यूरोप के कई बड़े देश अपनी कथित उदार नीति वाली मूर्खता का दंश झेल रहे हैं। अप्रवासियों को अपने देश के बारे में सोचे बिना ही शरण देना इन देशों के लिए नासूर बनता जा रहा है। ताजा मामला ब्रिटेन का है, जहां कीर स्टार्मर की अगुवाई वाली सरकार की तुष्टिकरण वाली नीतियों के चलते वहां लोगों ने सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है। बीते दिन लंदन की सड़कों पर दो अलग-अलग बड़े प्रदर्शन हुए। एक तरफ टॉमी रॉबिन्सन की यूनाइट द किंगडम रैली थी और दूसरी तरफ नकबा डे के मौके पर फिलिस्तीन के समर्थन में निकाली गई रैली थी।
रैलियों में हजारों की भीड़
जीबी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, टॉमी रॉबिन्सन की रैली में करीब 50,000 लोग शामिल हुए। लोग सेंट जॉर्ज क्रॉस और यूनियन जैक के झंडे लेकर चल रहे थे। मार्च किंग्सवे से व्हाइटहॉल होते हुए पार्लियामेंट स्क्वायर तक गया। फिलिस्तीन समर्थित रैली के आयोजकों का दावा है कि उनके यहां 2.5 लाख लोग थे, जबकि पुलिस ने इसे 30,000 बताया। दोनों तरफ कुल मिलाकर हजारों लोग सड़कों पर थे।
पुलिस की तैयारी और अरेस्ट
पुलिस ने इस पूरी रैली को देखते हुए करीब 4,000 अधिकारी तैनात किए। इसे हाल के सालों में सबसे बड़े पुलिस ऑपरेशन में से एक बताया गया। शाम 7:30 बजे तक कुल 43 अरेस्ट हुए। पुलिस ने कहा कि संख्या ज्यादा लग सकती है, लेकिन दोनों प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण रहे। चार पुलिसवालों पर हमला हुआ और छह को हेट क्राइम का सामना करना पड़ा।
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कीर स्टार्मर को हटाने की मांग
रैली में लोग “कीर स्टार्मर आउट” और दूसरे नारे लगा रहे थे। कुछ लोग “मेक इंग्लैंड ग्रेट अगेन” वाली टोपियां पहने थे, क्रॉस लेकर चल रहे थे और “क्राइस्ट इज किंग” के नारे लगा रहे थे। टॉमी रॉबिन्सन (जिनका असली नाम स्टीफन यैक्सली-लैनन है) ने पार्लियामेंट स्क्वायर में भीड़ को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 2029 के चुनाव में वोट और एक्टिविज्म के जरिए देश बचाना है। उन्होंने लोगों से वोटर रजिस्ट्रेशन और राजनीतिक भागीदारी की अपील की। इस रैली में केटी हॉपकिन्स, ऑन्ट मिडिलटन, लॉरेंन्स फॉक्स, पूर्व कंजर्वेटिव सांसद एंड्र्यू ब्रिजेन शामिल रहे।
प्रो-पलेस्टाइन मार्च
यह मार्च नकबा डे (78वां साल) याद करने के लिए था। लोग केफिया पहने थे और “फ्री पलेस्टाइन” जैसे बैनर लेकर चल रहे थे। कुछ जगहों पर ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक के झंडे भी दिखे। इसमें सत्तारूढ़ कीर स्टार्मर की लेबर पार्टी के सांसद डायने अबॉट भी शामिल रहे। जिन्होंने दक्षिणपंथी विचारधारा को असली दुश्मन करार दिया।

















