ओडिशा सरकार ने पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर के प्रबंधन के संबंध में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें 23 सितंबर को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के पवित्र आभूषणों को रत्न भंडार में स्थानांतरित करना और भक्तों के लिए कतार प्रणाली लागू करना शामिल है।
कानून, लोक निर्माण और आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि कतार में दर्शन की लंबे समय से चली आ रही समस्या अब मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मंजूरी के बाद हल हो गई है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में स्थापित दान पेटियां (हुंडियां) कतार प्रणाली के सुचारू संचालन में बाधा डाल रही हैं।मुख्यमंत्री की स्वीकृति से इन हुंडियों को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि इन दान पेटियों (हुंडियों) को कहां रखा जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) और पुरी जिला मजिस्ट्रेट की आपसी सहमति से लिया जाएगा। हुंडियों के स्थानांतरण के बाद, कतार दर्शन को परीक्षण के आधार पर लागू किया जाएगा।
उन्होंने आगे बताया कि भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के आभूषण, जो फिलहाल अस्थायी कोषागारों में सुरक्षित हैं, उन्हें 23 सितंबर को मूल रत्न भंडार में स्थानांतरित किया जाएगा। यह प्रक्रिया सुबह 4 बजे द्वार फिटा अनुष्ठान से आरंभ होगी और अमृत बेला (शुभ मुहूर्त) में सम्पन्न की जाएगी। यदि किसी कारणवश 23 सितंबर को यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है तो इसे अगले दिन 24 सितंबर को पूरा किया जाएगा। श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढी ने बताया कि 23 सितंबर को स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान सार्वजनिक दर्शन प्रतिबंधित रहेगा। आभूषणों को रत्न भंडार में सुरक्षित रखने के बाद कक्ष का दरवाजा मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में सील कर दिया जाएगा और चाबियां जिला कोषागार में जमा होंगी।
पाढी ने आगे कहा कि संपूर्ण प्रक्रिया 1978 की आधिकारिक सूची (इन्वेंट्री) के आधार पर सत्यापित और पर्यवेक्षित की जाएगी। आभूषणों की विस्तृत गणना और मूल्यांकन (गिनती ) का निर्णय मंदिर प्रबंध समिति करेगी। उन्होंने बताया कि रत्न भंडार उप-समिति का गठन प्रबंध समिति के निर्णय के अनुसार किया गया है। आज हुई अहम बैठक में सुरक्षा प्रोटोकॉल, अनुष्ठानिक व्यवस्थाओं और सत्यापन प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भीतर और बाहर दोनों रत्न भंडार कक्षों की आवश्यक मरम्मत पूरी कर ली है। वर्तमान में भीतरा रत्न भंडार के आभूषण खट शेज घर में तथा बाहरा रत्न भंडार के आभूषण चंगड़ा घर और फुल घर में सुरक्षित रखे गए हैं। अब सभी पवित्र आभूषण अपने मूल कक्ष रत्न भंडार में स्थानांतरित किए जाएंगे।

















