुस्लिम समुदाय को इसलिए प्राथमिकता दी गई है क्योंकि उनके पास अपनी इबादत करने के लिए कोई भी समर्पित स्थान नहीं है।
जीबी न्यूज़ के अनुसार काउन्सलर कलार्ड का यह कहना है कि मस्जिद के लिए आम लोगों के कर का पैसा प्रयोग नहीं किया जाएगा क्योंकि इस खाली लाइब्रेरी के लिए प्रतिस्पर्धी बोलियां लगाई गई थीं और जिनमें से सबसे अधिक पैसे मॉन्माउथशायर मुस्लिम कम्युनिटी एसोसिएशन ने ऑफर किये थे। यह भी कहा कि यह मॉन्माउथशायर काउंटी काउंसिल कैबिनेट की महत्वाकांक्षा भी थी कि स्थानीय मुस्लिम आबादी के पास उनकी इबादत के लिए अपना स्थान हो।
हालांकि इसे लेकर अब कानूनी लड़ाई आरंभ हो गई है, क्योंकि लोग एक ऐतिहासिक स्थल का चरित्र बदलने को लेकर नाराज हैं।

















